WATCH: स्पेसएक्स का सबसे बड़ा स्टारशिप हिंद महासागर में धमाके के साथ खत्म, लेकिन एलन मस्क के मिशन के लिए क्यों माना जा रहा बड़ा कदम?

स्पेसएक्स का विशाल स्टारशिप टेस्ट फ्लाइट के बाद हिंद महासागर में धमाके के साथ खत्म हुआ, लेकिन इस मिशन ने मून और मंगल मिशन के लिए कई अहम तकनीकी सफलताएं दर्ज की हैं.

एलन मस्क की स्पेस कंपनी स्पेसएक्स ने एक बार फिर दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है. कंपनी का विशाल स्टारशिप रॉकेट सफलतापूर्वक अंतरिक्ष तक पहुंचा, पृथ्वी के वातावरण में वापस लौटा और फिर हिंद महासागर में तय जगह पर उतरने की कोशिश के दौरान जोरदार धमाके के साथ खत्म हो गया. हालांकि यह दृश्य बेहद नाटकीय था, लेकिन स्पेसएक्स और अंतरिक्ष विशेषज्ञ इसे असफलता नहीं बल्कि भविष्य के मंगल और चंद्र मिशनों की दिशा में अहम प्रगति मान रहे हैं.

टेक्सास से उड़ान, फिर अंतरिक्ष का लंबा सफर

स्पेसएक्स ने अपने स्टारबेस लॉन्च साइट, टेक्सास से स्टारशिप को सुपर हेवी बूस्टर के साथ लॉन्च किया. यह अब तक का सबसे शक्तिशाली रॉकेट सिस्टम माना जाता है. लॉन्च के बाद बूस्टर अलग हो गया और स्टारशिप पृथ्वी की कक्षा के बाहर लंबी दूरी तक यात्रा करता हुआ हिंद महासागर की ओर बढ़ा.

करीब एक घंटे की इस टेस्ट फ्लाइट के दौरान इंजीनियरों की नजर खासतौर पर रॉकेट की री-एंट्री क्षमता, हीट शील्ड और लैंडिंग सिस्टम पर थी. यह वही तकनीक है जो भविष्य में इंसानों को चंद्रमा और मंगल तक पहुंचाने में इस्तेमाल हो सकती है.

समुद्र में उतरते वक्त हुआ बड़ा धमाका

पृथ्वी के वातावरण में वापस प्रवेश करते समय स्टारशिप ने तेज गर्मी और अत्यधिक दबाव का सामना किया. इसके बाद रॉकेट ने अपनी स्पीड कम करने के लिए लैंडिंग बर्न शुरू किया और समुद्र के ऊपर लैंडिंग पोजिशन में आने की कोशिश की.

लेकिन अंतिम सेकंड्स में स्टारशिप काफी तेज गति से पानी से टकरा गया. टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि हिंद महासागर की सतह पर बड़ा विस्फोट दिखाई दिया. हालांकि खास बात यह रही कि रॉकेट ठीक उसी निर्धारित क्षेत्र में गिरा जहां स्पेसएक्स की टीम ने पहले से लक्ष्य तय किया था.

क्यों अहम है यह टेस्ट फ्लाइट?

स्पेसएक्स लगातार तेज गति से टेस्ट लॉन्च कर रहा है ताकि हर उड़ान से डेटा जुटाकर सिस्टम को बेहतर बनाया जा सके. इस मिशन में कंपनी को रॉकेट की उड़ान, वातावरण में वापसी और लैंडिंग के दौरान महत्वपूर्ण तकनीकी जानकारी मिली है.

विशेषज्ञों का मानना है कि स्टारशिप की सबसे बड़ी चुनौती सुरक्षित री-एंट्री और लैंडिंग है. इस बार कंपनी ने रॉकेट को हजारों किलोमीटर दूर सटीक लोकेशन तक पहुंचाकर यह दिखाया कि उसका कंट्रोल सिस्टम पहले से कहीं ज्यादा एडवांस हो चुका है.

नासा के मून मिशन में भी होगा इस्तेमाल

स्टारशिप सिर्फ स्पेसएक्स का निजी प्रोजेक्ट नहीं है. अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा भी अपने आने वाले आर्टेमिस मिशन में इसी तकनीक के संशोधित वर्जन का इस्तेमाल करना चाहती है. इसके जरिए इंसानों को दोबारा चंद्रमा पर भेजने की तैयारी चल रही है.

एलन मस्क का अंतिम लक्ष्य मंगल ग्रह पर मानव बस्ती बसाने का है और स्टारशिप उसी महत्वाकांक्षी योजना का सबसे अहम हिस्सा माना जा रहा है.

हर विस्फोट के पीछे छिपी है नई तैयारी

स्पेसएक्स का तरीका पारंपरिक अंतरिक्ष एजेंसियों से अलग रहा है. कंपनी बार-बार टेस्ट करती है, गलतियों से सीखती है और फिर तेजी से अगला संस्करण तैयार करती है. यही वजह है कि भले ही स्टारशिप समुद्र में धमाके के साथ खत्म हुआ हो, लेकिन इस मिशन को भविष्य की अंतरिक्ष यात्रा के लिए एक मजबूत कदम माना जा रहा है.

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Published by: Rajeev Kumar

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