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आयी टेबुल के जैसी दिखनेवाली सोलर कार

तुम सबने सोलर कार के बारे में तो सुना ही होगा. यह कार सौर ऊर्जा से चलती है. इसमें और किसी भी तरह के ईंधन की कोई जरूरत नहीं होती है. बढ़ते ऊर्जा संकट और प्रदूषण को देखते हुए इस तरह की कारों को विश्व में बढ़ावा दिया जा रहा है. ईरान के काजविन आजाद […]

तुम सबने सोलर कार के बारे में तो सुना ही होगा. यह कार सौर ऊर्जा से चलती है. इसमें और किसी भी तरह के ईंधन की कोई जरूरत नहीं होती है. बढ़ते ऊर्जा संकट और प्रदूषण को देखते हुए इस तरह की कारों को विश्व में बढ़ावा दिया जा रहा है.

ईरान के काजविन आजाद इस्लामिक यूनिविर्सटी के स्टूडेंट्स ने एक अनोखी कार बनायी है, जिसका नाम ‘हवीन 2’ रखा गया है. इस कार का कुल वजन 220 किलोग्राम है. यह 4.5 मीटर लंबा, 1.8 मीटर चौड़ा, और 1.1 मीटर ऊंचा है. इसमें लिथियम आयन बैटरीज का इस्तेमाल किया गया है.

यह सोलर कार 150 किलोमीटर प्रतिघंटे की अधिकतम गति से दौड़ने में सक्षम है. एकबार चार्ज होने पर इस कार की बैटरी 4 घंटे तक अपनी पूरी ताकत से काम करती है.

इस कार की बैटरी को चार्ज करने के लिए इसके ऊपर लगभग 65 स्क्वायर फीट का एक सोलर पैनल लगाया गया है. इस सोलर पैनल की वजह से यह कार एक टेबुल के जैसी दिखती है. इस पैनल को हटाने के बाद ही समझ आता है कि यह एक कार है.

सोलर एनर्जी को प्रमोट करनेवाली यह कार पूरी दुनिया के कार उद्योग में क्र ांतिकारी बदलाव ला सकती है. इस कार को बनानेवाले स्टूडेंट्स चाहते हैं कि वे इस कार को अमेरिकन सोलर चैलेंज इवेंट में लेकर जायें और अन्य कारों को चुनौती पेश करें. अमेरिकन सोलर चैलेंज एक ऐसा इवेंट है, जिसमें दुनिया भर से लोग खुद से डिजाइन किये सोलर व्हीकल लेकर आते हैं. यहां इन व्हीकल्स की रेस होती है. ईरानी स्टूडेंट्स भी इस इवेंट में अपनी इस कार की मदद से इस रेस को जीतना चाहते हैं. इस कार को बनाने के बाद वहां के छात्रों में एक नया उत्साह देखा जा रहा है. इससे वहां दूसरे छात्रों को भी प्रेरणा मिलेगी. इसकी चर्चा दुनिया भर में हो रही है.

प्रस्तुति : पूजा कुमारी

अमेरिकन सोलर चैलेंज इवेंट

इस कार की टेस्टिंग भी इस इवेंट को ध्यान में रख कर ही की गयी है. इस प्रतियोगिता में भाग लेनेवाली टीमों को 516 फोटो वोल्टेइक पैनल्स या सोलर सेल्स का इस्तेमाल करना होता है, जिनका निर्माण अमेरिका में किया जाता है और उन्हें जर्मनी में एक- दूसरे से जोड़ा जाता है. मगर हर प्रतियोगी को अपना खुद का मैक्सिमम पावर प्वॉइंट ट्रेकिंग सिस्टम डेवलप करना होता है. इन्हें बैट्री चार्जर, इन्वर्टर या किसी दूसरे डिवाइस से जोड़कर कार को लगातार ऊर्जा उपब्ध करायी जाती है. यह रेस सुबह 9 बजे से लेकर शाम 6 बजे तक चलती है. इसमें प्रत्येक टीम में 4 ड्राइवर होते हैं. हवीन 2 अपनी टेस्टिंग के दौरान 110 किमी प्रति घंटे की स्पीड तक पहुंच पाया था. मगर इसके निर्माताओं का मानना है कि प्रतियोगिता के दौरान यह 160 किमी प्रति घंटे तक की स्पीड देने में सक्षम होगा.

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