Success Story: नाश्ता दिन का सबसे जरूरी खाना माना जाता है. लेकिन सच्चाई यह है कि भारत में ज्यादातर लोग सुबह के समय सही पोषण नहीं ले पाते. किसी के पास समय नहीं होता, कोई जल्दी में होता है, तो कोई सिर्फ पेट भरने के लिए कुछ भी खा लेता है. ऐसे में सबसे ज्यादा जो चीज नजरअंदाज होती है, वह है प्रोटीन. यही बात 26 साल के यश कालरा को परेशान करने लगी. उन्हें महसूस हुआ कि अगर सुबह का खाना इतना जरूरी है, तो इसे आसान और सेहतमंद क्यों नहीं बनाया जा सकता?
एक आम समस्या से निकला आइडिया
यश की परवरिश भी एक आम भारतीय परिवार की तरह हुई, जहां पराठे और घी वाला नाश्ता रोज की बात थी. लेकिन जब वे मुंबई जैसे शहर में रहने लगे, तो उन्हें समझ आया कि हेल्दी खाना हर किसी के लिए आसान नहीं है. या तो वह महंगा होता है, या बनाने में समय लगता है, या स्वाद ऐसा होता है कि रोज खाने का मन नहीं करता. जब उन्होंने इस पर और ध्यान दिया तो पता चला कि देश में बड़ी आबादी प्रोटीन की कमी से जूझ रही है. और इसकी शुरुआत सुबह के नाश्ते से ही हो जाती है.
पहली कोशिश और असफलता
सिर्फ 21 साल की उम्र में यश ने इस समस्या का हल निकालने का फैसला किया. उन्होंने अंडे के सफेद हिस्से से बना प्रोटीन ड्रिंक लॉन्च किया. लेकिन यह आइडिया ज्यादा नहीं चला. बिक्री कम रही, पैसे खत्म होने लगे और आत्मविश्वास भी हिल गया. कुछ समय के लिए लगा कि शायद अब रुक जाना चाहिए. लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय फिर से कोशिश करने का फैसला किया. दूसरी बार यश ने कुछ नया बनाने के बजाय, एक जानी-पहचानी चीज को नया रूप दिया — ओट्स. उन्होंने सोचा कि अगर ओट्स में ज्यादा प्रोटीन हो, रिफाइंड शुगर न हो, भारतीय स्वाद के मुताबिक फ्लेवर हो और सिर्फ 30 सेकंड में तैयार हो जाए, तो यह सुबह के लिए सही विकल्प बन सकता है.
इसी सोच के साथ उन्होंने अपना ब्रांड शुरू किया
शुरुआत आसान नहीं थी. पहले साल में रोज सिर्फ 50 पैकेट बिकते थे. लेकिन यश ने मैदान में उतरने का फैसला किया. उन्होंने 100 से ज्यादा जगहों पर छोटे स्टॉल लगाए, लोकल ट्रेनों में जाकर खुद ओट्स बेचे, घर-घर सैंपल बांटे. सोशल मीडिया पर अपनी पूरी यात्रा ईमानदारी से साझा की, चाहे वह थकान हो, असफलता हो या छोटी-सी सफलता. उन्होंने 50 से ज्यादा रेसिपी खुद चखी और हजारों कटोरी ओट्स खाकर स्वाद तय किया. धीरे-धीरे लोगों का भरोसा बढ़ने लगा.
चार साल बाद मिली पहचान
कई साल की कोशिशों के बाद उन्हें ‘Shark Tank India’ में मौका मिला. वहां निवेशकों ने उनके आइडिया को समझा और साथ दिया. आज उनका ब्रांड रोज हजारों पैकेट बेच रहा है, हर महीने अच्छी कमाई कर रहा है और तेजी से आगे बढ़ रहा है. यश कालरा की कहानी सिर्फ एक स्टार्टअप की कहानी नहीं है. यह उस सोच की कहानी है जो रोज की समस्या को नजरअंदाज नहीं करती, बल्कि उसे हल करने का रास्ता खोजती है. कई बार बड़े बिजनेस किसी बड़े प्लान से नहीं, बल्कि एक छोटी सी परेशानी से शुरू होते हैं. फर्क सिर्फ इतना है कि कोई उसे शिकायत समझकर छोड़ देता है, और कोई उसे मौका बनाकर आगे बढ़ जाता है.
Also Read: कैसे बनें स्मार्ट इन्वेस्टर? अभिषेक बच्चन ने शेयर किए अपने निजी निवेश के खास टिप्स और राज
