Iran attack in Middle East: चूहे को एक बंद कमरे में दौड़ाया जाए, तो डर के मारे एक कोना पकड़ लेता है. लेकिन फिर भी डराने वाला न माने तो वह आक्रमण करता है. ईरान कुछ ऐसी ही हालत में है. अमेरिका की मिलिट्री माइट के आगे ‘शायद वह न टिके’, लेकिन उसे इतना ज्यादा डराया और फिर मारा गया कि अब वह पूरी तरह अटैकिंग मोड में आ गया है. मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में उसने अमेरिकी सैन्य अड्डे, दूतावास और उसके सहयोगी देशों पर ताबड़तोड़ मिसाइलें बरसाईं. इस डर की वजह से अब इन देशों के अमीर अपना सबकुछ छोड़कर सुरक्षित जगह भाग रहे हैं, जिसके लिए वे करोड़ों में किराया दे रहे हैं.
डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक, रियाद पश्चिम एशिया से पलायन कर रहे लोगों के लिए अहम एक्जिट पॉइंट बन गया है. क्षेत्र के सीमित रूप से संचालित हवाई अड्डों में से एक, किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, अभी भी पूरी तरह काम कर रहा है. सऊदी अरब ने वीजा प्रक्रिया को आसान बना दिया है, जिसके तहत अब कई देशों के नागरिकों को पहले से वीजा लेने की जरूरत नहीं है और उन्हें आगमन पर ही वीजा मिल जाता है. इस सुविधा के कारण आपात परिस्थितियों में सऊदी अरब एक भरोसेमंद और सुविधाजनक निकास मार्ग के रूप में उभरा है.
3.2 करोड़ रुपये तक दे रहे किराया
क्षेत्र के कई एयरपोर्ट हमले के कारण बंद कर दिए गए थे. इनमें दुबई और ओमान भी शामिल हैं. ऐसे में निजी सुरक्षा कंपनियां कथित तौर पर दुबई से रियाद तक करीब 10 घंटे की सड़क यात्रा के लिए एसयूवी वाहनों का काफिला उपलब्ध करा रही हैं. इसके बाद चार्टर्ड प्राइवेट जेट यात्रियों को यूरोप और अन्य स्थानों तक ले जा रहे हैं.
रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी मिसाइलों और ड्रोन हमलों के बाद खाड़ी क्षेत्र छोड़ने के लिए अमीर लोग 2.6 लाख पाउंड (लगभग 3.5 लाख डॉलर यानी लगभग 3.2 करोड़ रुपये) तक खर्च कर रहे हैं. अमेरिकी समाचार वेबसाइट सेमाफोर के अनुसार, क्षेत्र छोड़ने वालों में वैश्विक वित्तीय कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी और कारोबारी या छुट्टियों के सिलसिले में आए ‘काफी अमीर’ लोग शामिल हैं.
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रियाद से ही क्यों भाग रहे लोग?
सऊदी अरब ट्रांजिट हब के रूप में इसलिए भी लोगों को आकर्षित कर रहा है, क्योंकि यहां वीजा नियम अपेक्षाकृत आसान हैं. कई देशों के नागरिकों को पहले से वीजा लेने के बजाय आगमन पर वीजा मिल जाता है, जो आपातकालीन स्थिति में निकलने वालों के लिए सुविधाजनक है. साथ ही, सऊदी रक्षा मंत्रालय ने जानकारी दी है कि हाल ही में उसकी सीमा की ओर बढ़ रहे दो ड्रोन को सफलतापूर्वक मार गिराया गया. इस कार्रवाई के बाद वहां की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत माना गया और अन्य प्रभावित देशों की तुलना में सऊदी अरब से उड़ान भरना अपेक्षाकृत सुरक्षित समझा गया.
सोमवार को सऊदी पर भी हुआ हमला
हालांकि सऊदी अरब इस जंग के शुरुआती हमलों से काफी हद तक बचा रहा, लेकिन सोमवार सुबह ईरानी ड्रोन ने रास तनुरा स्थित सऊदी अरामको की तेल रिफाइनरी को निशाना बनाया. यह सऊदी अरब के प्रमुख ऊर्जा केंद्रों में से एक है. इसके अलावा ईरान ने मंगलवार को रियाद में स्थित अमेरिकी दूतावास को भी निशाना बनाया, इससे पहले उसने कुवैत की यूएस एंबेसी पर हमला किया था. इस जंग से पहले अबू धाबी, दुबई, कतर और बहरीन अब तक निवासियों और पर्यटकों के लिए सुरक्षित माने जाते थे. लेकिन ईरान ने खुद पर हुए हमले के बाद इन देशों पर मिसाइल और ड्रोन हमले करके इनके एयरपोर्ट और अन्य ठिकानों को निशाना बनाया.
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अमीर निवासियों और टूरिस्ट का तेजी से बाहर निकलना इस बात का संकेत दे रहा है कि क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं. खाड़ी क्षेत्र के यात्रा तथा व्यापारिक केंद्रों पर बढ़ते तनाव का असर साफ दिखाई दे रहा है और आने वाले समय में हालात और खराब हो सकते हैं.
