China Hybrid War: ईरान और अमेरिका के बीच स्विट्जरलैंड में वार्ता जारी है और दोनों देशों के बीच तनाव कम होने और शांति की दिशा में प्रगति की उम्मीद जताई जा रही है. इसी बीच चीन ने ताइवान को लेकर नई रणनीति अपनानी शुरू कर दी है. ताइवान के एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी का दावा है कि बीजिंग खुली सैन्य कार्रवाई के बजाय तेजी से हाइब्रिड युद्ध (Hybrid Warfare) की रणनीति पर आगे बढ़ रहा है. इस रणनीति के तहत चीन तटरक्षक बल की तैनाती, वैज्ञानिक अनुसंधान पोतों के संचालन और अन्य गैर-पारंपरिक तरीकों का इस्तेमाल कर ताइवान पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है. ताइवान राष्ट्रीय सुरक्षा संस्थान के उप महासचिव हो चेंगहुई ने ताइपे टाइम्स से बातचीत में कहा कि चीन की हालिया गतिविधियां संकेत देती हैं कि वह प्रत्यक्ष सैन्य टकराव से बचते हुए रणनीतिक और मनोवैज्ञानिक दबाव बढ़ाने की नीति पर काम कर रहा है.
क्या होता है हाइब्रिड युद्ध?
हाइब्रिड युद्ध संघर्ष की एक ऐसी रणनीति है, जिसमें किसी प्रतिद्वंद्वी देश पर दबाव बनाने या उसे कमजोर करने के लिए सीधे सैन्य हमले के बजाय दुष्प्रचार, साइबर हमले, आर्थिक दबाव, कानूनी दावों, राजनीतिक प्रभाव, खुफिया गतिविधियों और मनोवैज्ञानिक अभियानों जैसे उपायों का सहारा लिया जाता है. हाइब्रिड युद्ध का मकसद बिना औपचारिक युद्ध छेड़े प्रतिद्वंद्वी देश की सुरक्षा, अर्थव्यवस्था, राजनीतिक व्यवस्था और जनमत को प्रभावित करना होता है. इस रणनीति के जरिए किसी देश को अंदर से कमजोर करने और अपने रणनीतिक हितों को आगे बढ़ाने की कोशिश की जाती है.
कूटनीतिक दबाव बनाने में लगा है चीन- हो चेंगहुई
चेंगहुई ने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध और ईरान संघर्ष को देखने से ड्रैगन की समझ में यह तो आ गया है कि खुले युद्ध के जरिए अपने लक्ष्य को हासिल करना काफी मुश्किल है. ऐसे में वह युद्ध की सीमा से नीचे रहने वाली रणनीतियों पर अधिक ध्यान दे रहा है. हो होगहुई के मुताबिक चीन इन उपायों के तहत दावे, समुद्री शक्ति का प्रदर्शन और अन्य प्रचार अभियानों का उपयोग कर रहा है. ड्रैगन की इन हरकतों का मकसद जनमत को प्रभावित करना और ताइवान के साथ-साथ जापान और फिलीपींस जैसे क्षेत्रीय देशों पर कूटनीतिक दबाव बनाना है. उन्होंने कहा कि बीजिंग अंतरराष्ट्रीय कानून की खामियों का लाभ उठाकर विवादित समुद्री क्षेत्रों में अपने आक्रामक रवैया को सही ठहराने की कोशिश कर रहा है.
तटरक्षक बल बना चीन की रणनीति का बड़ा हथियार
हो चेंगहुई ने कहा कि चीन का तटरक्षक बल इस रणनीति का सबसे अहम हिस्सा बन चुका है. तटरक्षक जहाज अक्सर विवादित समुद्री सीमाओं के आसपास संचालन करते हैं, जिससे अनिश्चितता का माहौल बनता है और स्थापित अंतरराष्ट्रीय मानदंडों को चुनौती मिलती है. उन्होंने ताइवान के विशेष आर्थिक क्षेत्रों (EEZ), ताइवान स्ट्रेट की मध्य रेखा, किनमेन और मात्सु द्वीपों के आसपास के जलक्षेत्रों को भविष्य में चीनी गतिविधियों के संभावित केंद्र बताया.
फिलीपींस मॉडल अपनाने की सलाह
हो ने ताइवान से अधिक एक्टिव और पारदर्शी प्रतिक्रिया देने का आग्रह किया है. उन्होंने फिलीपींस की पूर्ण पारदर्शिता नीति को एक प्रभावी उदाहरण बताया है. उनके अनुसार, फिलीपींस ने चीनी समुद्री घुसपैठ की हर घटना का सार्वजनिक दस्तावेजीकरण और खुलासा करके बीजिंग के दुष्प्रचार और दावों का प्रभावी ढंग से मुकाबला किया है. हो ने सुझाव दिया कि ताइवान भी अपने बाहरी द्वीपों के आसपास तटरक्षक बल की गश्त का लाइव प्रसारण कर सकता है, जिससे चीन के कथित भ्रामक दावों की काट की जा सके. इसके अलावा उन्होंने ताइवान, जापान और फिलीपींस के बीच खुफिया जानकारी साझा करने, संयुक्त समुद्री निगरानी और कानून प्रवर्तन अभियानों को बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया है. उन्होंने मछली पकड़ने और समुद्री संसाधनों से जुड़े विवादों के समाधान के लिए कूटनीतिक सहयोग को भी काफी अहम बताया है.
Also Read: ट्रंप ने ईरान पर खतरनाक हमले की दी धमकी: कहा- लेबनान में रोकें प्रॉक्सी, वरना भुगतना होगा अंजाम
