संदेशखाली हिंसा पर ममता बनर्जी के बाद अभिषेक बनर्जी ने भी तोड़ी चुप्पी, कहा- शेख शाहजहां को नहीं बचा रही टीएमसी

संदेशखाली हिंसा पर ममता बनर्जी के बाद अब अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने भी चुप्पी तोड़ी है. उन्होंने कहा है कि उनकी पार्टी टीएमसी शेख शाहजहां को नहीं बचा रही है.

संदेशखाली हिंसा पर ममता बनर्जी के बाद अब अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने भी चुप्पी तोड़ी है. उन्होंने कहा है कि उनकी पार्टी टीएमसी शेख शाहजहां को नहीं बचा रही है.

तृणमूल नेता शेख शाहजहां का नहीं मिल रहा सुराग

उत्तर 24 परगना के संदेशखाली में इडी अफसरों पर हमले की घटना के बाद से ही तृणमूल नेता शेख शाहजहां का कोई सुराग नहीं मिल रहा है. पिछले महीने बैंकशाल अदालत स्थित स्पेशल प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) कोर्ट में शाहजहां की ओर से अग्रिम जमानत के लिए एक याचिका दायर की गयी थी, जिसे गत शुक्रवार को खारिज कर दिया गया.

संदेशखाली में शेख शाहजहां को गिरफ्तार करने की मांग तेज

इधर, शाहजहां की गिरफ्तारी की मांग पर संदेशखाली के स्थानीय लोगों की लगातार मांग उठ रही है. इधर, इस मामले को लेकर भाजपा व अन्य विपक्षी पार्टियां सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस की लगातार आलोचना कर रही हैं. इसी बीच. रविवार को दक्षिण 24 परगना के महेशतला में एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बातचीत में सांसद व तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने संदेशखाली के मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी.

…तो शेख शाहजहां की क्या हैसियत है : अभिषेक बनर्जी

अभिषेक बनर्जी ने दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस फरार नेता शेख शाहजहां को नहीं बचा रही है. यदि तृणमूल पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी व पूर्व मंत्री ज्योतिप्रिय मल्लिक पर पार्टी स्तर पर कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटती, तब शेख शाहजहां जैसे शख्स की क्या हैसियत है. उन्होंने आरोप लगाया कि शेख शाहजहां के अभी तक गिरफ्तार नहीं होने का कारणों में से एक न्याय प्रणाली भी है. पुलिस व प्रशासन के हाथ बांधे क्यों गये हैं.

अभिषेक बनर्जी बोले- पुलिस को दो महीने का समय दें

तृणमूल में ममता बनर्जी के बाद दूसरे सबसे बड़े नेता अभिषेक बनर्जी ने दावा किया कि शाहजहां की गिरफ्तारी के लिए पुलिस को वक्त दें. पुलिस को दो महीनों का वक्त दें. यदि सारधा चिटफंड घोटाले मामले की जांच में राज्य की पुलिस कश्मीर से आरोपी को गिरफ्तार कर यहां ला सकती है, तब शाहजहां को क्या गिरफ्तार नहीं कर पायेगी? केंद्रीय जांच एजेंसियों की तफ्तीश को लेकर भी सांसद बनर्जी ने सवाल उठाते हुए कहा कि सारधा चिटफंड मामले की जांच केंद्रीय जांच एजेंसी कर रही है, लेकिन क्या अभी तक उसका ट्रायल शुरू हो पाया है?

संदेशखाली का माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहा विपक्ष

इधर, भाजपा की आलोचना करते हुए कहा कि नारद स्टिंग ऑपरेशन का खुलासा करने वाली भाजपा के खेमे में अभी एक ऐसे नेता भी शामिल हैं, जिस पर भगवा दल ने आरोप लगाया था. अभी वैसे ही नेता संदेशखाली की बात कर रहे हैं. बनर्जी ने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों के नेतागण संदेशखाली के माहौल को बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं.

यूपी, एमपी, गुजरात, असम, मणिपुर क्यों नहीं गई फैक्ट फाइंडिंग टीम : कुणाल घोष

इस मामले पर तृणमूल के प्रदेश महासचिव व प्रवक्ता कुणाल घोष ने कहा कि उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, असम और मणिपुर में यह फैक्ट फाइंडिंग टीम कहां थी. ये भाजपा के कैडर हैं और उससे नियंत्रित हैं. वे केवल तृणमूल सरकार को बदनाम करने के लिए यहां आ रहे हैं. भाजपा को बंगाल की जनता पर भरोसा नहीं हैं और न ही उनका उनसे कोई संबंध हैं.

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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