पुतिन के साथ जिनपिंग भी आएंगे भारत! दिल्ली के BRICS समिट में होगा बड़ा जमावड़ा

BRICS Summit 2026 Delhi: सितंबर 2026 में नई दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के शामिल होने की संभावना है. शी जिनपिंग का यह 2019 के बाद पहला भारत दौरा हो सकता है.

BRICS Summit 2026 Delhi: सितंबर 2026 में नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को लेकर बड़ी जानकारी सामने आई है. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ ही चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी इस सम्मेलन में हिस्सा लेने भारत आ सकते हैं. रूस और चीन दोनों ने नई दिल्ली को संकेत दिए हैं कि उनके शीर्ष नेता 12 और 13 सितंबर को होने वाले ब्रिक्स नेताओं के सम्मेलन में शामिल हो सकते हैं. भारत इस बार ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है.

ब्रिक्स सम्मेलन में शी जिनपिंग की संभावित यात्रा सबसे ज्यादा चर्चा में है. अगर उनका दौरा तय होता है तो यह अक्टूबर 2019 के बाद उनकी पहली भारत यात्रा होगी. आखिरी बार शी जिनपिंग तमिलनाडु के मामल्लापुरम में भारत-चीन नेताओं की दूसरी अनौपचारिक बैठक में शामिल होने आए थे. 

2020 सीमा विवाद के बाद बिगड़े थे रिश्ते

भारत और चीन के संबंध अप्रैल-मई 2020 में पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर शुरू हुए गलवान सैन्य गतिरोध के बाद काफी खराब हो गए थे. हालांकि, अक्टूबर 2024 में रूस के कजान में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात के बाद रिश्तों को सामान्य बनाने की प्रक्रिया शुरू हुई. उसी दौरान दोनों देशों ने पूर्वी लद्दाख में सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया पूरी करने पर सहमति जताई थी.

पिछले डेढ़ साल में रिश्तों में आई नरमी

बीते करीब डेढ़ साल में भारत और चीन के संबंधों में कुछ सकारात्मक बदलाव देखने को मिले हैं. दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानें फिर शुरू हुई हैं, वीजा सेवाओं को बहाल किया गया है और चीनी कंपनियों पर कुछ प्रतिबंधों में ढील दी गई है. इसके अलावा कैलाश मानसरोवर यात्रा को भी फिर से शुरू किया गया है. हालांकि सीमा पर अब भी 50 हजार से ज्यादा सैनिक तैनात हैं और तनाव पूरी तरह खत्म करने की प्रक्रिया अभी बाकी है.

विदेश मंत्रियों की बैठक में तय हुआ एजेंडा

पिछले सप्ताह नई दिल्ली में ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक हुई थी, जिसमें शिखर सम्मेलन के एजेंडे पर चर्चा की गई. सूत्रों के मुताबिक कई अहम मुद्दों पर सहमति बनी है. रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव इस बैठक में शामिल हुए थे. वहीं चीन के विदेश मंत्री वांग यी इसमें नहीं आ सके क्योंकि उन्हें बीजिंग में शी जिनपिंग और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच अहम बैठक में मौजूद रहना था. उनकी जगह भारत में चीन के राजदूत शू फेईहोंग ने बैठक में हिस्सा लिया. इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, अगर कोई अप्रत्याशित स्थिति नहीं बनती है तो BRICS देशों की तरफ से शीर्ष स्तर पर भागीदारी की जानकारी नई दिल्ली को दे दी गई है.

पुतिन के आने की जानकारी कंफर्म

रूसी समाचार एजेंसी TASS के अनुसार, रूसी अधिकारियों ने पुतिन के ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल होने की पुष्टि कर दी है. पुतिन की यह एक साल के अंदर दूसरी भारत यात्रा होगी. पिछले साल दिसंबर 2025 में वह भारत-रूस शिखर सम्मेलन में भाग लेने आए थे. पुतिन 31 अगस्त और 1 सितंबर को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (SCO) सम्मेलन में भी हिस्सा लेंगे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भी एससीओ बैठक में शामिल होने की संभावना है. एससीओ बैठक के तुरंत बाद ही ब्रिक्स सम्मेलन होना है.

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पश्चिम एशिया युद्ध पर साझा रुख बनाने की कोशिश

2006 में बना ब्रिक्स विकसित पश्चिमी देशों से अलग एक संगठन है. जिसमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन और साउथ अफ्रीका परमानेंट मेंबर हैं. इसके अलावा इसमें पिछले कुछ सालों में इजिप्ट, इथियोपिया, ईरान और यूएई और इंडोनेशिया भी शामिल हुए हैं. यह संगठन दुनिया के लगभग 49 प्रतिशत आबादी को रिप्रेजेंट करता है. भारत और चीन जैसी दुनिया की दो सबसे बड़ी आबादी और दूसरे और चौथे नंबर की अर्थव्यवस्था वाले देश इसमें शामिल हैं. साथ ही सैन्य रूप से भी यह समूह काफी ताकत रखता है. ऐसे में इसके सम्मेलनों से निकली आवाज का असर वैश्वविक स्तर पर होता है. \

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ईरान संकट से निपटने के लिए ब्रिक्स सम्मेलन अहम

रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद ईरान संकट दुनिया के ऊपर बड़े खतरे के रूप में देखा जा रहा है. भारत चाहता है कि ब्रिक्स देश पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध को लेकर सम्मेलन से पहले किसी साझा समझ तक पहुंचें. फिलहाल इस मुद्दे पर BRICS देशों के बीच मतभेद बने हुए हैं. खासकर ईरान और यूएई, जो दोनों इस समूह के सदस्य हैं, अलग-अलग रुख रखते हैं. पिछले सप्ताह हुई बैठक में पश्चिम एशिया युद्ध को लेकर साझा कूटनीतिक भाषा पर सहमति नहीं बन पाई थी. इसके बाद भारत ने चेयर स्टेटमेंट जारी किया, जिसमें दोनों पक्षों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की गई.

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By Anant narayan shukla

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उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं.

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