इजरायल ने सालों तक हैक किए ईरान के ट्रैफिक कैमरे, खामेनेई को ऐसे बनाया निशाना

Israel Hacked Iran’s Traffic Cameras: ईरान के ऊपर इजरायल ने इतना सटीक हमला किया कि उसका लगभग सारा शीर्ष नेतृत्व एक बार में खत्म हो गया. इजरायल ने आखिर ये किया कैसे? इस पर कई दावे किए जा रहे हैं. ब्रिटेन के फाइनेंशियल टाइम्स ने खुफिया सूत्रों के हवाले से यह दावा किया है कि इजरायल ने सालों तक ईरान के ट्रैफिक सिस्टम को हैक कर रखा था, जिसकी वजह से वह पिनपॉइंट हमला कर सका.

Israel Hacked Iran’s Traffic Cameras: इजरायल ईरान युद्ध में शिया मुल्क को काफी नुकसान झेलना पड़ रहा है. हालांकि, अब तक जितनी बार दोनों दोनों देशों के बीच झड़प हुई है, हर बार सबसे ज्यादा नुकसान ईरान का ही होता है.  इस बार तो इजरायल ने ईरान पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई और ईरानी सेना के शीर्ष अधिकारियों की लक्षित हत्या को अंजाम दिया. तो आखिर इजरायल ऐसा कैसे कर लेता है? एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि इजरायल ने वर्षों तक तेहरान के ट्रैफिक कैमरों को हैक किया और मोबाइल फोन नेटवर्क तक पहुंच बनाई, ताकि खामेनेई और उनकी सुरक्षा टीम की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके.

लंदन के अखबार Financial Times की एक रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि इजरायल की खुफिया एजेंसियों ने एक दीर्घकालिक योजना के तहत इस पर काम किया.  रिपोर्ट में कई सूत्रों के हवाले से  दावा किया गया है कि तेहरान के लगभग सभी ट्रैफिक कैमरे लंबे समय से हैक थे और उनकी फुटेज एन्क्रिप्ट कर सर्वरों तक भेजी जाती थी. इसी हैकिंग के जरिए इजरायली और अमेरिकी बलों को खामेनेई की लोकेशन का सटीक पता चला, जिसके बाद टारगेटेड हमले में उन्हें मार गिराया गया.

इजरायल ने सूक्ष्मतम जानकारी इकट्ठा की

रिपोर्ट में कहा गया है कि एक खास कैमरा एंगल बेहद अहम साबित हुआ, जिससे यह पता लगाने में मदद मिली कि बॉडीगार्ड अपनी निजी गाड़ियां कहां पार्क करते थे और पाश्चर स्ट्रीट के पास स्थित परिसर के भीतर की दैनिक गतिविधियों की जानकारी मिलती थी. वहीं सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी और इजरायली खुफिया अधिकारियों ने खामेनेई की दिनचर्या का गहराई से अध्ययन किया था कि वे कहां रहते थे, किन लोगों से मिलते थे, कैसे बात करते थे और हमले की स्थिति में कहां शरण ले सकते थे. रिपोर्ट के मुताबिक, वे अन्य वरिष्ठ राजनीतिक और सैन्य नेताओं की गतिविधियों पर भी नजर रख रहे थे, जो 86 वर्षीय धर्मगुरु के साथ कम ही एक जगह इकट्ठा होते थे.

जैसे ही ईरान को मिली सूचना 1 मिनट में किया काम

सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, खामेनेई समेत ईरान के शीर्ष अधिकारी शनिवार सुबह तेहरान के एक परिसर में अलग-अलग स्थानों पर बैठक करने वाले थे. इस परिसर में सुप्रीम लीडर का कार्यालय, राष्ट्रपति भवन और राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र के दफ्तर स्थित हैं. सूत्रों ने बताया कि पहले रात में हमले की योजना थी, लेकिन इसे बदलकर दिन में हमला करने का फैसला किया गया. इजरायल के स्थानीय समयानुसार सुबह करीब 6 बजे लड़ाकू विमानों ने उस परिसर पर सटीक-निर्देशित हथियार दागे, जिसे अमेरिका-इजरायल के समन्वित अभियान का शुरुआती चरण बताया गया है.

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वहीं, एपी की रिपोर्ट के अनुसार, एक अज्ञात इजरायली सैन्य अधिकारी ने बताया कि हवाई हमलों में 60 सेकंड के भीतर तीन ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिसमें ईरान के सुप्रीम लीडर, रिवोल्यूशनरी गार्ड के प्रमुख और करीब 40 वरिष्ठ अधिकारियों की मौत हो गई. अधिकारी के अनुसार, दिनदहाड़े हमला करने से अचानकपन (सरप्राइज) का तत्व मिला.

ईरान लगा रहा था अमेरिका और इजरायल की डेथ के नारे- नेतन्याहू

इस बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान पर हमलों को सही ठहराया. फॉक्स को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि ईरान का इस्लामी शासन अमेरिका को नष्ट करने के लिए कमिटेड है. उन्होंने कहा कि ईरान 47 वर्षों से ‘डेथ टू अमेरिका’ के नारे लगा रहा है. उन्होंने आपके दूतावासों पर बमबारी की. उन्होंने संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की दो बार हत्या की कोशिश की. उन्होंने अपने ही लोगों की हत्या की, नरसंहार किया और दुनिया भर में आतंक का जाल फैलाया. 

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पश्चिम एशिया में संघर्ष लगातार जारी है. ईरानी नेतृत्व खाड़ी देशों और क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बना रहा है, जबकि अमेरिका का कहना है कि उसकी सशस्त्र सेनाओं की ओर से सबसे कड़े हमले अभी बाकी हैं. वहीं, ईरान अमेरिकी सैन्य ठिकानों और मिडिल ईस्ट में उसके दूतावासो को निशाना बना रहा है. 

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