7 देशों में अमेरिकी ‘आंख’ भेद रहे ईरानी ड्रोन, सैटेलाइट फुटेज से खुलासा, 250 करोड़ से ज्यादा कीमत

Iranian Drones: मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सुरक्षा तंत्र पर ईरान के हमलों का बड़ा असर देखने को मिल रहा है. सैटेलाइट फुटेज और रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी ड्रोन्स ने अमेरिकी बेस के रडार और एयर डिफेंस सिस्टम को भारी नुकसान पहुंचाया है. इस तकनीकी जंग में अमेरिका को अरबों डॉलर के नुकसान का सामना करना पड़ रहा है.

Iranian Drones: एनबीसी न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, सात देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हुए ईरानी ड्रोन हमलों ने हड़कंप मचा दिया है. वेरिफाइड विजुअल्स और सैटेलाइट इमेज से यह पुष्टि हुई है कि ईरानी ड्रोन अब अमेरिका के क्षेत्रीय सुरक्षा कवच को आसानी से भेद रहे हैं. विश्लेषण में सामने आया है कि 26 में से 21 बार इन ड्रोन्स ने अपने टारगेट को सफलतापूर्वक निशाना बनाया है. ये हमले मुख्य रूप से ट्रांसपोर्ट हब, डिप्लोमैटिक सेंटर, एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर और मिलिट्री बेस पर केंद्रित रहे हैं.

1,200 मील की रेंज और Shahed-136 का खौफ

तेहरान इन हमलों के लिए मुख्य रूप से Shahed-136 ड्रोन का इस्तेमाल कर रहा है. ये ‘सस्ते विस्फोटक ड्रोन’ बिना किसी पायलट के पहले से सेट किए गए कोऑर्डिनेट्स पर सटीक हमला करने में सक्षम हैं. इनकी रेंज लगभग 1,200 मील है और ये 110 पाउंड तक का वॉरहेड ले जा सकते हैं. एक्सपर्ट्स इसे ‘असिमेट्रिक वारफेयर’ यानी असममित युद्ध का सबसे बड़ा उदाहरण मान रहे हैं. ईरान की नौसेना के मुताबिक, उन्होंने अल-धफरा, शेख ईसा और अल-उदैद जैसे प्रमुख अमेरिकी बेस पर सफल स्ट्राइक की है.

रडार और एयरबेस पर घातक हमलों का दावा

IRGC नौसेना के कमांडर रियर एडमिरल अलीरेजा तंगसिरी ने X पर जानकारी दी कि हमलों में अमेरिकी पैट्रियट रडार, कंट्रोल टावर, हैंगर और फ्यूल डिपो को निशाना बनाया गया. IRGC के अनुसार, ‘ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4’ की 51वीं लहर में सऊदी अरब के अल-खरज एयर बेस पर मिसाइलें दागी गईं. दावा किया गया कि यह बेस ईरान के खिलाफ हमलों का केंद्र था, जहां से F-35 और F-16 विमान उड़ान भरते थे. इसके अलावा UAE, बहरीन, कुवैत और जॉर्डन के बेस भी इन हमलों की चपेट में आए हैं.

THAAD सिस्टम पर भी भारी असर

THAAD (टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस) अमेरिका का हाई-टेक एयर डिफेंस सिस्टम है, जो बैलिस्टिक मिसाइलों को उनके अंतिम चरण में रोकने के लिए जाना जाता है. इसकी एक बैटरी की कीमत करीब 1 बिलियन डॉलर (830 करोड़ रुपये से ज्यादा) होती है. जून 2025 के संघर्ष के दौरान, अमेरिका ने अपने ग्लोबल स्टॉक का 15-25% (करीब 60-150 मिसाइलें) इस्तेमाल किया, जिसका खर्च 810 मिलियन डॉलर से 1.2 बिलियन डॉलर के बीच रहा.

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जॉर्डन में 300 मिलियन डॉलर का रडार तबाह

3 से 7 मार्च 2026 के बीच हुए हमलों ने अमेरिका की बड़ी चिंता बढ़ा दी है. जॉर्डन के मुवाफ्फाक साल्टी एयर बेस पर मौजूद THAAD के ‘AN/TPY-2’ रडार को ईरान ने नष्ट कर दिया था. यह रडार सिस्टम का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसे ‘आंख’ माना जाता है. इसकी कीमत ही करीब 300 मिलियन डॉलर (250 करोड़ रुपये से ज्यादा) है. इस नुकसान के बाद अमेरिका अब दक्षिण कोरिया से THAAD के पुर्जे मध्य पूर्व में भेज रहा है ताकि मिसाइल हमलों का मुकाबला किया जा सके. जानकारों का मानना है कि इन महंगे डिफेंस सिस्टम के लगातार इस्तेमाल से अमेरिका का स्टॉक सीमित होता जा रहा है.

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By Govind jee

गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.
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