खास बातें
WB Cabinet Expansion: पश्चिम बंगाल में नवगठित भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार के पहले मेगा मंत्रिमंडल विस्तार ने सूबे के सियासी भूगोल को पूरी तरह बदल दिया है. सोमवार को लोक भवन में आयोजित भव्य समारोह में 35 विधायकों के शपथ लेने के बाद अब मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की इस नयी ‘टीम बंगाल’ की आंतरिक संरचना और शक्ति संतुलन का बड़ा ब्योरा सामने आया है.
3 जिलों से कोई मंत्री नहीं
294 सदस्यीय विधानसभा में नियमों के मुताबिक मुख्यमंत्री समेत अधिकतम 44 मंत्री हो सकते हैं. इनमें से फिलहाल 41 पद भरे जा चुके हैं. इस नयी मंत्रिपरिषद का जिलेवार विश्लेषण को देखें, तो एक बेहद चौंकाने वाला और एक्सक्लूसिव पैटर्न उभर कर सामने आया है. भाजपा ने राज्य के 3 सबसे महत्वपूर्ण जिलों को ‘सुपर पावर’ बना दिया है, जबकि 3 जिलों का पत्ता पूरी तरह साफ कर दिया है.
जिन जिलों से बने सबसे ज्यादा मंत्री
शुभेंदु अधिकारी सरकार ने अपने सबसे मजबूत गढ़ों और शहरी क्षेत्रों को बंपर इनाम दिया है. राज्य के 3 प्रमुख क्षेत्रों से 4-4 मंत्रियों की भारी-भरकम फौज तैयार की गयी है.
- कोलकाता शहर (4 मंत्री): राजधानी को शुभेंदु सरकार में सबसे प्रमुख स्थान मिला है. खुद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी कोलकाता की सीट से प्रतिनिधित्व के साथ-साथ रासबिहारी से कद्दावर कैबिनेट मंत्री डॉ स्वपन दासगुप्ता, मानिकतला से तापस रॉय और श्यामपुकुर से राज्य मंत्री पूर्णिमा चक्रवर्ती के जरिये शहर पर मजबूत प्रशासनिक नियंत्रण रखेंगे.
- पूर्व मेदिनीपुर (4 मंत्री): मुख्यमंत्री का गृह जिला होने का इस क्षेत्र को सीधा फायदा मिला है. कांथी दक्षिण से कद्दावर भाजपा नेता अरूप कुमार दास को कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिला है. इनके अलावा तमलूक के जाने-माने चिकित्सक डॉ हरेकृष्ण बेरा, मयना से पूर्व क्रिकेटर अशोक डिंडा और भगवानपुर से शांतनु प्रमाणिक को राज्य मंत्री बनाकर जिले को प्रशासनिक ताकत से लैस कर दिया गया है.
- उत्तर 24 परगना (4 मंत्री): मतुआ समुदाय और शहरी औद्योगिक बेल्ट को साधने के लिए इस जिले से 4 बड़े चेहरे सरकार में शामिल किये गये हैं. बनगांव उत्तर से अशोक कीर्तनिया, नोआपाड़ा से कद्दावर नेता अर्जुन सिंह, खड़दह से प्रोफेसर डॉ कल्याण चक्रवर्ती और बिधाननगर से कैंसर विशेषज्ञ डॉ शारद्वत मुखोपाध्याय को मंत्री पद से नवाजा गया है.
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3 प्रमुख जिलों को लगा सबसे बड़ा झटका
इस मंत्रिमंडल विस्तार का सबसे हैरान करने वाला पहलू यह रहा कि सूबे के 3 प्रमुख जिलों की झोली पूरी तरह खाली रह गयी. इन जिलों से जीतने वाले भाजपा विधायकों को इस बार सरकार में कोई प्रतिनिधित्व नहीं मिला है.
- नदिया जिला : मतुआ और ग्रामीण राजनीति का बड़ा केंद्र होने के बावजूद इस बार नदिया से किसी भी विधायक को लाल बत्ती नहीं मिल सकी.
- दक्षिण दिनाजपुर : उत्तर बंगाल का हिस्सा होने के बाद भी इस जिले को कैबिनेट विस्तार की सूची में जगह नहीं मिल पायी.
- कलिम्पोंग जिला : पहाड़ों की राजनीति का यह बेहद संवेदनशील और रणनीतिक जिला भी इस बार शुभेंदु कैबिनेट में 0 (शून्य) पर ही सिमट कर रह गया.
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WB Cabinet Expansion: राजनीतिक गलियारों में चर्चा
इन 3 जिलों को पूरी तरह छोड़ना और कोलकाता-मेदिनीपुर बेल्ट पर अत्यधिक निर्भरता दिखाना, आने वाले समय में भाजपा के भीतर ही क्षेत्रीय असंतोष (Regional Imbalance) की चिंगारी को भड़का सकता है. बुधवार को जब विभागों का बंटवारा होगा, तब यह देखना दिलचस्प होगा कि इन उपेक्षित जिलों के विधायकों को संगठन में क्या जिम्मेदारी मिलती है.
किस जिले को मिली कितनी हिस्सेदारी? देखें पूरी सूची
| जिले का नाम | मंत्री की संख्या |
|---|---|
| अलीपुरदुआर | 3 |
| दक्षिण 24 परगना | 2 |
| बांकुड़ा | 2 |
| बीरभूम | 2 |
| कूचबिहार | 2 |
| पश्चिम बर्धमान | 2 |
| पूर्व बर्धमान | 2 |
| हुगली | 2 |
| झारग्राम | 2 |
| उत्तर दिनाजपुर | 2 |
| दार्जिलिंग | 2 |
| मुर्शिदाबाद | 2 |
| पश्चिम मेदिनीपुर | 1 |
| हावड़ा | 1 |
| पुरुलिया | 1 |
| मालदा | 1 |
13 कैबिनेट और 19 राज्यमंत्रियों ने ली शपथ
शुभेंदु अधिकारी की टीम में 13 कैबिनेट, 3 राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और 19 राज्य मंत्री शामिल हैं. 3 खाली पड़े पदों को भविष्य में रूठे हुए जिलों को साधने के लिए रिजर्व रखा गया है, ऐसा माना जा रहा है.
