15 दिन की डेडलाइन या महायुद्ध! ट्रंप की ईरान को परमाणु तबाही वाली चेतावनी

Iran Nuclear Deal Trump Ultimatum: ईरान-अमेरिका के बीच छिड़ने वाली है भीषण जंग? राष्ट्रपति ट्रंप ने 15 दिनों का अल्टीमेटम देकर तेहरान की धड़कनें बढ़ा दी हैं. खाड़ी में अमेरिका ने 2003 के बाद सबसे बड़ी सैन्य घेराबंदी की है. वहीं, एयर स्ट्राइक के डर से ईरान अपने परमाणु ठिकानों को जमीन के नीचे छिपा रहा है.

Iran Nuclear Deal Trump Ultimatum: अमेरिका और ईरान के बीच माहौल एक बार फिर ‘रेड अलर्ट’ पर है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सीधी चेतावनी देते हुए कहा है कि उनके पास परमाणु डील के लिए सिर्फ 10 से 15 दिन का वक्त है. ट्रंप ने सा कर दिया है कि अगर इस डेडलाइन के अंदर बात नहीं बनी, तो ईरान के लिए हालात ‘unfortunate’ (दुर्भाग्यपूर्ण) हो सकते हैं.

ट्रंप की दो-टूक: ‘डील करो वरना बुरा होगा’

गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत और ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की मीटिंग में ट्रंप काफी आक्रामक नजर आए. उन्होंने कहा कि या तो हमारे बीच डील होगी, या फिर उनके साथ कुछ बहुत बुरा होने वाला है… 10-15 दिन का समय उनके लिए काफी है. ट्रंप ने आगे कहा कि ईरान पूरे क्षेत्र की शांति को खतरे में डाल रहा है और उसे हर हाल में झुकना होगा. उन्होंने संकेत दिया कि अगर बातचीत फेल हुई, तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई जैसा बड़ा कदम भी उठा सकता है.

खाड़ी में 2003 के बाद सबसे बड़ी सैन्य तैनाती

न्यू एजेंसी सीएनएन और न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ने पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में वैसी ही भारी फौज और हथियार तैनात कर दिए हैं, जैसे 2003 में इराक हमले के वक्त किए थे.

  • समंदर में महाशक्ति: USS जेराल्ड आर. फोर्ड और USS अब्राहम लिंकन जैसे दो विशाल एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप इलाके में पहुँच चुके हैं.
  • आसमान में पहरा: 50 से ज्यादा एक्स्ट्रा फाइटर जेट्स और रिफ्यूलिंग टैंकर्स तैनात हैं.
  • मिसाइल कवच: ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही ढेर करने के लिए ‘पैट्रियट’ और ‘थाड’ (THAAD) जैसे एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम लगाए गए हैं.

सूत्रों का कहना है कि अमेरिकी सेना इस वीकेंड तक ही स्ट्राइक के लिए तैयार हो सकती है, बस ट्रंप के फाइनल ‘GO’ का इंतजार है.

ईरान ने भी कसी कमर, बना रहा है जमींदोज ‘बंकर’

वाशिंगटन के ‘इंस्टीट्यूट फॉर साइंस एंड इंटरनेशनल सिक्योरिटी’ (ISIS) ने सैटेलाइट तस्वीरों के हवाले से बड़ा खुलासा किया है. रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप के डर से ईरान अपने परमाणु ठिकानों को जमीन के अंदर छिपाने और उन्हें कंक्रीट से ढंकने में जुटा है.

परचिन कॉम्प्लेक्स: यहां ‘तालेघन-2’ नाम की बिल्डिंग को कंक्रीट के एक बड़े खोल (सार्कोफैगस) से ढंक दिया गया है और ऊपर से मिट्टी डाल दी गई है ताकि यह किसी साधारण पहाड़ी जैसा दिखे और हवाई हमले से बचा रहे.

नतांज और इस्फहान: यहां भी सुरंगों के दरवाजों को मिट्टी और कंक्रीट से ब्लॉक किया जा रहा है ताकि अमेरिकी बम इन्हें भेद न सकें.

पिछले साल की 12 दिनों की जंग का साया

पिछले साल जून (2025) में भी दोनों देशों के बीच 12 दिनों तक भीषण जंग चली थी. उस दौरान अमेरिका और इजरायल ने ईरान के कई परमाणु और सैन्य ठिकानों पर बमबारी की थी. ईरान ने भी पलटवार किया था, लेकिन अब ट्रंप चाहते हैं कि ईरान पूरी तरह से यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) बंद कर दे.

  • ईरान का दावा: ईरान का कहना है कि वह बम नहीं बना रहा, बस बिजली और शांतिपूर्ण कामों के लिए परमाणु ऊर्जा चाहता है.
  • अमेरिकी मांग: ट्रंप चाहते हैं कि ईरान अपना पूरा परमाणु प्रोग्राम और मिसाइल प्रोग्राम खत्म कर दे.
  • क्या होगा आगे? अगले 10 से 15 दिनों में यह साफ हो जाएगा कि दुनिया एक और महायुद्ध की तरफ बढ़ रही है या कोई बीच का रास्ता निकलेगा.

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लेखक के बारे में

By Govind Jee

गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.

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