चीन और रूस से परमाणु हथियारों पर की बात, ये काम जरूरी है… अब क्या चाहते हैं डोनाल्ड ट्रंप?

Donald Trump on Nuclear Weapons China-Russia: डोनाल्ड ट्रंप परमाणु हथियारों के डर से दुनिया को निकालना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि हथियारों के निरस्त्रीकरण पर चीन और रूस से बात की है. उन्होंने कहा कि ये वही देश हैं, जिनके पास दुनिया में सबसे अधिक परमाणु हथियार हैं.

Donald Trump on Nuclear Weapons China-Russia: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार (स्थानीय समय) को कहा कि उन्होंने चीन और रूस के साथ हथियारों के निरस्त्रीकरण (डीन्यूक्लियराइजेशन) पर चर्चा की है और उम्मीद जताई कि सभी पक्ष परमाणु शस्त्रागार को कम करने की दिशा में काम कर सकते हैं. व्हाइट हाउस में राज्य स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) संबंधी विभिन्न नियमों को रोकने के लिए एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर हस्ताक्षर करने के बाद पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि हथियारों का निरस्त्रीकरण ऐसी बात है, जिसे ये सभी देश करना चाहेंगे, विशेषकर परमाणु हथियारों का. ये वही देश हैं, जिनके पास दुनिया में सबसे अधिक परमाणु हथियार हैं. 

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, “मैंने चीन से जिन मुद्दों पर बात की है, उनमें से एक है हथियारों का निरस्त्रीकरण. हम देखना चाहेंगे कि क्या हम इसे रोक सकते हैं. मैं परमाणु हथियारों की बात कर रहा हूँ. मैंने इस बारे में चीन से बात की है. रूस से भी बात की है. और मुझे लगता है कि यह ऐसा कदम है, जो हम भी चाहेंगे और वे भी करना चाहेंगे. मुझे लगता है कि रूस भी ऐसा करना चाहेगा.”

अक्टूबर में ट्रंप ने कहा था कि निरस्त्रीकरण बेहतरीन बात होगी, लेकिन तीन दशक से अधिक समय बाद अमेरिकी परमाणु परीक्षणों को फिर शुरू करना उचित है, क्योंकि रूस उन्नत परमाणु-सक्षम प्रणालियों, जैसे पोसाइडन अंडरवॉटर ड्रोन का परीक्षण कर रहा है. यह दोनों परमाणु महाशक्तियों के बीच तनाव को बढ़ाता है.

पहले कहा था- जब दूसरे कर रहे तो हम क्यों नहीं!

उन्होंने उस कहा था कि वे सभी परमाणु परीक्षण करते दिख रहे हैं. रूस और चीन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा था- ‘हमारे पास किसी से भी ज्यादा परमाणु हथियार हैं. हम परीक्षण नहीं करते… लेकिन जब दूसरे परीक्षण कर रहे हैं, तो मुझे लगता है कि हमारा भी करना उचित है.’ उन्होंने कहा कि इसके लिए तैयारियां पहले से मौजूद हैं. ट्रंप ने कहा था कि हमारे पास टेस्ट साइट्स हैं. इसका ऐलान किया जाएगा. हालांकि उन्होंने समय या स्थान नहीं बताया.

अमेरिका ने किया न्यूक्लियर ग्रेविटी बम का परीक्षण

पिछले महीने संयुक्त राज्य अमेरिका ने अपनी B61-12 न्यूक्लियर ग्रेविटी बम के महत्वपूर्ण स्टॉकपाइल फ्लाइट परीक्षण पूरे किए, जिसे F-35A स्टेल्थ फाइटर जेट द्वारा ले जाया गया था. अमेरिकी ऊर्जा विभाग की सैंडिया नेशनल लैबोरेटरीज की रिपोर्ट के अनुसार परीक्षण 19 से 21 अगस्त के बीच नेवादा के टोनोपा टेस्ट रेंज में हुआ, जिसमें यूटा के हिल एयर फोर्स बेस का भी सहयोग था. परीक्षण में F-35A से B61-12 के निष्क्रिय (inert) मॉडल को सफलतापूर्वक छोड़ा गया, जिससे विमान, एयरक्रू और हथियार की परिचालन क्षमता की पुष्टि हुई.

उत्तर कोरिया को लेकर नीति में बदलाव नहीं

इस बीच, सोमवार को अमेरिका ने कहा कि उत्तर कोरिया का पूर्ण निरस्त्रीकरण दक्षिण कोरिया के साथ उसकी साझा नीति बनी हुई है. यह बयान उस समय आया जब नवीनतम अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति (NSS) में उत्तर कोरिया का उल्लेख नहीं किया गया.  नई NSS इस महीने की शुरुआत में जारी हुई. इसमें 2017 और 2022 के संस्करणों की तरह उत्तर कोरिया का स्पष्ट उल्लेख नहीं है, जिससे चिंता हुई कि यह मुद्दा अमेरिकी नीति दस्तावेजों में पीछे छूट सकता है. दक्षिण कोरिया में कार्यवाहक अमेरिकी राजदूत केविन किम ने दक्षिण कोरिया के प्रथम उप विदेश मंत्री पार्क यून-जू से मुलाकात में स्पष्टीकरण दिया कि ट्रंप प्रशासन कोरियाई प्रायद्वीप के निरस्त्रीकरण को प्राथमिकता देता है.

किम ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप और राष्ट्रपति ली (जे मायंग) ने संयुक्त बयान में उत्तर कोरिया के पूर्ण निरस्त्रीकरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है. यही हमारी कोरिया नीति है. वहीं दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्रालय ने कहा कि NSS एक व्यापक दृष्टिकोण को दर्शाता है और विशिष्ट संघर्षों पर कम ध्यान देता है. मंत्रालय ने यह भी कहा कि अमेरिका ने अपने प्रमुख बयानों और शिखर सम्मेलनों में निरस्त्रीकरण के प्रति अपनी स्थिति लगातार दोहराई है.

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उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं.

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