प्रवासी श्रमिकों को अहमदाबाद से आना था चतरा, लेकिन ट्रेन से पहुंच गये छपरा, जानिए आखिर ऐसा क्यों हुआ ?

इटखोरी : परेशान व लाचार हो चुके बेबस मजदूर किसी तरह झारखंड के चतरा जिला स्थित अपने घर पहुंचना चाह रहे थे, लेकिन शनिवार को चतरा के एक दर्जन मजदूर अहमदाबाद से ट्रेन बैठ कर छपरा (बिहार)पहुंच गये. उसके बाद बस से गया होते हुए नेशनल हाइवे चौपारण तक पहुंचे. वहां से पैदल चल कर चतरा आये. मजदूरों ने कहा कि उन्हें छपरा की जगह चतरा सुनाई दिया, इसलिए अहमदाबाद से छपरा जानेवाली ट्रेन में बैठ गये. बाद में पता चला कि यह चतरा नहीं छपरा जायेगी. छपरा स्टेशन पर उतर कर सरकारी बस से चौपारण आये. उसके बाद पैदल चल कर चतरा जा रहे हैं.

इटखोरी : परेशान व लाचार हो चुके बेबस मजदूर किसी तरह झारखंड के चतरा जिला स्थित अपने घर पहुंचना चाह रहे थे, लेकिन शनिवार को चतरा के एक दर्जन मजदूर अहमदाबाद से ट्रेन बैठ कर छपरा (बिहार)पहुंच गये. उसके बाद बस से गया होते हुए नेशनल हाइवे चौपारण तक पहुंचे. वहां से पैदल चल कर चतरा आये. मजदूरों ने कहा कि उन्हें छपरा की जगह चतरा सुनाई दिया, इसलिए अहमदाबाद से छपरा जानेवाली ट्रेन में बैठ गये. बाद में पता चला कि यह चतरा नहीं छपरा जायेगी. छपरा स्टेशन पर उतर कर सरकारी बस से चौपारण आये. उसके बाद पैदल चल कर चतरा जा रहे हैं.

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मुंबई से पार्सल वैन में बैठ कर आये आठ लोग

मुंबई से आठ लोग एक पार्सल वैन में बैठ कर इटखोरी आये. उन्होंने बताया कि ट्रेन का इंतजार करते तो तीन माह में भी घर नहीं पहुंचते. वहां रहते तो भूखे मरने की नौबत आ जाती. लिहाजा पार्सल वैन में बैठकर घर आ गये.

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प्रवासी मजदूरों ने दिया 700 रुपये किराया

प्रवासी मजदूरों ने दावा किया है कि ट्रेन में सात सौ रुपये किराया लिया गया है. तुलबल निवासी फणींद्र सिंह व महेंद्र पासवान ने कहा कि मजदूर बहुत परेशान हैं. लोग किसी तरह घर आना चाह रहे हैं. कंपनी बंद होने के कारण सभी बेरोजगार हो गये हैं. बैठ कर कितने दिन तक खायेंगे.

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Author: Panchayatnama

Published by: Prabhat Khabar

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