अमेरिका में होने वाले मिडटर्म चुनाव से पहले इमिग्रेशन को लेकर एक बार फिर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की राजनीति केंद्र में है. लेकिन इस बार बहस सिर्फ अमेरिका-मेक्सिको बॉर्डर या अवैध प्रवास तक सीमित नहीं है. भारतीय और दूसरे दक्षिण एशियाई समुदायों के खिलाफ ICE की कार्रवाई, इमिग्रेशन स्टेटस को लेकर डर और बढ़ती एंटी-साउथ एशियन नफरत को लेकर चिंता बढ़ रही है. ICE की कार्रवाई के आंकड़े बताते हैं कि एशियाई समुदाय भी ट्रम्प प्रशासन के इमिग्रेशन एनफोर्समेंट से तेजी से प्रभावित हो रहे हैं.
ICE की कार्रवाई में भारतीयों पर निशाना
- ICE के आंकड़ों के मुताबिक, 20 जनवरी 2025 से 6 अगस्त 2026 के बीच एशियाई लोगों के खिलाफ 21,078 गिरफ्तारियां, 18,769 हिरासत और 9,590 डिपोर्टेशन हुए. पिछली अवधि के मुकाबले गिरफ्तारियां 436% और डिपोर्टेशन 1,103% बढ़े हैं. इनमें भारतीय और चीनी नागरिकों की संख्या सबसे ज्यादा है.
- जुलाई 2026 में ही करीब 1,950 एशियाई लोगों को गिरफ्तार किया गया, जो ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल में एक महीने का सबसे बड़ा आंकड़ा है. इससे भारतीय समुदाय में डर बढ़ा है.
- न्यूयॉर्क के क्वींस में लंबे समय से रेस्तरां चला रहे एक भारतीय कारोबारी के हवाले से दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट में कहा गया कि ट्रम्प समर्थक कुछ श्वेत समूह भारतीय रेस्तरां और कारोबारियों पर नजर रखते हैं और संदिग्ध प्रवासियों की जानकारी ICE तक पहुंचाते हैं.
- ऐसे में समुदाय की चिंता सिर्फ अवैध प्रवासियों को लेकर नहीं, बल्कि इस बात को लेकर भी है कि ICE की कार्रवाई का असर वैध दस्तावेज वाले भारतीयों, उनके परिवारों और कारोबार पर पड़ रहा है.
यानी इमिग्रेशन एनफोर्समेंट का असर सिर्फ बॉर्डर या अवैध प्रवास के सवाल तक सीमित नहीं दिख रहा. भारतीय और दूसरे दक्षिण एशियाई समुदाय के लोगों को यह चिंता सता रही है, कि इमिग्रेशन को लेकर ट्रम्प सरकार की बढ़ती सख्ती और राजनीतिक बयानबाजी का उन पर भविष्य में क्या असर होगा.
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ऑनलाइन एंटी-साउथ एशियन हेट में 109% वृद्धि
- Stop AAPI Hate की सितंबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी 2023 से दिसंबर 2025 के बीच ऑनलाइन एंटी-साउथ एशियन स्लर्स के इस्तेमाल में 109% की वृद्धि हुई.
- रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगस्त 2024 से दिसंबर 2025 के बीच ऑनलाइन दर्ज एंटी-एशियन हिंसा की धमकियों में 71% दक्षिण एशियाई समुदायों को निशाना बनाया गया.
- 2025 के एक सर्वे में 48% दक्षिण एशियाई वयस्कों ने बताया कि उन्होंने अपनी नस्ल, जातीयता या राष्ट्रीयता के कारण किसी हेट एक्ट का अनुभव किया. वहीं 55% ने कहा कि उन्होंने खुद या अपने समुदाय के किसी व्यक्ति पर बदलती इमिग्रेशन नीतियों या एंटी-इमिग्रेंट का असर देखा.
हालांकि ICE की कार्रवाई और एंटी-साउथ एशियन हेट दो अलग-अलग मुद्दे हैं, लेकिन इसको लेकर चल रही राजनीतिक बहस का असर पूरे समुदाय की सुरक्षा और सामाजिक स्थिति पर पड़ रहा है?
क्या भारतीयों को ‘इमिग्रेंट’ मानकर निशाना बनाया जा रहा?
- अमेरिका में रहने वाले भारतीयों में बड़ी संख्या अमेरिकी नागरिकों की है. वहीं कई लोग H-1B जैसे वर्क वीजा, ग्रीन कार्ड या दूसरे इमिग्रेशन स्टेटस पर रहते हैं. नतीजा इमिग्रेशन और विदेशी कामगारों को लेकर चल रही राजनीतिक बहस का असर पूरे भारतीय और दक्षिण एशियाई समुदाय पर पड़ रहा है.
- ट्रम्प प्रशासन ने H-1B वीजा पर भी सख्ती बढ़ाई है. नए H-1B आवेदनों पर 1 लाख डॉलर की फीस वाली व्यवस्था को सितंबर 2026 में एक साल और बढ़ाया गया. भारत के लोग H-1B वीजा के बड़े लाभार्थियों में हैं.
- यानी भारतीयों के लिए इमिग्रेशन का मुद्दा सिर्फ डिपोर्टेशन तक सीमित नहीं है. इसका सीधा असर नौकरी, वीजा और अमेरिका में भविष्य पर भी पड़ सकता है.
यानी इमिग्रेशन का मुद्दा सिर्फ ICE कार्रवाई या डिपोर्टेशन तक सीमित न होकर इन समुदाय के लोगों की नौकरी, वीजा और अमेरिका में भविष्य से जुड़ा हुआ है. और यही वजह है कि नवंबर के मिडटर्म चुनाव से पहले यह बहस राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण हो रही है.
ट्रम्प की इमिग्रेशन पॉलिसी पर बढ़ रहा दबाव
- मिडटर्म चुनाव से पहले ट्रम्प की इमिग्रेशन नीति को लेकर राजनीतिक दबाव बढ़ता दिख रहा है. ICE की बढ़ती कार्रवाई और दक्षिण एशियाई लोगों के खिलाफ हेट की रिपोर्टों ने इस मुद्दे को और संवेदनशील बना दिया है.
- 21 सितंबर के Reuters/Ipsos सर्वे में ट्रम्प की कुल अप्रूवल रेटिंग 32% रही. वहीं, सिर्फ 36% लोगों ने उनकी इमिग्रेशन नीति को मंजूरी दी. कांग्रेस चुनाव के लिए 43% लोगों ने डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों और 35% ने रिपब्लिकन उम्मीदवारों का समर्थन बताया.
- सर्वे 1,277 अमेरिकी वयस्कों पर किया गया था. ये आंकड़े चुनाव का नतीजा या भविष्यवाणी नहीं हैं, लेकिन यह जरूर दिखाते हैं कि इमिग्रेशन अब ट्रम्प के लिए सिर्फ नीतिगत मुद्दा नहीं, बल्कि राजनीतिक दबाव का भी विषय बन गया है.
- इमिग्रेशन को लेकर रिपब्लिकन पार्टी के अंदर भी मतभेद हैं. कुछ रिपब्लिकन नेता ट्रम्प की सख्त इमिग्रेशन कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं. फ्लोरिडा की रिपब्लिकन सांसद मारिया एलविरा सालाजार ने ट्रम्प की नीति पर चिंता जताई और कहा कि बहुत ज्यादा सख्ती से उन लैटिनो वोटरों से दूरी बढ़ सकती है, जिन्होंने 2024 में ट्रम्प का समर्थन किया था.
- यानी इमिग्रेशन सिर्फ डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकन के बीच बहस नहीं है. रिपब्लिकन पार्टी के अंदर भी इस नीति को लेकर सवाल उठ रहे हैं. इन तमाम बहसों के बीच भारतीय और दक्षिण एशियाई समुदाय के लिए सवाल सिर्फ यह नहीं है कि इमिग्रेशन नीति कितनी सख्त है, बल्कि यह भी है कि इन नीतियों और उनसे जुड़ी राजनीतिक बहस का असर समुदाय पर किस तरह पड़ रहा है.
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भारतीय समुदाय के लिए मिडटर्म चुनाव क्यों है अहम?
- भारतीय-अमेरिकी मतदाता संख्या में अपेक्षाकृत छोटा समूह हैं, लेकिन कई राज्यों और शहरी इलाकों में उनका आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव बढ़ा है. ऐसे में ICE कार्रवाई, H-1B वीजा, नस्लीय भेदभाव और हेट क्राइम जैसे मुद्दे समुदाय की राजनीतिक प्राथमिकताओं को प्रभावित कर सकते हैं.
- Stop AAPI Hate के आंकड़े बताते हैं कि दक्षिण एशियाई समुदाय के खिलाफ हेट और ICE कार्रवाई दोनों में बढ़ोतरी हुई है. संगठन के मुताबिक, ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल में दक्षिण एशियाई नागरिकों के ICE arrests, detentions और deportations एशियाई क्षेत्रीय समूहों में सबसे ज्यादा हैं और deportations पिछली प्रशासनिक अवधि की तुलना में लगभग 14 गुना अधिक हुई हैं.
- दरअसल, अमेरिका में मिडटर्म चुनाव से पहले इमिग्रेशन की बहस अब दो स्तरों पर चल रही है. एक तरफ ट्रम्प प्रशासन अवैध प्रवास और डिपोर्टेशन पर सख्त कार्रवाई को अपनी नीति का हिस्सा बनाए हुए है. दूसरी तरफ भारतीय और दक्षिण एशियाई समुदायों में यह चिंता बढ़ रही है कि इमिग्रेशन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी कहीं नस्लीय नफरत और भेदभाव को न बढ़ा दे.
