दक्षिणी अफ्रीकी देशों में बारिश-बाढ़ से भारी तबाही, 100 से ज्यादा लोगों की मौत, हजारों घर हुए तबाह

दक्षिण अफ्रीका, मोजाम्बिक और जिम्बाब्वे में बारिश की वजह ला नीना मौसम प्रणाली है. यह दक्षिण-पूर्वी अफ्रीका के कुछ हिस्सों में भारी बारिश लाती है. इसकी वजह एक हफ्ते से भी कम समय में लगभग 400 मिमी (15 इंच से अधिक) बारिश हुई है. इस आपदा में हजारों घर टूटकर बह गए और 100 से अधिक लोग अपनी जान गंवा बैठे हैं.

दक्षिणी अफ्रीका के देशों दक्षिण अफ्रीका, मोजाम्बिक और जिम्बाब्वे में मूसलाधार बारिश और उससे आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है. इसमें अब तक 100 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है. अधिकारियों ने शुक्रवार को चेतावनी दी कि क्षेत्र के कई देशों में मौसम की स्थिति और बिगड़ सकती है. दक्षिण अफ्रीका में तेज बारिश के चलते आई बाढ़ से उत्तरी प्रांतों में कम से कम 19 लोगों की मौत होने की पुष्टि हुई है. वहीं, पड़ोसी देश मोजाम्बिक में आपदा प्रबंधन एजेंसी के अनुसार अब तक 103 लोगों की मौत बारिश से जुड़ी घटनाओं में हो चुकी है. इन मौतों के पीछे बिजली गिरना, बाढ़ में बह जाना, कमजोर बुनियादी ढांचे का ढहना और हैजा जैसी बीमारियां शामिल हैं.

विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) ने बताया कि मोजाम्बिक के मध्य और दक्षिणी हिस्से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं. यहां दो लाख से अधिक लोग बाढ़ की चपेट में आए हैं और हजारों घरों को नुकसान पहुंचा है. इस गरीब देश के पास सीमित संसाधन हैं. यह पिछले कुछ वर्षों में कई विनाशकारी चक्रवातों का सामना कर चुका है. इसी तरह जिम्बाब्वे की आपदा प्रबंधन एजेंसी ने जानकारी दी है कि वर्ष की शुरुआत से जारी भारी बारिश के कारण 70 लोगों की जान गई है, जबकि 1,000 से ज्यादा घर क्षतिग्रस्त हो चुके हैं. दक्षिण अफ्रीका, मोजाम्बिक और ज़िम्बाब्वे के मौसम विभागों ने चेतावनी दी है कि आगे भी बारिश होने की संभावना है, जिससे और अधिक विनाशकारी बाढ़ आ सकती है.

सेना को बचाव के लिए उतरना पड़ा

दक्षिण अफ्रीकी सेना उत्तरी लिम्पोपो प्रांत में हेलीकॉप्टरों के जरिए लोगों को सुरक्षित निकाल रही है, जहां लोग बाढ़ से बचने के लिए छतों या पेड़ों पर शरण लेने को मजबूर हो गए थे. साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिणी अफ्रीका के तीन देशों में फंसे हुए लोगों को बचाने के लिए सेना के हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल किया गया. छतों पर फंसे लोगों को निकाला गया. बाढ़ का असर मेडागास्कर, मलावी और जाम्बिया में भी देखा गया है. सेना को दक्षिण अफ्रीका-जिम्बाब्वे सीमा पर एक चेकपोस्ट से पुलिस और सीमा सुरक्षा अधिकारियों को भी बचाना पड़ा.

राष्ट्रपति रामाफोसा ने किया इलाके का दौरा

एससीएमपी की रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने गुरुवार को लिम्पोपो के बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया. उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में एक हफ्ते से भी कम समय में लगभग 400 मिमी (15 इंच से अधिक) बारिश हुई है. उन्होंने कहा कि जिस जिले का उन्होंने दौरा किया, वहां “36 घर ऐसे हैं जो धरती के चेहरे से पूरी तरह मिट गए हैं.” लिम्पोपो की प्रीमियर फोफी रामाथुबा ने बताया कि पूरे प्रांत में 1,000 से अधिक घर क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिनमें से कई पूरी तरह बह गए हैं. वहीं एम्पुमालांगा प्रांत में भी भारी नुकसान हुआ है, जहां सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त या पूरी तरह नष्ट हो गए हैं.

नेशनल पार्क में भी बढ़ा बाढ़ का खतरा

दुनिया के सबसे बड़े वन्यजीव अभयारण्यों में से एक, दक्षिण अफ्रीका का क्रूगर पार्क से सैकड़ों पर्यटकों और कर्मचारियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया. क्रूगर नेशनल पार्क लिम्पोपो और एम्पुमालांगा प्रांतों में लगभग 22,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है. यह भी गंभीर बाढ़ से प्रभावित हुआ है. पार्क के प्रवक्ता रेनॉल्ड थाखुली ने बताया कि पार्क के शिविरों से करीब 600 पर्यटकों और कर्मचारियों को ऊंचाई वाले सुरक्षित इलाकों में पहुंचाया गया है. कई नदियों के उफान पर आने से शिविरों, रेस्तरां और अन्य क्षेत्रों में पानी भर गया है, जिसके बाद पार्क को नए आगंतुकों के लिए बंद कर दिया गया है. नेशनल पार्क एजेंसी ने कहा कि एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं. क्रूगर में अब तक किसी की मौत या चोट की सूचना नहीं है, हालांकि पार्क के कुछ हिस्से बाढ़ के कारण पूरी तरह कट गए हैं.

चावल और मक्के की फसल हुई बर्बाद

हाल के वर्षों में दक्षिणी अफ्रीका ने लगातार चरम मौसमी घटनाओं का सामना किया है. इनमें विनाशकारी चक्रवात शामिल हैं, जिनसे कई देशों में हजारों लोगों की मौत हुई. इसके साथ ही भीषण सूखे ने खाद्य संकट को और गहरा किया है. खासतौर पर ऐसे क्षेत्र में जहां पहले से ही खाद्य असुरक्षा आम समस्या रही है. विश्व खाद्य कार्यक्रम ने कहा कि मौजूदा बाढ़ के कारण मोजाम्बिक में 70,000 हेक्टेयर से अधिक फसलें पानी में डूब गई हैं. इनमें चावल और मक्का जैसी प्रमुख फसलें शामिल हैं. इससे उन हजारों छोटे किसानों के लिए खाद्य असुरक्षा और बढ़ गई है, जो अपने भोजन के लिए पूरी तरह फसल पर निर्भर हैं.

क्यों हुई ऐसी बाढ़ लाने वाली बारिश

अमेरिका की फेमिन अर्ली वॉर्निंग सिस्टम ने कहा कि दक्षिणी अफ्रीका के कम से कम सात देशों में बाढ़ की खबरें हैं या इसकी आशंका जताई गई है. इसके पीछे ला नीना मौसम प्रणाली की मौजूदगी बताई जा रही है. यह दक्षिण-पूर्वी अफ्रीका के कुछ हिस्सों में भारी बारिश लाती है. दक्षिण अफ्रीकी मौसम सेवा ने इस क्षेत्र के लिए रेड-लेवल 10 अलर्ट जारी किया है, जो चेतावनी का सबसे ऊंचा स्तर है. इन देशों में अब भी डर का माहौल है, लोगों के बीच चिंता है कि बारिश फिर से आ सकती है. 

पीटीआई-भाषा के इनपुट के साथ.

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अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने झारखंड विधान सभा 2024, दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 चुनाव और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है.

अनन्त कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं.

उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं.

तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.

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