Lok Sabha No Confidence Motion: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बुधवार को लोक सभा में स्पीकर ओम बिरला को पद से हटाने के प्रस्ताव पर होने वाली बहस के दौरान सदन को संबोधित करेंगे. यह प्रस्ताव कांग्रेस के सांसद मोहम्मद जावेद ने पेश किया था, जिसे 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिला. मंगलवार सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे जगदंबिका पालl ने प्रस्ताव पेश करने की अनुमति दी. उन्होंने बताया कि इस पर चर्चा के लिए 10 घंटे का समय निर्धारित किया गया है. उन्होंने सांसदों से कहा कि वे प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें. उन्होंने यह भी कहा कि स्पीकर ने विपक्ष के प्रस्ताव से जुड़े अनुमतियों और प्रक्रियाओं में उदारता दिखाई है.
118 विपक्षी सांसदों ने किया समर्थन
इस प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं. उनका आरोप है कि स्पीकर ओम बिरला ने सदन में ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया है. इस प्रस्ताव पर चर्चा मंगलवार को शुरू हुई, जिसके दौरान प्रक्रिया को लेकर तीखी बहस देखने को मिली.
एआईएमआईएम के नेता असदुद्दीन ओवैसी और कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने आपत्ति जताते हुए कहा कि सदन को बहस की अध्यक्षता के लिए किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए. उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल में से किसे सदन की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका फैसला कैसे किया गया.
हालांकि, भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया. पूर्व केंद्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद और भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने विपक्ष के तर्कों को ‘बेबुनियाद’ बताया.
गौरव गोगोई ने बहस की शुरुआत की
बहस की शुरुआत करते हुए कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि यह प्रस्ताव संसद की गरिमा की रक्षा के लिए लाया गया है, न कि किसी व्यक्तिगत दुश्मनी के कारण.
उन्होंने कहा, ‘यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से ओम बिरला के खिलाफ.’
गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री किरन रिजिजू पर भी कटाक्ष किया और कहा कि संसदीय रिकॉर्ड यह दिखाएंगे कि मंत्री अक्सर विपक्षी सदस्यों की बातों में बाधा डालते हैं.
उन्होंने कहा, ‘भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड और प्रतिलेखों पर शोध होगा, तो आंकड़े बताएंगे कि किरेन रिजिजू वह संसदीय कार्य मंत्री थे जिन्होंने विपक्ष को सबसे ज्यादा बाधित किया.’
प्रस्ताव में स्पीकर पर लगाए गए आरोप
गोगोई ने कहा कि प्रस्ताव के एक हिस्से में कहा गया है कि लोकसभा के स्पीकर ने ‘वह निष्पक्षता बनाए रखना बंद कर दिया है जो सदन के सभी वर्गों का विश्वास बनाए रखने के लिए आवश्यक है.’
इसके अनुसार, स्पीकर ने अपने पक्षपातपूर्ण व्यवहार में सदस्यों के अधिकारों की अनदेखी की है और ऐसे निर्णय व टिप्पणियां की हैं जो इन अधिकारों को कमजोर करते हैं. साथ ही विवादित मामलों में उन्होंने सत्तारूढ़ दल के पक्ष का समर्थन किया है.
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रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना
अपने संबोधन में संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर कोई खुद को सदन में स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका ‘कोई इलाज नहीं है.’
उन्होंने कहा, ‘संविधान और सदन के नियमों को देखें तो किसी ने भी स्पीकर के फैसले को चुनौती नहीं दी है. उस दिन मुझे इस बात से दुख हुआ जब विपक्ष के एक सांसद ने कहा कि ‘मुझे संसद में बोलने के लिए किसी की अनुमति की जरूरत नहीं है.’ यह रिकॉर्ड में है.
उन्होंने कहा कि ‘संसद में बोलना मेरा अधिकार है.’ तब मैं सोच रहा था कि कांग्रेस में इतने वरिष्ठ सदस्य हैं, फिर भी उन्होंने यह क्यों नहीं समझाया कि इस सदन में प्रधानमंत्री, मंत्री या विपक्ष के नेता मौजूद हो सकते हैं, लेकिन बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है.’
रिजिजू ने यह भी कहा कि कांग्रेस चाहती तो प्रियंका गांधी वाड्रा को सदन में अपना नेता चुन सकती थी.
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प्रियंका गांधी का पलटवार
इस पर प्रियंका गांधी वाड्रा ने पलटवार करते हुए कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार पर बेखौफ होकर हमला करते हैं.
उन्होंने कहा, ‘पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं. वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते.’
