US Military Buildup Near Iran: मिडिल ईस्ट में इस वक्त माहौल एकदम गरम है. अमेरिका और ईरान के बीच ठन गई है और हालात ऐसे हैं कि कभी भी युद्ध छिड़ सकता है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को साफ शब्दों में अल्टीमेटम दे दिया है कि या तो अगले 10 से 15 दिनों के अंदर न्यूक्लियर डील पर बात मान लो, वरना अंजाम बहुत बुरा होगा. अमेरिका ने अपनी सेना का ऐसा घेरा बनाया है, जिसे ‘आर्माडा’ (जंगी बेड़ा) कहा जा रहा है.
ईरान की घेराबंदी: समंदर से आसमान तक
अमेरिकी सैन्य ताकत इस वक्त ईरान के बेहद करीब पहुंच चुकी है. द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस घेराबंदी में अमेरिका का सबसे घातक विमानवाहक पोत ‘अब्राहम लिंकन’ (Abraham Lincoln) शामिल है. इसके साथ तीन ऐसे जंगी जहाज हैं जो ‘टॉमहॉक’ मिसाइलों से लैस हैं. ये वही मिसाइलें हैं जिनसे पिछले साल जून में ईरान के दो परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया गया था. इसके अलावा, दुनिया का सबसे आधुनिक एयरक्राफ्ट कैरियर ‘USS गेराल्ड आर. फोर्ड’ (USS Gerald R. Ford) भी तीन डिस्ट्रॉयर्स के साथ इस ओर बढ़ रहा है. जहाज-ट्रैकिंग डेटा से पता चला है कि ये जिब्राल्टर जलडमरूमध्य की तरफ जा रहे हैं.
जॉर्डन बना अमेरिका के ‘अड्डे’
सिर्फ समंदर ही नहीं, आसमान में भी अमेरिका ने पूरी तैयारी कर ली है. वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, जॉर्डन (मुस्लिम बहुल देश) का ‘मुवाफ्फाक साल्ती’ एयर बेस अब अमेरिकी लड़ाकू विमानों का गढ़ बन चुका है. यहां 30 से ज्यादा घातक फाइटर जेट्स तैनात हैं.
- हथियारों का जखीरा: यहां F-35, F-22 रैप्टर, F-15 और F-16 जैसे स्टील्थ फाइटर जेट्स मौजूद हैं.
- ड्रोन और जैमर्स: सैटेलाइट तस्वीरों में यहां 5 ‘रीपर’ ड्रोन और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर जेट्स भी देखे गए हैं, जो दुश्मन के रडार को जाम कर सकते हैं.
- डिएगो गार्सिया बेस: हिंद महासागर में स्थित इस बेस पर ‘B-2 स्टील्थ बॉम्बर्स’ को हाई अलर्ट पर रखा गया है, जो लंबी दूरी तक जाकर हमला करने में माहिर हैं.
ट्रंप का अल्टीमेटम: 10-15 दिन का टाइम
राष्ट्रपति ट्रंप ने रिपोर्टर्स से बात करते हुए दोटूक कहा कि ईरान के पास समझौता करने के लिए 10-15 दिन का समय काफी है. या तो डील होगी, या फिर उनके लिए सब बहुत बदकिस्मत (अनफॉर्चूनेट) होने वाला है. ट्रंप ने ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की मीटिंग में भी यही दोहराया कि अगर ईरान साथ आता है तो अच्छा है, नहीं तो अमेरिका एक अलग रास्ता चुनेगा. बता दें कि इस समय मिडिल ईस्ट में 30,000 से 40,000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं और पेंटागन ने सुरक्षा के लिए ‘पैट्रियट’ और ‘THAAD’ मिसाइल डिफेंस सिस्टम भी वहां भेज दिए हैं.
ईरान भी पीछे हटने को तैयार नहीं, रूस के साथ शुरू की ड्रिल
दूसरी तरफ, ईरान ने भी अपनी तैयारी शुरू कर दी है. ईरान ने रूस के साथ मिलकर सैन्य अभ्यास शुरू किया है. द वॉल स्ट्रीट जर्नल की मानें तो ईरान अपने मिसाइल भंडार का इस्तेमाल अमेरिकी ठिकानों पर कर सकता है. साथ ही, वह ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) को बंद करने की कोशिश कर सकता है, जिससे दुनिया भर में तेल की सप्लाई ठप हो सकती है. फिलहाल दुनिया की नजरें इन 15 दिनों पर टिकी हैं. क्या कूटनीति से बात बनेगी या फिर मिडिल ईस्ट एक भीषण युद्ध की आग में झुलसेगा, यह जल्द ही साफ हो जाएगा.
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