Deoghar: रावण के मुष्टि-प्रहार से हुई शिवगंगा की उत्पत्ति, डुबकी लगाने से मिलती है रोगों से मुक्ति

ऐसी मान्यता है कि रावण ने मुष्टि-प्रहार कर पाताल से गंगा को यहां अवतरित किया था. सावन महीने में बाबा पर जल चढ़ाने के लिए जब कांवरिये सुल्तानगंज से गंगा जल लेकर देवघर आते हैं, तो सबसे पहले शिवगंगा में ही स्नान करते हैं और फिर उसके उपरांत संकल्प कर ही बैद्यनाथ मंदिर में जल चढ़ाते हैं.

श्रावण महीने में देवघर के बैद्यनाथ मंदिर में जलार्पण करना सबसे पुण्य माना जाता है. जब देवघर में बाबा का दर्शन करने आते हैं, तो शिवगंगा में डुबकी लगाना बिल्कुल भी न भूलें. ऐसा इसलिए क्योंकि ऐसी मान्यता है कि यहां डुबकी लगाने से सभी रोगों से मुक्ति मिल जाती है. शिवगंगा का अपना इतिहास है. ऐसी मान्यता है कि रावण ने मुष्टि-प्रहार कर पाताल से गंगा को यहां अवतरित किया था. सावन महीने में बाबा पर जल चढ़ाने के लिए जब कांवरिये सुल्तानगंज से गंगा जल लेकर देवघर आते हैं, तो सबसे पहले शिवगंगा में ही स्नान करते हैं और फिर उसके उपरांत संकल्प कर ही बैद्यनाथ मंदिर में जल चढ़ाते हैं.

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Published by: Arbindkumar mishra

मुख्यधारा की पत्रकारिता में 14 वर्षों से ज्यादा का अनुभव. खेल जगत में मेरी रुचि है. वैसे, मैं राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय खबरों पर काम करता हूं. झारखंड की संस्कृति में भी मेरी गहरी रुचि है. मैं पिछले 14 वर्षों से प्रभातखबर.कॉम के लिए काम कर रहा हूं. इस दौरान मुझे डिजिटल मीडिया में काम करने का काफी अनुभव प्राप्त हुआ है. फिलहाल मैं बतौर शिफ्ट इंचार्ज कार्यरत हूं.
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