ईरान युद्ध में 6 अमेरिकी सैनिकों की मौत, 140 घायल, 8 की हालत गंभीर: US रक्षा मंत्रालय

Iran War US Casualties: ईरान युद्ध में अमेरिका को सैन्य बेस के भौतिक नुकसान के साथ सैनिकों की क्षति भी उठानी पड़ रही है. 28 फरवरी से शुरू हुए युद्ध में अब तक कितने सैनिकों का नुकसान हुआ है, इसका डाटा अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने जारी किया है.

Iran War US Casualties: ईरान के साथ जारी सैन्य टकराव के 10 दिनों में करीब 140 अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं. अमेरिकी सैन्य मुख्यालय (पेंटागन) के प्रवक्ता सीन पर्नेल ने ईमेल के जरिए जारी बयान में कहा कि घायल सैनिकों में से ज्यादातर को मामूली चोटें आई हैं. उन्होंने बताया कि 108 सैनिक इलाज के बाद दोबारा ड्यूटी पर लौट चुके हैं, जबकि 8 सैनिक अभी भी गंभीर रूप से घायल हैं और उनका इलाज जारी है.

यह आंकड़ा ईरान की ओर से किए गए जवाबी रॉकेट और ड्रोन हमलों के बाद अमेरिकी सैनिकों को हुई क्षति की अब तक की सबसे स्पष्ट तस्वीर पेश करता है. इन हमलों के दौरान कुवैत और सऊदी अरब में तैनात सात अमेरिकी सैनिकों की मौत भी हुई है. वहीं, समाचार एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि संघर्ष में घायल अमेरिकी सैनिकों की संख्या करीब 150 तक पहुंच सकती है. यह संख्या पहले जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों से ज्यादा है.

व्हाइट हाउस की प्रेस ब्रीफिंग में प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिना लेविट ने भी संकेत दिया कि घायल सैनिकों की संख्या ‘लगभग 150’ के आसपास हो सकती है. अमेरिका और ईरान का यह टकराव 28 फरवरी को शुरू हुआ था, जब अमेरिका ने इजरायली सेना के साथ मिलकर ईरान के ऊपर हमला किया. इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए अमेरिकी ठिकानों पर रॉकेट और ड्रोन हमले किए. अमेरिका के अब तक ज्ञात 6 सैनिकों की मौत हुई है, जो कुवैत में एक ईरानी हमले में मारे गए थे. 

चोट कैसी है, इसकी जानकारी नहीं

रिपोर्ट के मुताबिक अभी यह स्पष्ट नहीं है कि घायल सैनिकों को किस तरह की चोटें आई हैं. यह भी साफ नहीं है कि इनमें से किसी को ट्रॉमैटिक ब्रेन इंजरी (TBI) जैसी गंभीर चोट लगी है या नहीं, जो आमतौर पर विस्फोट के झटकों से होती है. ईरान ने अपने जवाबी अभियान में अरब खाड़ी के देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों के अलावा कूटनीतिक मिशनों, होटलों और हवाई अड्डों को भी निशाना बनाया है. कुछ हमलों से क्षेत्र के तेल ढांचे को भी नुकसान पहुंचा है.

ईरानी हमलों की तीव्रता कम हो रही

हालांकि अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि हाल के दिनों में ईरानी हमलों की तीव्रता कम होती दिख रही है, क्योंकि अमेरिकी सेना लगातार ईरान के हथियार भंडार और मिसाइल लॉन्चरों को निशाना बनाकर कार्रवाई कर रही है. पेंटागन में हुई ब्रीफिंग के दौरान जॉइंट चीफ ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष डैन केन ने कहा कि यह संघर्ष अमेरिकी सेना के लिए उम्मीद से ज्यादा चुनौतीपूर्ण नहीं रहा है.

ये भी पढ़ें:- 20 साल के जेन जी ने यूरोप में बनाया अपना देश, बना राष्ट्रपति, पुलिस आई तो भागा लंदन

अमेरिका का महंगा युद्ध

अमेरिका के लिए यह युद्ध काफी महंगा भी साबित हो रहा है. पहले 48 घंटे में ही अमेरिका ने लगभग 560 करोड़ डॉलर के हथियार और गोला-बारूद का इस्तेमाल किया था. अमेरिकी सेना लगातार ईरान को निशाना बनाया है. यूएस प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने पहले कहा था कि यह युद्ध 3-4 हफ्तों तक चल सकता है, लेकिन बीते दिन उन्होंने बयान दिया कि यह युद्ध जल्द समाप्त हो सकता है. उनके स्पेशल राजदूत स्टीव विटकाफ जल्द ही इजरायल की यात्रा पर  जाने वाले हैं, उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही इस बात पर हो सकती है. 

ये भी पढ़ें:- खार्ग आईलैंड: समुद्र के बीच ईरान की लाइफलाइन, US यहां हमला करने से क्यों डर रहा?

जल्द युद्ध खत्म होने की उम्मीद!

वहीं, ट्रंप के बयान पर ईरान की आईआरजीसी ने पलटवार करते हुए कहा कि युद्ध का अंत वही (आईआरजीसी) तय करेगा. ईरान ने युद्ध शुरू होने के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को चोक कर दिया है, इससे पूरी दुनिया में तेल संकट पैदा हो रहा है. डोनाल्ड ट्रंप के ऊपर इसकी वजह से भी दबाव पड़ रहा है. हालांकि, इजरायल ने इस युद्ध को ‘निर्णायक मोड़’ पर ही खत्म करने की घोषणा की है. ऐसे में आने वाले समय में जल्द इस युद्ध के समाप्त होने की उम्मीद कम ही दिख रही है. 

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Anant narayan shukla

अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. अनन्त राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर खबरें करते हैं. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यमात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं.

अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं.

इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं.

अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने झारखंड विधान सभा 2024, दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 चुनाव और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है.

अनन्त कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं.

उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं.

तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >