इंडोनेशिया में 7.7 तीव्रता के भूकंप के बाद अब तक कम से कम 995 आफ्टरशॉक आ चुके हैं. जिनमें से 46 झटके लोगों ने महसूस किए.
14 दिनों के लिए आपातकाल की घोषणा
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसी के मुताबिक, भूकंप से पूर्वी नुसा तेंगारा में 1,300 से अधिक मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं. इनमें अकेले फ्लोरेस द्वीप पर करीब 250 मकान पूरी तरह तबाह हो गए. करीब 5,000 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर बनाए गए अस्थायी शिविरों में शरण लेनी पड़ी है. हालात को देखते हुए प्रांत के गवर्नर ने रविवार को 14 दिनों के लिए आपातकाल घोषित कर दिया.
तंबुओं में रात गुजारने को मजबूर लोग
फ्लोरेस में हजारों लोगों ने क्षतिग्रस्त मकानों के बाहर तिरपाल से बनाए गए अस्थायी तंबुओं में रात बिताई. भूकंप के कारण कई इलाकों में सड़कें पेड़ों के गिरने से बंद हो गईं, जबकि भूस्खलन के चलते पहाड़ों से बड़े-बड़े पत्थर नीचे आ गए. कई मकान पूरी तरह ढह गए और मलबे में दबकर आसपास खड़ी कारें भी क्षतिग्रस्त हो गईं. मंगराई रीजेंसी के सबसे ज्यादा प्रभावित रियो गांव के कपड़ा कारोबारी रशीद जफर ने अपनी स्थिति बताते हुए कहा कि उनका घर अब पूरी तरह मलबे में बदल चुका है. उन्होंने तत्काल भोजन, दवाओं और साफ पानी की जरूरत बताई.
3500 से ज्यादा सुरक्षाकर्मी तैनात
आपदा प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान तेज करने के लिए 3500 से अधिक सैन्य और पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है. अधिकारियों के मुताबिक, 275 टन राहत सामग्री प्रभावित क्षेत्रों में भेजी जा चुकी है. हालांकि, खराब सड़कें, भूस्खलन और अन्य चुनौतियों के कारण सबसे ज्यादा प्रभावित कुछ समुदायों तक राहत पहुंचाने में देरी हो रही है.
1992 की त्रासदी की यादें हुईं ताजा
इस भूकंप ने फ्लोरेस के लोगों को वर्ष 1992 की उस विनाशकारी प्राकृतिक आपदा की याद दिला दी, जब शक्तिशाली भूकंप और उसके बाद आई सुनामी में करीब 2,500 लोगों की मौत हुई थी. इससे पहले वर्ष 2018 में सुलावेसी द्वीप पर 7.5 तीव्रता के भूकंप के बाद आई सुनामी में 4,400 से अधिक लोगों की मौत हुई थी. वहीं, वर्ष 2004 में सुमात्रा के तट के पास 9.1 तीव्रता के भूकंप से उठी सुनामी ने हिंद महासागर के आसपास के 12 देशों में भारी तबाही मचाई थी. इस आपदा में करीब 2.30 लाख लोगों की मौत हुई थी, जिनमें अकेले इंडोनेशिया के आचे प्रांत में करीब 1.70 लाख लोग मारे गए थे.
इंडोनेशिया में भूकंप और ज्वालामुखी विस्फोट की घटनाएं होती रहती हैं, जानें क्यों?
इंडोनेशिया प्रशांत महासागर के ‘रिंग ऑफ फायर’ क्षेत्र में स्थित है. 17,000 से अधिक द्वीपों वाले इस देश में कई सक्रिय भूकंपीय भ्रंश और ज्वालामुखी मौजूद हैं, जिसके कारण यहां भूकंप और ज्वालामुखी विस्फोट की घटनाएं अक्सर होती रहती हैं.
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