इक्वाडोर के 10 प्रांतों में लगा आपातकाल, राष्ट्रपति के पक्ष और विपक्ष में हो रहे प्रदर्शन

Ecuador Emergency in 10 Province: इक्वाडोर के दस प्रांतों में आपातकाल की घोषणा कर दी गई है. यह कदम सरकार द्वारा डीजल पर सब्सिडी समाप्त करने के बाद हो रहे प्रदर्शन के मद्देनजर उठाया गया है. हालांकि इसमें सरकार के पक्ष और विपक्ष दोनों के लिए प्रदर्शन हो रहे हैं.

Ecuador Emergency in 10 Province: इक्वाडोर की राजधानी क्विटो में रविवार कोराष्ट्रपति डैनियल नोबोआ के समर्थन और विरोध में लोग सड़कों पर उतरे. यह प्रदर्शन 10 प्रांतों में आपातकाल की घोषणा के ठीक एक दिन बाद हुआ. सरकार-विरोधी प्रदर्शनों की शुरुआत दो हफ्ते पहले हुई थी, जिसे देश के सबसे बड़े स्वदेशी संगठन ने आयोजित किया था. इस विरोध का कारण है, ईंधन सब्सिडी हटाना, जिसके चलते डीजल की कीमत 1.80 डॉलर से बढ़कर 2.80 डॉलर प्रति गैलन हो गई.

राजधानी के एक लोकप्रिय पार्क में प्रदर्शनकारियों ने नारे लगाए, “डीजल बढ़ेगा तो सब कुछ बढ़ेगा” और “नोबोआ इस्तीफा दो.” वहीं पास में सरकार समर्थक भी बड़ी संख्या में जमा हुए. पुलिस ने रविवार को बताया कि कोई घायल या गिरफ्तार नहीं हुआ, हालांकि कुछ प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा घेरे को तोड़ने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने आंसू गैस का इस्तेमाल किया.

पहले ही लगा दी थी इमरजेंसी

दरअसल इक्वाडोर की सरकार ने पिछले महीने 16 सितंबर को 60 दिन की इमरजेंसी लगा दी थी. यह अचानक डीजल पर सब्सिडी खत्म करने के बाद शुरू हुए प्रदर्शनों के बाद उठाया गया कदम था. सरकार का कहना है कि इस सब्सिडी से गरीबों को कम और संपन्न और अमीरों और बिजनेस सेक्टर को ज्यादा फायदा हो रहा था. लेकिन जनता का मानना है कि इसका असर उनकी जेब पर पड़ा है. विशेषकर गरीब वर्ग और ट्रांसपोर्ट सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है. 

क्यों हटाई सब्सिडी

वहीं नोबोआ सरकार का कहना है कि डीजल सब्सिडी खत्म करने से बची रकम में से 220 मिलियन डॉलर परिवहन क्षेत्र को दी जाएगी, ताकि बसों और टैक्सियों के किरायों में बढ़ोतरी न करनी पड़े. साथ ही, प्रशासन ने यह भी वादा किया है कि 11 दिसंबर से एक मूल्य स्थिरीकरण तंत्र (प्राइस स्टेबिलाइजेशन मेकैनिज्म) लागू किया जाएगा, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर जनता पर न पड़े. 

पहले भी सब्सिडी समाप्त करने का हुआ था प्रयास

इक्वाडोर में ईंधन सब्सिडी लंबे समय से ��ाजनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दा रही है. पिछली कई सरकारों ने भी इसे खत्म करने की कोशिश की थी, लेकिन भारी जनविरोध के कारण उन्हें पीछे हटना पड़ा. नोबोआ प्रशासन का तर्क है कि देश की कमजोर अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए अब सख्त कदम उठाना अनिवार्य है.

बढ़ते प्रदर्शन के बाद लगानी पड़ी इमरजेंसी

विरोध अब शुरू हो गया है. ऐसे में अब अगर प्रदर्शन और हिंसा का दायरा बढ़ता गया, तो यह देश की राजनीति और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए गंभीर संकट बन सकता है. शनिवार देर रात, सरकार ने घोषणा की कि रविवार मध्यरात्रि से 10 प्रांतों में आपातकाल लागू होगा, क्योंकि वहां “गंभीर आंतरिक अशांति” की स्थिति है. ये प्रांत वे हैं जहाँ स्वदेशी आबादी अधिक है और प्रदर्शन सबसे ज्यादा केंद्रित हैं. इस आदेश में सभा की स्वतंत्रता पर कुछ पाबंदी लगाई गई है, हालांकि शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर रोक नहीं है.

सैन्यकर्मियों को भी बनाया गया था बंदी

इक्वाडोर की स्वदेशी राष्ट्रीयताओं के परिसंघ (Confederation of Indigenous Nationalities of Ecuador) ने एक बयान जारी कर कहा कि नोबोआ का यह आपातकाल आदेश “जनता की वैध मांगों के खिलाफ उनकी युद्ध नीति को और गहरा करता है.” संगठन ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाओं से स्थिति पर नजर बनाए रखने की अपील की. पिछले हफ्ते पुलिस और स्वदेशी प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़प में एक नागरिक की मौत हो गई थी और कई लोग घायल हुए थे. इस प्रदर्शन में करीब 100 लोगों को हिरासत में लिया गया है और कुछ सैन्यकर्मियों को भी अस्थायी रूप से बंदी बनाया गया, हालांकि इन्हें बाद में रिहा कर दिया गया.

राष्ट्रपति ने अपनाया कड़ा रुख

रविवार को प्रदर्शनकारियों ने गिरफ्तार लोगों की रिहाई की मांग की, जिनमें 13 लोग आतंकवाद के आरोपों का सामना कर रहे हैं. वहीं, सरकार समर्थक कार्यक्रमों में एल आर्बोलितो पार्क में एक कला मेले का आयोजन किया गया, जिसमें मंत्रियों और अन्य अधिकारियों ने सुरक्षा बलों की भारी तैनाती के बीच भाग लिया. गृह मंत्री जायदा रोविरा ने कहा, “इक्वाडोर अब हिंसा से थक चुका है.” वहीं राष्ट्रपति नोबोआ ने स्पष्ट किया है कि वह ईंधन सब्सिडी वापस नहीं लेंगे. उन्होंने रविवार को प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा, “जो हिंसा का रास्ता चुनेंगे, वे कानून का सामना करेंगे. जो अपराधी की तरह काम करेंगे, उनके साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया जाएगा.”

ये भी पढ़ें:-

फरवरी में समाप्त हो रही इस संधि पर पुतिन का ऑफर, ट्रंप ने कहा सुनने में अच्छा लग रहा

परमाणु से 400 गुना घातक है एस्टेरॉयड, 2032 में चांद पर छाएगा सबसे बड़ा ग्रहण, NASA की चेतावनी

कैसे धोएंगी हानिया आमिर अपने बाल? पाकिस्तान के बाजार से गायब हुआ साबुन और शैम्पू

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Anant narayan shukla

अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. अनन्त राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर खबरें करते हैं. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यमात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं.

अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं.

इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं.

अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने झारखंड विधान सभा 2024, दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 चुनाव और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है.

अनन्त कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं.

उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं.

तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.

Read More
Tags
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >