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West Bengal : बांकुड़ा के केंजाकुड़ा में लग गया मुड़ी मेला, उमड़ रही भीड़

मेले में नदी के दोनों किनारों की ओर आबाद 40-50 गांवों से अनेक लोग आये. सर्दी के घने कोहरे में भी सुबह से ही बच्चों से लेकर बड़े-बुजुर्ग तक मेले में आये और रेतीले तट पर बैठ कर आनंद उठाया.

बांकुड़ा, प्रणव वैरागी : पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा जिले का मुड़ी मेला (Mudhi Mela) शुरू हो गया. इसमें दूर-दराज से झालमुड़ी व अन्य चटपटी चीजें खाने के शौकीन लोग बड़ी संख्या में आकर लुत्फ उठाते हैं. बांकुड़ा सदर थाना क्षेत्र के केंजाकुड़ा इलाके में द्वारकेश्वर नदी के मुहाने पर मुड़ी मेला लगता है. इसमें दिनभर मुड़ी के साथ चॉप, समोसा व चाट के स्टॉल लगे रहते हैं, जिन पर आगंतुकों की भीड़ देखने लायक होती है. शुक्रवार को मेले में काफी भीड़ रही. हाल में इस ग्रामीण मेला के प्रति शहरवासियों का भी रुझान बढ़ा है. केंजाकुड़ा में द्वारकेश्वर नदी के तट पर मुड़ी मेला लगभग 200 वर्षों से लग रहा है.

मेले में पहुंचे 50 गांवों से  लोग

बांकुड़ा सदर थाना क्षेत्र में केंजाकुड़ा गांव के पास द्वारकेश्वर नदी के किनारे संजीवनी आश्रम घाट पर मुड़ी मेला लग गया है. शुक्रवार को मेले में नदी के दोनों किनारों की ओर आबाद 40-50 गांवों से अनेक लोग आये. सर्दी के घने कोहरे में भी सुबह से ही बच्चों से लेकर बड़े-बुजुर्ग तक मेले में आये और रेतीले तट पर बैठ कर आनंद उठाया. केंजाकुड़ी के निवासी विद्युत कर्मकार, दिलीप चंद ने बताया कि वे लोग काम के सिलसिले में बाहर रहते हैं. लेकिन मेले के आकर्षण के चलते बच्चों के साथ यहां आये हैं.

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गमछे में मुड़ी लेकर सुनने आते थे हरिनाम संकीर्तन

मेले के दौरान संजीवनी माता के आश्रम में 24 घंटाव्यापी हरिनाम संकीर्तन होता है. कभी केंजाकुड़ा का यह पूरा क्षेत्र घने जंगल से आच्छादित था. इलाके के लोग गमछे में मुड़ी लेकर हरिनाम संकीर्तन सुनने आते थे. मेले के अंतिम दिन द्वारकेश्वर नदी के तट पर खिचड़ी का भोग बांटा जाता है. मेला में घुघनी, चनाचूर, मिर्च, ककड़ी, मूली, प्याज, टमाटर, धनिया, नारियल, बादाम व अन्य सामग्री से मिश्रित मुड़ी जो खाता है, वो यह स्वाद भूल नहीं पाता. यहां द्वारकेश्वर नदी के तट की नरम रेत को हाथ से हटा कर कुछ लोगों को पानी निकाल कर पीते हुए भी देखा जा सकता है.

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