फरवरी का महीना अभी खत्म भी नहीं हुआ और गर्मियों की शुरुआत होने लगी है. ऐसे में अगर आप भी आने वाली गर्मी से बचने के लिए एसी खरीदने का प्लान बना रहे हैं, तो कुछ बातें जानना बेहद जरूरी हैं. एसी खरीदते समय यह समझना जरूरी है कि यह कितनी बिजली खपत करता है, उतना ही जरूरी जितना कि यह कमरा कितनी अच्छी तरह ठंडा करेगा. यही वजह है कि इन्वर्टर और नॉन-इन्वर्टर एसी की बहस अक्सर सामने आती है. तो आइए जानते हैं कि रोजमर्रा के इस्तेमाल में ये दोनों एसी कैसे काम करते हैं, इसका आपके बिजली बिल पर क्या असर पड़ता है और आपके घर के लिए कौन सा ऑप्शन बेहतर रहेगा.
इन्वर्टर एसी (Inverter AC) क्या होते हैं?
इन्वर्टर एसी ऐसे एयर कंडीशनर होते हैं जिनमें वेरिएबल स्पीड कंप्रेसर होता है. आसान शब्दों में कहें तो ये कमरे के टेम्परेचर के हिसाब से अपनी स्पीड एडजस्ट करता है. मतलब ये कि ये बार-बार ऑन और ऑफ नहीं होते. जब कमरा बहुत गरम होता है, तो ये तेजी से काम करता है और जैसे ही कमरा ठंडा होने लगता है, इसकी स्पीड धीरे हो जाती है.
इस तरह से ये लगातार समान तापमान बनाए रखते हैं. इससे अचानक ठंडा या गरम होने का झटका नहीं लगता. चूंकि कंप्रेसर बार-बार रीस्टार्ट नहीं होता, इसलिए ये बिजली भी कम खपत करते हैं और शोर भी कम करते हैं. ये उन घरों के लिए बढ़िया होते हैं जहां एसी लंबे समय तक चलती है. इन्वर्टर एसी आराम और एनर्जी एफिशिएंसी दोनों देते हैं.
नॉन-इनवर्टर एसी (Non-Inverter AC) क्या होते हैं?
नॉन-इनवर्टर एसी वही ट्रेडिशनल एसी होते हैं जिनमें कंप्रेसर एक ही स्पीड पर चलता है. ये कंप्रेसर तब तक पूरी ताकत से चलता है जब तक कि सेट की हुई टेम्परेचर तक पहुंच न जाए. सेट की गई टेम्परेचर पर पहुंचने के बाद ये पूरी तरह बंद हो जाता है. जैसे ही कमरे का टेम्परेचर फिर से बढ़ता है, कंप्रेसर फिर से चालू हो जाता है. यही ऑन-ऑफ वाला साइकिल बिजली ज्यादा खर्च करता है और कमरे के टेम्परेचर में उतार-चढ़ाव दिखाता है.
नॉन-इनवर्टर एसी की कीमत आमतौर पर कम होती है. इनकी तकनीक भी सिंपल होती है, इसलिए ये बजट या शुरुआती लेवल के एसी में ज्यादातर देखे जाते हैं. ये कमरे को अच्छी तरह ठंडा करते हैं, लेकिन लंबे समय तक इस्तेमाल करने पर ये इन्वर्टर एसी की तरह एनर्जी-सेविंग नहीं होते.
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