एसआइआर के तहत लोगों को किया जा रहा परेशान
तृणमूल नेताओं ने आरोप लगाया कि एसआइआर प्रक्रिया के नाम पर आम लोगों खासकर महिलाओं, बुजुर्गों और प्रवासी मजदूरों को परेशान किया जा रहा है.
कोलकाता.
एसआइआर को लेकर आम लोगों की परेशानी को देखते हुए तृणमूल कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार को सीईओ मनोज अग्रवाल से मुलाकात की. इस मुलाकात के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में तृणमूल नेताओं ने आरोप लगाया कि एसआइआर प्रक्रिया के नाम पर आम लोगों खासकर महिलाओं, बुजुर्गों और प्रवासी मजदूरों को परेशान किया जा रहा है. इस प्रतिनिधिमंडल में मंत्री पुलक राय, मंत्री डॉ शशि पांजा, मंत्री बीरबाहा हांसदा, मंत्री सिउली साहा और सांसद पार्थ भौमिक शामिल थे. तृणमूल नेताओं ने कहा कि सीईओ के स्पष्ट निर्देश के बावजूद अब भी बीमार और वरिष्ठ नागरिकों को सुनवाई के लिए बुलाया जा रहा है, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. इस पर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गयी. तृणमूल नेताओं ने कहा कि लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी के नाम पर बड़ी संख्या में मतदाताओं को परेशान किया जा रहा है, जबकि ऐसे मामलों का निपटारा एईआरओ और बीएलओ स्तर पर ही किया जाना चाहिए. तृणमूल नेताओं ने यह मुद्दा भी उठाया गया कि बंगाल के सभी मतदाता शिक्षित नहीं हैं. कई लोग वर्षों से यहां रह रहे हैं. घर खरीदे हैं. टैक्स देते हैं और बिजली बिल जमा करते हैं, लेकिन सभी के पास जरूरी दस्तावेज नहीं हैं. ऐसे लोगों को सिर्फ कागजात के अभाव में मताधिकार से वंचित करना अन्याय होगा. तृणमूल ने सुझाव दिया कि प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के जरिये ऐसे मतदाताओं की पहचान करायी जा सकती है.सांसद पार्थ भौमिक ने कहा कि पारिवारिक संबंधों के वैध प्रमाण होते हुए भी अगर किसी का नाम पुरानी मतदाता सूची में नहीं है, तो उसे खारिज करना तर्कसंगत नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया कि सबसे ज्यादा परेशानी विवाहित महिलाओं को हो रही है, जो शादी के बाद दूसरे स्थान पर आकर रहती हैं. तृणमूल नेताओं ने चेतावनी दी कि आम लोगों के हक की लड़ाई में वे दोबारा सीईओ से मिलने जायेंगे और यह संघर्ष जारी रहेगा.
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