हसीना सरकार गिराने वाले ‘योद्धाओं’ के लिए यूनुस का ‘सुरक्षा कवच’, अभियोग से बचाने का ये है प्लान

Bangladesh Ordinance Protecting July Sarriors: मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ‘जुलाई योद्धाओं’ को अभियोग से बचाने के लिए अध्यादेश लाएगी. ये वही छात्र हैं, जिन्होंने शेख हसीना की सरकार गिराने में सबसे अहम भूमिका अदा की थी. हाल ही में इसके दो नेताओं के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था, जिसके लिए छात्रों ने फिर से प्रदर्शन किया था. अब अंतरिम सरकार इन्हें सुरक्षा कवच जैसा प्रदान करना चाहती है.

By Anant Narayan Shukla | January 7, 2026 9:23 AM

Bangladesh Ordinance Protecting July Warriors: बांग्लादेश में 5 अगस्त 2024 को शेख हसीना की सरकार गिराने में युवाओं का बड़ा हाथ रहा. उन्होंने जुलाई महीने में हिंसक आंदोलन किया, जिसमें कई लोग मारे गए. हालांकि इसके बाद काफी हिंसा भी हुई, जिससे इनका नाम खराब हुआ. अब बांग्लादेश की अंतरिम सरकार वर्ष 2024 में सत्ता परिवर्तन का कारण बने आंदोलन से जुड़े तथाकथित ‘जुलाई योद्धाओं’ को कानूनी कार्रवाई से बचाने के लिए एक विशेष अध्यादेश लाने की दिशा में आगे बढ़ रही है. स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य उन लोगों को अभियोग से सुरक्षा देना है, जिन्होंने जुलाई 2024 में हुए आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई थी, जिसके परिणामस्वरूप तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग सरकार सत्ता से बाहर हो गई थी.

‘प्रथम आलो’ और ‘इत्तेफाक’ जैसे प्रमुख बांग्लादेशी अखबारों की खबरों के मुताबिक, सरकार इस अध्यादेश के मसौदे पर गंभीरता से विचार कर रही है. सोमवार को गृह मामलों के सलाहकार लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) जहांगीर आलम चौधरी की अध्यक्षता में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में इस प्रस्ताव पर सहमति बनी. बैठक में तय किया गया कि ‘जुलाई योद्धाओं’ को वही कानूनी संरक्षण दिया जा सकता है, जैसा कि अवामी लीग सरकार ने 1971 के मुक्ति संग्राम के स्वतंत्रता सेनानियों को देने के लिए एक विशेष कानून के तहत प्रदान किया था.

दो घटनाओं से हरकत में आया शासन

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, हाल के दिनों में हुई दो घटनाओं ने सरकार को इस दिशा में कदम उठाने के लिए मजबूर किया है. पहली घटना 25 दिसंबर की है, जब कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने ‘जुलाई योद्धा’ तहरीमा जन्नत सुरोवी को जबरन वसूली और ब्लैकमेलिंग के आरोप में गिरफ्तार किया. हालांकि, बाद में गाजीपुर की एक स्थानीय अदालत ने उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया. दूसरी घटना हबीगंज जिले की है, जहां गत शनिवार को पुलिस ने मेहदी हसन को गिरफ्तार किया. यह गिरफ्तारी उस घटना के एक दिन बाद हुई, जब हसन समर्थकों की भीड़ के साथ एक स्थानीय पुलिस थाने पहुंचा था और कथित तौर पर थाना प्रभारी को धमकी दी थी. हबीगंज की अदालत ने भी अगले दिन उसे जमानत दे दी.

गिरफ्तारी के बाद हुए प्रदर्शन

इन दोनों गिरफ्तारियों के बाद ‘स्टूडेंट्स अगेंस्ट डिस्क्रिमिनेशन’ नामक संगठन से जुड़े कार्यकर्ताओं ने ढाका, हबीगंज और अन्य प्रमुख शहरों में बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन किए. प्रदर्शनकारियों ने तहरीमा सुरोवी और मेहदी हसन की बिना शर्त रिहाई की मांग के साथ-साथ भविष्य में ‘जुलाई योद्धाओं’ के खिलाफ किसी भी तरह की कानूनी कार्रवाई को रोकने के लिए विशेष कानूनी प्रावधान किए जाने की मांग उठाई. सूत्रों का कहना है कि इन प्रदर्शनों के दबाव और राजनीतिक संवेदनशीलता को देखते हुए अंतरिम सरकार अब एक अध्यादेश के जरिए ‘जुलाई योद्धाओं’ को अभियोग से संरक्षण देने की तैयारी कर रही है, ताकि आगे किसी भी तरह के विवाद या असंतोष को रोका जा सके.

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