मुख्य बातें
Shardiya Navratri 2023 day 1 maa shailputri puja LIVE Updates: शारदीय नवरात्रि आज से शुरू हो गई जो 24 अक्टूबर को समाप्त होगी. शारदीय नवरात्रि त्योहार मनाने के लिए यहां पढ़ें संपूर्ण जानकारी
Shardiya Navratri 2023 day 1 maa shailputri puja LIVE Updates: शारदीय नवरात्रि आज से शुरू हो गई जो 24 अक्टूबर को समाप्त होगी. शारदीय नवरात्रि त्योहार मनाने के लिए यहां पढ़ें संपूर्ण जानकारी

मंत्र : ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥
प्रार्थना
वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥
स्तुति
या देवी सर्वभूतेषु माँ शैलपुत्री रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
घटस्थापना मंत्र कलशस्य मुखे विष्णु: कण्ठे रुद्र: समाश्रित: मूले त्वस्य स्थितो ब्रह्मा मध्य मातृगणा: स्मृता:
प्रतिपदा तिथि के दिन घट स्थापना यानी कलश स्थापना अभिजीत मुहूर्त में ही करना चाहिए. आज अभिजीत मुहूर्त प्रातः 11:38 मिनट से दोपहर 12:23 मिनट तक है. इस मुहूर्त में घट स्थापना करें. साथ ही इसी मुहूर्त में आप मां शैलपुत्री की पूजा भी कर सकते हैं.
Shardiya Navratri तिथि
16 को द्वितीया
17 को तृतीया
18 को चतुर्थी
19 को पंचमी
20 को षष्ठी
21 को महासप्तमी
22 को महाअष्टमी
23 को महानवमी
24 को विजयादशमी है
15 को शैलपुत्री
16 को ब्रह्मचारिणी
17 को चंद्रघंटा
18 को कुष्मांडा
19 को स्कंदमाता
20 को कात्यायनी
21 कालरात्रि
22 को महागौरी
23 को मां सिद्धिदात्री की पूजा होगी
प्रतिपदा तिथि प्रारंभ 14 अक्टूबर 2023 – रात्रि 11:24 बजे तक
प्रतोपदा तिथि समाप्त 16 अक्टूबर 2023 – 12:32 पूर्वाह्न
चित्रा नक्षत्र आरंभ 14 अक्टूबर 2023 – 04:24 अपराह्न
विहित नक्षत्र समाप्त 15 अक्टूबर 2023 – 06:13 अपराह्न
वैधृति योग प्रारम्भ 14 अक्टूबर 2023 – प्रातः 10:25 बजे
वैधृति योग समाप्त 15 अक्टूबर 2023 – प्रातः 10:25 बजे
घटस्थापना मुहूर्त 15 अक्टूबर 2023 – 05:41 पूर्वाह्न
घटस्थापना अभिजीत मुहूर्त 15 अक्टूबर 2023 – सुबह 11:09 बजे से 11:56 बजे तक
कलश स्थापना के बाद मां शैलपुत्री को धूप, दीप दिखाकर अक्षत, सफेद फूल, सिंदूर, फल अर्पित करें
शैलपुत्री मां के मंत्र का उच्चारण करें और कथा पढ़ें. भोग में आप जो भी दूध, घी से बनी चीजें लाएं हैं वो चढ़ाएं.
फिर हाथ जोड़कर माता की आरती उतारें.
आखिर में अनजाने में हुई गलतियों की माफी मांगे और हमेशा आशीर्वाद बनाए रखने की माता रानी से प्रार्थना करें.
पहले दिन सुबह उठकर स्नान आदि करके साफ वस्त्र पहनें.
फिर मंदिर की साफ-सफाई करके गंगाजल से शुद्ध करें
इसके बाद लाल कपड़ा बिछाकर उस पर थोड़े चावल रखें. मिट्टी के एक पात्र में जौ बो दें.
जल से भरा हुआ कलश स्थापित करें. कलश में चारों ओर आम या अशोक के पत्ते लगाएं और स्वास्तिक बनाएं.
कलश में साबुत सुपारी, सिक्का और अक्षत डालें.
एक नारियल पर चुनरी लपेटकर कलावा से बांधें और इस नारियल को कलश के ऊपर पर रखते हुए मां जगदंबे की सच्चे मन से आह्वान करें
फिर दीप जलाकर कलश की पूजा करें.
प्रतिपदा तिथि के दिन घट स्थापना यानी कलश स्थापना अभिजीत मुहूर्त में ही करना चाहिए. आज अभिजीत मुहूर्त प्रातः 11:38 मिनट से दोपहर 12:23 मिनट तक है. इस मुहूर्त में घट स्थापना करें. साथ ही इसी मुहूर्त में आप मां शैलपुत्री की पूजा भी कर सकते हैं.
नवरात्र के पहले दिन कलश स्थापना की जाती है और मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की अराधना की जाती है. मां शैलपुत्री हिमालय राज की पुत्री हैं. पर्वतराज हिमालय के यहां जन्म लेने कारण ये देवी शैलपुत्री नाम से विख्यात हुईं.
हिंदुओं के बीच नवरात्रि का बहुत महत्व है। नवरात्रि के दिन सबसे शुभ दिन माने जाते हैं. ये दिन मां दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों की पूजा करने के लिए मनाए जाते हैं, जिन्हें ऊर्जा का स्रोत माना जाता है. आमतौर पर नवरात्रि सितंबर या अक्टूबर के महीने में आती है जिसे शारदीय नवरात्रि के नाम से जाना जाता है. इस वर्ष शारदीय नवरात्रि कल आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होने जा रही है जो कि 15 अक्टूबर 2023 को है और इसका समापन 24 अक्टूबर 2023 को दुर्गा विसर्जन और दशहरा के साथ होगा.
नवरात्र में तीन प्रकार की पूजा होती है
1. पंडाल लगाकर मिट्टी की मूर्ति की स्थापना होती है और उस मूर्ति को विसर्जित कर दिया जाता है
2. देवी मन्दिरों में जहाँ मूर्ति स्थायी रूप से अनेक वर्षों से स्थापित हैं और सालों भर वहाँ पूजा होती है
3. अपने घरों में फोटो रखकर कलश स्थापित कर
इन तीनों प्रकार की पूजा में विधि-विधान में अंतर है.खासकर स्थायी मन्दिर की पूजा तथा पंडाल की पूजा में बहुत अंतर है. पंडाल वाली पूजा में कलश स्थापित होने के दिन से षष्टी तिथि तक देवी की मूर्ति का दर्शन नहीं करना चाहिए अतः आगे से परदा लगा दिया जाना चाहिए.
कलश स्थापना की पूजा के समय अखंड दीप जलाना चाहिए और फिर धूप और अगरबत्ती से उनकी पूजा करनी चाहिए. नवरात्रि पर पूरे नौ दिनों तक देवी की पूजा का ये क्रम अनवरत चलना चाहिए. ऐसी मान्यता है कि इसके देवी प्रसन्न होती है और भक्तों की मनोवांछित फल की कामना को पूर्ण करती हैं.
नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना या कलश स्थापना करने का विधान है. इस बार 15 अक्टूबर को रात्रि 11 बजकर 52 मिनट पर प्रतिपदा तिथि की शुरुआत हो रही है. इसके साथ ही शाम 06 बजकर 43 मिनट पर चित्रा नक्षत्र भी है. पंचांग के अनुसार, आश्विन शुक्ल पक्ष के प्रतिपदा तिथि यानी 15 अक्टूबर को सुबह 11 बजकर 38 मिनट से दोपहर 12 बजकर 23 मिनट तक कलश स्थापना का अभिजीत मुहूर्त रहेगा.
इस बार शारदीय नवरात्रि 15 अक्टूबर दिन रविवार से शुरू हो रही है. नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना या कलश स्थापना करने का विधान है
15 अक्टूबर 2023: नवरात्रि का पहला दिन( मां शैलपुत्री की पूजा)
16 अक्टूबर 2023: नवरात्रि का दूसरा दिन( मां ब्रह्मचारिणी की पूजा)
17 अक्टूबर 2023: नवरात्रि का तीसरा दिन( मां चंद्रघंटा की पूजा)
18 अक्टूबर 2023: नवरात्रि का चौथा दिन( मां कूष्मांडा की पूजा)
19 अक्टूबर 2023: नवरात्रि का पांचवां दिन( मां स्कंदमाता की पूजा)
20 अक्टूबर 2023: नवरात्रि का छठा दिन( मां कात्यायनी की पूजा)
21 अक्टूबर 2023: नवरात्रि का सातवां दिन( मां कालरात्रि की पूजा)
22 अक्टूबर 2023: नवरात्रि का आठवां दिन( मां सिद्धिदात्री की पूजा)
23 अक्टूबर 2023: नवरात्रि का नौवां दिन( मां महागौरी की पूजा)
24 अक्टूबर 2023: दशमी तिथी(दशहरा)
प्रतिपदा : गाय का घी
द्वितीया: शक्कर
तृतीया : दूध
चतुर्थी : मालपुआ
पंचमी : केला
षष्ठी: शहद
महासप्तमी : गुड़
महाअष्टमी: नारियल
महानवमी : चना और हलवा
विजयादशमी : चुड़ा, गुड़, दही, मिठाई
दुर्गा पूजा के दौरान हर दिन 13 अध्याय का पाठ करें. यदि संपूर्ण 13 अध्याय एक दिन में नहीं कर सकते हैं, तो सात दिनों में यह पाठ कर सकते हैं. पहले दिन प्रथम अध्याय, दूसरे दिन द्वितीय-तृतीय, तीसरे दिन चतुर्थ अध्याय, चौथे दिन पंचम से अष्टम अध्याय, पांचवें दिन नवम-दशम अध्याय, छठे दिन एकदश अध्याय, सातवें दिन द्वादश एवं त्रयोदश, आठवें और नौवें दिन सिर्फ सिद्ध कुंजिका स्त्रोत का पाठ करें. साथ ही प्रतिदिन रूद्राक्ष की माला से माता रानी के मंत्र अथवा उनके नाम का जप करें.
ज्योतिषाचार्य ने बताया कि नवरात्रि के पहले दिन के आधार पर मां दुर्गा की सवारी के बारे में पता चलता है. नवरात्रि में माता की सवारी का विशेष महत्व होता है. माता हाथी पर सवार होकर धरती पर आ रही हैं. हाथी पर माता का आगमन इस बात की ओर संकेत कर रहा है कि इस साल खूब अच्छी वर्षा होगी और खेती अच्छी होगी. देश में अन्न धन का भंडार बढ़ेगा.
Shardiya Navratri 2023 day 1 maa shailputri puja LIVE Updates: शारदीय नवरात्रि आज से शुरू हो गई जो 24 अक्टूबर को समाप्त होगी. शारदीय नवरात्रि त्योहार मनाने के लिए यहां पढ़ें संपूर्ण जानकारी