Emmanuel Macron Giorgia Meloni: भारत दौरे से लौटते समय फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के एक बयान पर नाराज हो गए. एक सवाल के जवाब में मैक्रों ने गुरुवार को इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी पर तीखा हमला बोला. उन्होंने मेलोनी से कहा कि दूसरे देशों में क्या हो रहा है, इस पर वह टिप्पणी करना बंद करें. मैक्रों की नाराजगी मेलोनी की उस प्रतिक्रिया को लेकर थी, जिसमें उन्होंने दक्षिणपंथी कार्यकर्ता क्वेंटिन डेरांके की हत्या की निंदा की थी.
मेलोनी ने डेरांके की हत्या की निंदा करते हुए इसे ‘पूरे यूरोप के लिए एक घाव’ बताया था. नई दिल्ली में जब मैक्रों से इस मामले पर सवाल किया, तो उन्होंने पलटवार करते हुए कहा, ‘अगर हर कोई अपने काम से मतलब रखे, तो सब कुछ ठीक रहेगा. हर किसी को अपनी सीमा में रहना चाहिए.’ मैक्रों ने यह भी कहा कि फ्रांस में ‘ऐसे आंदोलनों के लिए कोई जगह नहीं है जो हिंसा को अपनाते या उसे सही ठहराते हैं.’ उन्होंने कहा, ‘हिंसा को किसी भी हाल में जायज नहीं ठहराया जा सकता- न इधर से, न उधर से और न ही ऐसी आमने-सामने की टकराहट में, जो गणराज्य के लिए घातक हो.’
फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने आगे कहा कि उन्हें इस बात से हैरानी होती है कि ‘जो लोग खुद को राष्ट्रवादी बताते हैं और अपने देश में किसी दखल को बर्दाश्त नहीं करते, वही सबसे पहले दूसरे देशों के मामलों पर टिप्पणी करने लगते हैं.’ मैक्रों की टीम के एक सदस्य ने गुरुवार को कहा था कि राष्ट्रपति ‘स्थिति को लेकर चिंतित हैं और उस पर करीबी नजर रखे हुए हैं.’ उन्होंने कहा कि हमें हिंसा के किसी भी चक्र से बचना चाहिए.
डेरांके की मौत का मामला क्या है?
फ्रांसीसी पुलिस के अनुसार, पिछले हफ्ते एक विश्वविद्यालय के बाहर हो रहे प्रदर्शन के दौरान 23 वर्षीय क्वेंटिन डेरांके की मौत हो गई. परिजनों और समर्थकों के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान छह लोगों ने उस पर हमला किया, जिससे उसकी जान चली गई. समाचार एजेंसी एएफपी ने सूत्रों के हवाले से बताया कि इस मामले में हिरासत में लिए गए 11 संदिग्धों में से ज्यादातर लोग वामपंथी आंदोलनों से जुड़े हैं. 11 लोगों में आठ पुरुषों और तीन महिलाओं शामिल हैं, जिनको हिरासत में लिया गया है.
हिरासत में लिए गए लोगों में कट्टर वामपंथी फ्रांस अनबोउड पार्टी के सांसद राफेल अर्नो के दो संसदीय सहायक और एक पूर्व इंटर्न भी शामिल हैं. डेरांके एक दक्षिणपंथी कार्यकर्ता था और फ्रांस की समाजवादी सरकार का मुखर विरोधी माना जाता था. उसके करीबी लोगों का दावा है कि उसकी मौत एक सोची-समझी साजिश के तहत हुई. डेरांके के माता-पिता के वकील ने शांति और संयम की अपील की. उन्होंने फ्रांसीसी न्यूज ब्रॉडकास्टर से कहा, ‘परिवार किसी भी तरह की हिंसा के आह्वान की निंदा करता है. खासतौर पर राजनीतिक हिंसा की.’
इस मामले में सत्तारूढ़ दल से जुड़े एक नेता पर आरोप लगाए गए हैं. घटना के बाद फ्रांस में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं. वहीं, इस हत्या ने फ्रांस में राजनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया है. मार्च में होने वाले नगर निकाय चुनावों और 2027 के राष्ट्रपति चुनाव से पहले माहौल गरमा गया है, जहां दक्षिणपंथी नेशनल रैली पार्टी को अब तक की सबसे मजबूत स्थिति में माना जा रहा है.
मेलोनी ने मैक्रों के बयान पर जताई हैरानगी
वहीं, इटली की प्रधानमंत्री के करीबी अधिकारियों ने मैक्रों की टिप्पणी पर हैरानी जताई और कहा कि मेलोनी का बयान ‘इस भयावह घटना से प्रभावित फ्रांसीसी जनता के प्रति एकजुटता दिखाने के लिए था, न कि फ्रांस के आंतरिक मामलों में दखल देने के लिए.’ स्काई टीजी24 न्यूज से बातचीत में मेलोनी ने कहा, ‘सच कहूं तो मैक्रों का यह बयान मुझे काफी चौंकाने वाला लगा. मुझे इसकी उम्मीद नहीं थी. मेरी बात फ्रांस को लेकर नहीं थी, बल्कि ध्रुवीकरण के खतरों को लेकर थी.’
मेलोनी की टिप्पणी मैक्रों के बयान पर पलटवार
उन्होंने आगे कहा, ‘मुझे अफसोस है कि मैक्रों ने इसे हस्तक्षेप के तौर पर देखा. हस्तक्षेप कुछ और होता है, जैसे जब किसी देश में जनता किसी नेता को चुनती है और कोई विदेशी देश कहता है कि हम वहां कानून के शासन पर नजर रखेंगे.’ मेलोनी ने यह टिप्पणी उस संदर्भ में की, जब 2022 में उनके चुनाव जीतने के कुछ दिनों बाद फ्रांस सरकार ने कहा था कि वह इटली में कानून के शासन की निगरानी करेगी. मैक्रों और मेलोनी के बीच यह पहला टकराव नहीं है. इससे पहले गर्भपात अधिकार और प्रवासन जैसे मुद्दों पर भी दोनों नेताओं के बीच तीखी बयानबाजी हो चुकी है.
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