खास बातें
TMC Expels Sandipan Saha and Ritabrata Banerjee: ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने अपने 2 विधायकों संदीपन साहा (इंटाली) और रीतब्रत बनर्जी को पार्टी से निकाल दिया है. दोनों को कथित पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के गंभीर आरोप में प्राथमिक सदस्यता से तत्काल प्रभाव से निष्कासित कर दिया है. टीएमसी का यह एक्शन मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की प्रेस कॉन्फ्रेंस के 5 मिनट बाद सामने आया. इसके साथ ही साफ हो गया कि बंगाल विधानसभा में ‘फर्जी हस्ताक्षर का खेल’ अब टीएमसी के गले की फांस बन चुका है.
ममता की बैठक का बहिष्कार और फिर सीधे गेट आउट
शनिवार को अभिषेक बनर्जी पर सोनारपुर में हुए हमले के बाद रविवार को ममता बनर्जी के आवास पर बुलायी गयी विधायक दल की अहम बैठक में 80 में से केवल 20 विधायक पहुंचे थे. प्रभात खबर ने पहले ही अपनी रिपोर्ट में बताया था कि इंटाली के विधायक संदीपन साहा का फोन स्विच ऑफ था. सोमवार को पार्टी ने इसे अनुशासनहीनता मानते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की है.
दोनों विधायकों ने लगातार बना रखी थी बैठकों से दूरी
पार्टी उपाध्यक्ष चंद्रिमा भट्टाचार्य के हस्ताक्षर से जारी निष्कासन पत्र में साफ लिखा है कि तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतने के बावजूद दोनों विधायक अधिकृत नेतृत्व द्वारा बुलायी गयी बैठकों से बार-बार गायब रहे. पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि दोनों विधायकों के बयान और उनकी गतिविधियां तृणमूल कांग्रेस के हितों को नुकसान पहुंचा रहीं थीं, जिसे अब और बर्दाश्त नहीं किया जा सकता.
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शुभेंदु अधिकारी के बयान ने खोल दी पोल
इस निष्कासन के पीछे की असली इनसाइड स्टोरी राज्य सचिवालय (नबान्न) से जुड़ी है. निष्कासन आदेश जारी होने से ठीक कुछ मिनट पहले मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने मीडिया के सामने एक ऐसा दावा किया, जिसने टीएमसी खेमे में हड़कंप मचा दिया.
विभीषण बने टीएमसी विधायक
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने खुलासा किया कि विधानसभा सचिवालय को सौंपे गये जिस पत्र में शोभनदेव चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता बनाने के लिए विधायकों के ‘जाली हस्ताक्षर’ का इस्तेमाल हुआ था, उसकी शिकायत किसी बाहरी ने नहीं, खुद टीएमसी के विधायकों संदीपन साहा और रीतब्रत बनर्जी ने दर्ज करायी थी.
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विधायकों को नोटिस से पहले कार्रवाई
इस खुलासे ने साबित कर दिया कि दोनों विधायक टीएमसी के भीतर रहकर अंदरूनी जानकारी सरकार और जांच एजेंसियों तक पहुंचा रहे थे. जैसे ही टीएमसी नेतृत्व को भनक लगी कि इन दोनों ने ही अपनी ही पार्टी के खिलाफ सीआईडी (CID) को बारूद दिया है, उन्हें तुरंत बाहर का रास्ता दिखा दिया गया.
सीआईडी जांच के घेरे में टीएमसी
यह पूरा विवाद शोभनदेव चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता घोषित करने वाले पत्र से शुरू हुआ था. आरोप है कि टीएमसी ने संख्या बल दिखाने के लिए कई विधायकों के फर्जी दस्तखत उस पत्र पर कर दिये थे. राज्य की अपराध जांच विभाग (CID) इस मामले की गहराई से जांच कर रही है और इसी सिलसिले में अभिषेक बनर्जी को भी नोटिस जारी किया गया था, लेकिन वे स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए पूछताछ के लिए भवानी भवन नहीं गये.
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ममता बनर्जी की पार्टी में आंतरिक बगावत का डर
विश्लेषकों का मानना है कि संदीपन और रीतब्रत का निष्कासन केवल 2 विधायकों की विदाई नहीं है, बल्कि यह बाकी बचे विधायकों के लिए ममता बनर्जी का कड़ा संदेश है. संदेश यह है कि यदि किसी ने भी सरकार या भाजपा से हाथ मिलाने की कोशिश की, तो उसका अंजाम यही होगा.
TMC Expels Sandipan Saha and Ritabrata Banerjee: बंगाल में नये समीकरण की आहट
इन 2 विधायकों के निष्कासन के बाद अब विधानसभा के भीतर आंकड़ों का खेल भी दिलचस्प होने वाला है. निष्कासित विधायक अब खुलकर शुभेंदु सरकार के समर्थन में आ सकते हैं. तृणमूल कांग्रेस के भीतर सुलग रही यह चिंगारी आने वाले दिनों में किसी बड़े राजनीतिक विस्फोट में बदलेगी या ममता बनर्जी इस आंतरिक डैमेज को कंट्रोल कर पायेंगी, यह देखने वाली बात होगी.
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