Cheers! ब्रह्मांड का हसीन मयखाना, ओपन बार में है इतना अल्कोहल कि 21 लाख साल तक पिएंगे दुनिया वाले

Galaxy’s Open Bar Sagittarius B2: 400 ट्रिलियन बीयर, इतनी जो पूरी दुनिया 21 लाख साल भी पिए तो भी खत्म न हो. जी हां ब्रह्माण्ड का ओपन बार भी है, जो हमारी ही मिल्की वे में मौजूद है. सैजिटेरियस B2 में कई तरह के अल्कोहल खोजे गए हैं. आइये इसकी पूरी कहानी जानते हैं.

Galaxy’s Open Bar Sagittarius B2: अगर आपको लगता है कि शराब सिर्फ धरती पर बनने वाली चीज है, तो तैयार हो जाइए, क्योंकि ब्रह्मांड आपकी इस धारणा को हल्का-सा नशा दिलाने वाला है. जी हाँ! हमारी आकाशगंगा के दिल में एक ऐसा बादल मौजूद है जो न सिर्फ सितारे पैदा करता है, बल्कि चुपके-चुपके शराब भी बनाता है. इसे आप चाहें तो ब्रह्मांड का सबसे बड़ा “बिना-लाइसेंस वाला बार” कह सकते हैं! वैसे अंतरिक्ष विज्ञान और बीयर के प्रेमी इसे ब्रह्माण्ड का ओपन बार भी कहते हैं. यह बार है सैजिटेरियस B2 (Sgr B2) में, जो गैस और धूल का एक विशाल आणविक बादल है. यह 150 प्रकाश-वर्ष तक फैला हुआ है. यह न सिर्फ आकाशगंगा की प्रमुख तारा निर्माण फैक्ट्रियों में से एक माना जाता है, बल्कि ऐसा प्रतीत होता है कि यह चुपचाप अंतरिक्ष में शराब भी तैयार कर रहा है.

खगोलविदों ने Sgr B2 में कई तरह के अल्कोहल खोजे हैं. इनमें एथेनॉल (C₂H₅OH) भी अंतरिक्ष की बर्फीली शून्यता में तैरता हुआ पाया गया है, यह वही अणु जो वाइन और व्हिस्की में मिलता है. इसके अलावा मेथेनॉल (CH₃OH) भी यहां बड़ी मात्रा में मौजूद है. जिसका उपयोग आम तौर पर विंडशील्ड वॉशर फ्लुइड जैसी चीज़ों में किया जाता है. मेथेनॉल जटिल कार्बनिक अणुओं के निर्माण की नींव का काम करता है. इतना ही नहीं यहां पर विनाइल अल्कोहल (C₂H₃OH) भी इस गैस के बादल में तैरता मिलता है. हालांकि यह यहां पर कम है, लेकिन कम नशेदार आइसोमर भी यहां मौजूद है. 

कैसे बनता है अल्कोहोल

बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक 1970 से ही वैज्ञानिक इस बात का आंकलन कर रहे थे कि अंतरतारकीय (इंटरस्टेलर) बादलों में सूक्ष्म धूल कणों पर अणु बन सकते हैं. ये सभी अणु धूल के महीन कणों की ठंडी सतहों पर बनते हैं, फिर जहां परमाणु चिपकते हैं, ये इधर-उधर होते हैं और प्रतिक्रिया करके एक-दूसरे से जुड़ते हैं. बाद में कॉस्मिक गर्मी इन्हें गैस में वापस उछाल देती है. इसे आप अंतरिक्ष की “फर्मेंटेशन” प्रक्रिया कह सकते हैं. इन धूल कणों की सतह उत्प्रेरक (कैटेलिस्ट) की तरह काम करती है, जिसकी वजह से विनाइल अल्कोहल और अन्य जटिल अणु बनाने वाली रासायनिक अभिक्रियाएं संभव हो पाती हैं. 

प्रोपेनॉल की खोज

2022 में ALMA (Atacama Large Millimeter/Submillimeter Array) का उपयोग कर रहे खगोलविदों ने पहली बार अंतरिक्ष में प्रोपेनॉल के दोनों आइसोमर खोजे. यह ऐसा था जैसे किसी विशाल ब्रह्मांडीय वायरटैपिंग मशीन ने शराब की कोई गुप्त रेसिपी सुन ली हो. अनुभवहीन लोगों को ये बातें चाहे रसायन विज्ञान की उबाऊ थ्योरी की तरह लगें, लेकिन एस्ट्रोकेमिस्ट्री पसंद करने वालों के लिए यह बेहद उत्साहजनक खोज है. इससे पता चलता है कि अंतरिक्ष सिर्फ कार्बनिक रूप से समृद्ध ही नहीं, बल्कि आश्चर्यजनक रूप से रासायनिक रूप से जटिल भी है.

गैलेक्टिक गैस्ट्रोनॉमी: ब्रह्मांडीय रसोईघर

शराबों के अलावा Sgr B2 में और भी कई खाद्य-संबंधी कार्बनिक यौगिक पाए गए हैं. उनमें से एक है ग्लाइकोलएल्डिहाइड (CH₂OHCHO), जो चीनी से संबंधित एक अणु है और जिसे शायद पृथ्वी की प्रारंभिक रासायनिक रसोई में भी अहम भूमिका निभानी पड़ी हो. यह राइबोज का अग्रदूत है, जो RNA बनाने के लिए ज़रूरी है, यानी जीवन के शुरुआती ब्लूप्रिंट की एक मुख्य ईंट.

इसके साथ एथिलीन ग्लाइकॉल भी पाया गया है, जो एंटी-फ्रीज़ में उपयोग होता है, लेकिन एस्ट्रोबायोलॉजी में इसकी मौजूदगी को जीवन की संभावनाओं से जोड़ा जाता है. यहां एथिल फॉर्मेट (C₂H₅OCHO) भी है, जो रम की खुशबू और रसभरी के स्वाद के लिए जिम्मेदार अणु है. दिलचस्प बात यह है कि यहां एमिनोएसिटोनाइट्राइल पाया गया है, जो ग्लाइसिन (सबसे सरल अमीनो अम्ल) का अग्रदूत है. अगर इसे रसोई की भाषा में समझें, तो यह वैसा है जैसे आपको किसी रसोई में आटा, चीनी और अंडे बिखरे हुए मिलें, यानी कोई तो कुछ बनाने की तैयारी कर रहा है.

सैजिटेरियस B2 एक ब्रह्मांडीय डिस्टिलरी, एक गैलेक्टिक वाइनरी और एक आणविक मिक्सोलॉजी लैब की तरह काम करता है. यह मानवता की दो गहरी जिज्ञासाओं को जोड़ता है, अल्कोहल की केमेस्ट्री और जीवन की उत्पत्ति की मिस्ट्री. इसलिए, अगली बार जब आप वाइन का गिलास उठाएं या रम की खुशबू लें, तो एक जाम सैजिटेरियस B2 की तरफ भी उठाएं. कौन जाने, सितारे आपकी सोच से ज्यादा करीब हों.

कहां है सैजिटेरियस B2

अब इतना कुछ जान गए, तो आपका अधिकार यह जानने का है कि यह है कहां. हम अपनी धरती से इसकी ओर चलते हैं, ताकि आपके लिए समझना आसान हो जाए. आप धरती पर हैं. धरती सूर्य के चारों ओर घूमती है. हमारा सौर मंडल मिल्कीवे नामक आकाशगंगा का हिस्सा है, जिसके अंदर अरबों सौर मंडल हैं. इस आकाश गंगा के बीचों-बीच एक विशालकाय ब्लैक होल है, जिसे सैजिटेरियस A कहा जाता है. यह सूर्य के द्रव्यमान से 40 लाख गुना अधिक द्रव्यमान वाला है. इसी सैजिटेरियस A से यह कुछ सौ प्रकाश वर्ष (लाइट इयर) की दूरी पर है. हमारी मिल्की वे से यह 390 लाइट इयर दूर है. 

21 लाख साल तक बन सकती है बीयर

किरिन होल्डिंग्स की रिपोर्ट (Kirin Holding’s Report) के अनुसार, दुनियाभर में एक साल में कुल 187.9 मिलियन लीटर बीयर (18,79,00,000L/Y) पी जाती है. ऐसे में अगर ब्रह्मांड के ओपन बार की बात की जाए तो वहां पर कुल 400 ट्रिलियन लीटर बीयर (400,000,000,000,000) बनाने लायक अल्कोहल है. इस हिसाब से आने वाले 21,28,792 साल तक बीयर बनाई जा सकती है.

अब दूरी समझिए

हमारा सौरमंडल मिल्की वे के केंद्र से लगभग 26,000 से 30,000 प्रकाश-वर्ष दूर है. वहीं पृथ्वी से सैजिटेरियस B2 की दूरी लगभग 27,000 प्रकाश वर्ष की दूरी पर है. अब एक लाइट इयर में कितने किलोमीटर होते हैं, यह तो आप जानते ही होंगे. नहीं जानते, तो हम वह भी आपको बताए देते हैं. देखिए सूरज की रोशनी धरती तक पहुंचने में 8 मिनट 20 सेकेंड लगते हैं. अब प्रकाश की गति लगभग 1,86,000 मील प्रति सेकेंड या करीब 3,00,000 किलोमीटर प्रति सेकेंड होती है. यानी लाइट मात्र एक सेकेंड में इतनी लंबी दूरी तय कर लेती है. अब अगर एक दिन को पूरे 24 घंटे माना जाए, तो उसमें कुल 86,400 सेकेंड होते हैं. इस आधार पर प्रकाश एक दिन में लगभग 25,92,00,00,000 किलोमीटर की दूरी तय करता है.

अब बात आती है कि प्रकाश एक साल में कितनी दूरी तय करेगा. एक वर्ष में सेकेंड गिनना थोड़ा पेचीदा काम है, क्योंकि सिर्फ एक सेकेंड का अंतर भी 3,00,000 किलोमीटर की दूरी के बराबर होता है. लेकिन अगर हम एक साल को 365 दिन मान लें, तो पूरे वर्ष में प्रकाश लगभग 9,460,800,000,000 किलोमीटर का सफर तय करता है. इसी दूरी को हम एक प्रकाश-वर्ष (Light Year) कहते हैं. अब 27,000 प्रकाश वर्ष x 9,460,800,000,000 किलोमीटर करने पर ही हमारा मनचाहा रिजल्ट आएगा. ऐसे में ब्रह्माण्ड के अल्कोहल को हम वहीं छोड़ दें तो अच्छा होगा. 

सैजिटेरियस B2 के बारे में अन्य रोचक जानकारी

हमने शुरुआत में सैजिटेरियस B2 के विस्तार की बात की थी. यह 150 प्रकाश-वर्ष तक फैला हुआ है. यानी एक ओर से दूसरी ओर तक जाने में ही कितने ही साल बीत जाएंगे. यह 1995 में एक्विला तारामंडल के पास खोजा गया था. यह हमारे सौर मंडल की परिधि (Diameter) से 1000 गुना बड़ा है. इसमें 32 अन्य केमिकल भी पाए जाते हैं.

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उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं.

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