Dumka: दुमका लोकसभा सीट का चुनावी विश्लेषण, जनता जर्नादन किसको पहनाएगी ताज?

dumka loksabha seat: दुमका लोकसभा सीट पर आदिवासी, अल्पसंख्यक और पिछड़े वर्ग के वोटरों का दबदबा है. इस सीट पर 40 फीसदी आदिवासी, 40 फीसदी पिछड़ी जातियां और 20 प्रतिशत मुस्लिम वोटर हैं. आदिवासी और अल्पसंख्यक वोटरों को झारखंड मुक्ति मोर्चा का परंपरागत वोटर माना जाता है.

दुमका लोकसभा सीट का विश्लेषण

Dumka loksabha seat: झारखंड की उपराजधानी कहे जाने वाले दुमका का सियासी पारा बढ़ा हुआ है. दुमका लोकसभा क्षेत्र में शिकारीपाड़ा,जामताड़ा, दुमका, नाला, सारठ और जामा विधानसभा सीटें शामिल हैं. 2024 के लोकसभा चुनाव में इस बार मुख्य मुकाबला सीबू सोरेन की बहु सीता सोरेन और जेएमएम के काफी करीबी और भरोसेमंद कहे जाने वाले नलिन सोरेन के बीच है. कल्पना सोरेन ने नारा दिया है हेमंत है तो हिम्मत है, इसके जरिए वह लोगों को एकजुट करने की कोशिश कर रही हैं. दुमका सीट के सियासी इतिहास की अगर बात करें तो 2019 के चुनाव में दुमका सीट का समीकरण बदला था. इस सीट पर भी मोदी इफैक्ट देखने को मिला था. बेहद हाइ प्रोफाइल माने जाना वाल यह सीट दुमका दिशोम शिबू सोरेन का गढ़ रहा है. 2019 में सुनिल सोरेन ने इस सीट से जीत दर्ज की थी. उससे पहले के 4 लोकसभा चुनाव में लगातार सीबू सोरेन ने ही दुमका की कमान संभाली थी. दुमका सीट 1952 से अस्तित्व में आया था. दुमका लोकसभा सीट पर पहली बार चुनाव साल 1957 में हुआ था. उस चुनाव में झारखंड पार्टी की देबी सोरेन ने इस सीट से जीत दर्ज की थी. इस साल भाजपा ने दुमका सीट से उस सांसद का टिकट काट दिया है जिसने पिछली बार पार्टी को दुमका से जीत दिलाई थी. आपको बता दें कि इस सीट पर झामुमो की इंट्री 1980 में हुई थी.

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By Neha Singh

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