ईरान के विरोध प्रदर्शनों में मरने वालों की संख्या 500 के पार, तेहरान की अमेरिका-इजरायल को धमकी, क्या तैयारी कर रहे ट्रंप-नेतन्याहू?

Iran Protests Death Toll Crossed 500 Tehran warns US Israel: ईरान में 28 दिसंबर से शुरू हुए विरोध प्रदर्शन अब बेहद हिंसक हो चुके हैं और देश 2022 के बाद सबसे बड़े जनआंदोलन का सामना कर रहा है. मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक, सरकार की कार्रवाई में अब तक कम से कम 538 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 10,600 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है. मृतकों में बड़ी संख्या आम प्रदर्शनकारियों की बताई जा रही है.

Iran Protests Death Toll Crossed 500 Tehran Warns US Israel: ईरान में 28 दिसंबर से जारी विरोध प्रदर्शन अब और भी हिंसक होते जा रहे हैं. वहीं व्यापक विरोध प्रदर्शनों पर सरकार की सख्त कार्रवाई ने हालात को अंतरराष्ट्रीय टकराव की ओर धकेल दिया है. ईरान में देशव्यापी प्रदर्शनों के दौरान सरकार की कार्रवाई में अब तक कम से कम 538 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि आशंका जताई जा रही है कि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है. रविवार को मानवाधिकार संगठनों ने यह जानकारी साझा की. इसी बीच तेहरान ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि अगर अमेरिका प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा के नाम पर सैन्य हस्तक्षेप करता है, तो अमेरिकी बल और इजरायल उसके वैध निशाने पर होंगे.

अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज़ एजेंसी का कहना है कि बीते दो हफ्तों में चल रहे आंदोलनों के दौरान 10,600 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है. एजेंसी के मुताबिक मृतकों में 490 आम प्रदर्शनकारी और 48 सुरक्षाकर्मी शामिल हैं. ईरान फिलहाल 2022 के बाद की सबसे बड़ी जनआंदोलन की लहर का सामना कर रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि यदि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अत्यधिक बल प्रयोग हुआ, तो अमेरिका हस्तक्षेप कर सकता है. हालांकि, ईरानी सरकार ने अब तक मौतों का कोई आधिकारिक आंकड़ा सार्वजनिक नहीं किया है.

ट्रंप को दी जाएगी आगे की जानकारी

प्रदर्शन के मद्देनजर ईरान में इंटरनेट और फोन सेवाएं बंद कर दी गई हैं, जिससे प्रदर्शन का वास्तविक अनुमान लगाने में मुश्किल आ रही है. वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप को मंगलवार को ईरान को लेकर संभावित कदमों पर विस्तृत जानकारी दी जाएगी. इन विकल्पों में सैन्य कार्रवाई, गोपनीय साइबर ऑपरेशन, अतिरिक्त प्रतिबंध और सरकार-विरोधी समूहों को डिजिटल समर्थन जैसे उपाय शामिल हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही ईरानी प्रदर्शनकारियों के समर्थन में सामने आ चुके हैं और सोशल मीडिया पर लिख चुके हैं कि ईरान शायद पहले से कहीं ज्यादा आजादी के करीब है और अमेरिका मदद के लिए तैयार है.

ईरान ने अमेरिका-इजरायल की दी धमकी

सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में तेहरान की सड़कों पर प्रदर्शनकारियों को अलाव के चारों ओर नाचते और नारे लगाते देखा जा सकता है. ईरान बाहरी दुनिया से लगभग कटा हुआ है, ऐसे में देश के अंदर सरकारी दमन लगातार तेज होने की संभावना जताई जा रही है. इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकिर कालिबाफ ने अमेरिका को चेताया कि वह किसी भी तरह की “गलत गणना” न करे. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, उन्होंने साफ कहा कि यदि ईरान पर हमला हुआ, तो इजरायल के साथ-साथ दुनिया भर में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डे और जहाज़ ईरान के निशाने पर होंगे.

ईरान में अमेरिका और इजरायल के विरोध में प्रदर्शन का आह्वान

वहीं, राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के नेतृत्व वाली सरकार ने अमेरिका और इजरायल पर देश के भीतर अस्थिरता फैलाने का आरोप लगाया है. सरकारी मीडिया के मुताबिक, प्रशासन ने सोमवार को अमेरिका और इजरायल द्वारा कथित रूप से किए जा रहे “आतंकी कृत्यों” के खिलाफ देशभर में प्रदर्शन करने का आह्वान किया है.

नेतन्याहू ने प्रदर्शनकारियों की तारीफ की

इस बीच, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि ईरान में व्यापक प्रदर्शनों के नतीजों पर उनका देश “करीब से नजर रख रहा है.” नेतन्याहू ने साप्ताहिक कैबिनेट बैठक की शुरुआत में कहा, ‘‘इजरायल के लोग और पूरी दुनिया ईरान के नागरिकों के असाधारण शौर्य से अभिभूत हैं.’’ नेतन्याहू ने नागरिकों की हत्या की निंदा करते हुए उम्मीद जताई कि ईरान के “अत्याचार से मुक्त होने” के बाद इजरायल और ईरान के बीच संबंध फिर से मजबूत होंगे. इजरायल के एक अधिकारी ने बताया कि प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से ईरान सहित कई विषयों पर बातचीत की.

2022 के बाद इतने बड़े पैमाने पर प्रदर्शन

ये विरोध प्रदर्शन 28 दिसंबर को महंगाई और आर्थिक दबाव के खिलाफ शुरू हुए थे, लेकिन जल्द ही ये 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद से सत्ता में काबिज धार्मिक नेतृत्व के विरोध में बदल गए. ईरान में देशव्यापी प्रदर्शन रविवार को राजधानी तेहरान और देश के दूसरे बड़े शहरों में भी फैल गए. इतने बड़े पैमाने पर विरोध 2022 के बाद पहली बार देखे जा रहे हैं. महिलाएं सुप्रीम लीडर की फोटोज के साथ सिगरेट जला रही हैं, सरकारी भवनों में आग लगाई जा रही है, देश की मस्जिदों में भी आग लगाने की कई घटनाएं सामने आ रही हैं. इस विरोध प्रदर्शन को दबाने ईरान की शीर्ष सत्ता पूरा बल प्रयोग कर रही है. 

ये भी पढ़ें:-

अमेरिका में ट्रंप प्रशासन के खिलाफ भारी प्रदर्शन, हजारों लोग सड़कों पर उतरे, जानें पूरा मामला

‘अब न तेल मिलेगा, न पैसा!’ वेनेजुएला ऑपरेशन के बाद ट्रंप ने क्यूबा को दी खुली धमकी

ग्रीनलैंड में तैनात होंगे सैनिक, युद्धपोत और विमान; अमेरिका की धमकी के बाद यूरोप ने बढ़ाई तैयारियां

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Anant narayan shukla

अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. अनन्त राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर खबरें करते हैं. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यमात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं.

अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं.

इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं.

अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने झारखंड विधान सभा 2024, दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 चुनाव और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है.

अनन्त कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं.

उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं.

तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >