खास बातें
West Bengal Cabinet Expansion: पश्चिम बंगाल की राजनीति में सोमवार को एक नया और स्वर्णिम अध्याय जुड़ा. कोलकाता के लोक भवन में आयोजित एक भव्य और गरिमामय समारोह में राज्यपाल आरएन रवि ने 35 भाजपा विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलायी. शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली इस सरकार का यह पहला और सबसे बड़ा ‘मेगा कैबिनेट विस्तार’ है.
बंगाल में मंत्रियों की संख्या हुई 44
इस विस्तार के साथ ही मंत्रिपरिषद में सदस्यों की कुल संख्या 41 हो गयी है. यह राज्य में मंत्रियों की अधिकतम सीमा 44 से महज 3 कम है. नयी टीम में नामचीन डॉक्टरों, प्रोफेसरों और दिग्गज बुद्धिजीवियों को जगह मिली है, तो जमीन से जुड़ीं पूर्व घरेलू सहायिका कलिता माझी और टीम इंडिया के पूर्व तेज गेंदबाज अशोक डिंडा को भी मंत्री बनाकर भाजपा ने बड़ा सामाजिक संदेश दिया है.
मंत्रिमंडल का पूरा गणित : कैबिनेट से राज्य मंत्री तक की सूची
लोक भवन के इस ऐतिहासिक आयोजन में मंत्रियों को 3 श्रेणियों में शपथ दिलायी गयी.
- कैबिनेट मंत्री (13 विधायक): स्वपन दासगुप्ता, तापस रॉय, शंकर घोष, जगन्नाथ चट्टोपाध्याय, डॉ शारद्वत मुखर्जी और प्रो कल्याण चक्रवर्ती जैसे कद्दावर चेहरों को कैबिनेट रैंक दी गयी है.
- राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार (3 विधायक): डॉ इंद्रनील खां, राजेश महता और मालती रावा रॉय को स्वतंत्र प्रभार का जिम्मा मिला है.
- राज्य मंत्री (19 विधायक): कलिता माझी, अशोक डिंडा, जोयेल मुर्मू, आनंदमय बर्मन, कौशिक चौधरी, गार्गी दास घोष, भास्कर भट्टाचार्य, दिबाकर घरामी, सुमन सरकार, शांतनु प्रमाणिक, पूर्णिमा चक्रवर्ती, उमेश राय, दीपक बर्मन, मनोज कुमार उरांव, विशाल लामा और बिराज विश्वास सहित अन्य कनिष्ठ मंत्रियों ने शपथ ली.
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उत्तर बंगाल को ममता राज के सौतेले व्यवहार से मुक्ति
बंगाल चुनाव 2026 में भाजपा को एकतरफा जीत दिलाने वाले उत्तर बंगाल क्षेत्र से इस बार 9 मंत्रियों को शामिल किया गया है. सोमवार को अकेले इस क्षेत्र से शंकर घोष (सिलीगुड़ी), दीपक बर्मन (फालाकाटा) और मनोज कुमार उरांव (कुमारग्राम) सहित कुल 8 नये चेहरों को सरकार में शामिल किया गया.
ममता राज में सिर्फ 8 मंत्री थे उत्तर बंगाल के
ममता बनर्जी के पिछले कार्यकाल में 43 मंत्रियों में से केवल 8 उत्तर बंगाल से थे. इसकी वजह से इस क्षेत्र में हमेशा प्रशासनिक उपेक्षा और विकास की कमी की शिकायतें रहतीं थीं. शुभेंदु अधिकारी ने सरकार बनते ही उत्तर बंगाल को उसका असली हक देकर तृणमूल के शहरी और दक्षिण बंगाल केंद्रित राजनीति के घमंड को पूरी तरह तोड़ दिया है.
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West Bengal Cabinet Expansion: जातीय और सामाजिक न्याय
विस्तारित मंत्रिमंडल में 14 मंत्री विभिन्न जातीय समूहों का प्रतिनिधित्व करते हैं. सोमवार को 11 एससी-एसटी विधायकों ने शपथ ली, जिससे कैबिनेट में नीशीथ प्रमाणिक, अशोक कीर्तनिया, खुदीराम टुडू समेत एससी-एसटी मंत्रियों की कुल संख्या अब 5 हो गयी है. यह बंगाल के इतिहास में शोषितों को अब तक की सबसे बड़ी भागीदारी है.
बौद्धिक वर्ग और आधी आबादी का अनूठा संगम
शुभेंदु अधिकारी की नयी टीम में भद्रलोक और भद्रमहिला के सम्मान का पूरा ख्याल रखा गया है.
- बिधाननगर से चुनाव जीतने वाले मशहूर कैंसर विशेषज्ञ (ऑन्कोलॉजिस्ट) डॉ शारद्वत मुखर्जी और खड़दह के प्रोफेसर कल्याण चक्रवर्ती को कैबिनेट में लाकर शिक्षा और स्वास्थ्य को नयी दिशा देने की कोशिश की गयी है. बेहाला पश्चिम के युवा ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ इंद्रनील खां को स्वतंत्र प्रभार दिया गया है.
- आसनसोल दक्षिण की विधायक अग्निमित्रा पॉल पहले से ही एकमात्र महिला कैबिनेट मंत्री (महिला एवं बाल कल्याण विभाग) हैं. सोमवार को मालती आर रॉय (स्वतंत्र प्रभार) के साथ 4 अन्य महिला विधायकों (मौमिता विश्वास मिश्रा, पूर्णिमा चक्रवर्ती, गार्गी दास घोष और सुमन सरकार) ने जूनियर मंत्री के रूप में शपथ ली. इसके साथ ही सरकार में महिला मंत्रियों की संख्या 6 हो गयी है. यह संख्या 2021 की ममता बनर्जी सरकार की 9 महिला मंत्रियों से भले कम है, लेकिन इस बार इन्हें सजावटी पद की बजाय महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं.
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बुधवार को नबान्न में बंटेगा विभाग
शपथ ग्रहण समारोह के बाद पत्रकारों से बात करते हुए नये कैबिनेट मंत्री तापस रॉय ने एक बड़ा अपडेट दिया. उन्होंने बताया कि मंत्रियों के विभागों का आधिकारिक बंटवारा बुधवार को राज्य सचिवालय नबान्न (Nabanna) में होने वाली कैबिनेट की पहली औपचारिक बैठक में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी करेंगे.
प्रचंड बहुमत के साथ बंगाल में बनी भाजपा सरकार
West Bengal Cabinet Expansion: बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा में 208 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में आयी भाजपा सरकार ने 9 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में शपथ ली थी. सोमवार का यह विस्तार बताता है कि शुभेंदु अधिकारी सरकार का लक्ष्य बंगाल से ‘सिंडिकेट राज’ और ‘भ्रष्टाचार’ को उखाड़ फेंकने के साथ-साथ पारदर्शी, संतुलित और सर्वव्यापी शासन देना है.
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