बंगाल समेत 9 राज्यों, 3 केंद्रशासित प्रदेशों में युद्धस्तर पर हो रहा वोटर गणना फॉर्म का डिजिटाइजेशन

Special Intensive Revision: पश्चिम बंगाल समेत देश के 9 राज्यों और 3 केंद्रशासित प्रदेशों में एसआइआर के तहत वोटर गणना फॉर्म का डिजिटाइजेशन युद्धस्तर पर हो रहा है. 5 लाख से अधिक बीएलओ ने घर-घर जाकर एनुमरेशन फॉर्म पहुंचाया. ये लोग इसे भरने में वोटर्स की मदद कर रहे हैं. फॉर्म का डिजिटलीकरण भी कर रहे हैं. देश में 99.83 प्रतिशत लोगों तक फॉर्म पहुंच चुका है. 74.10 फीसदी फॉर्म का डिजिटलीकरण हो चुका है. जानें देश के किस राज्य में कितने फॉर्म का डिजिटलीकरण हुआ है.

Special Intensive Revision: पश्चिम बंगाल समेत देश के 9 राज्यों और 3 केंद्रशासित प्रदेशों में एनुमरेशन फॉर्म (वोटर गणना फॉर्म) भरने और उसके डिजिटाइजेशन यानी डिजिटलीकरण का काम तेजी से चल रहा है. एक महीने में बंगाल के 7,66,37,529 मतदाताओं (27 अक्टूबर 2025 तक) में से 7,65,05,985 वोटर्स (99.83 प्रतिशत) तक एनुमरेशन फॉर्म यानी वोटर गणना फॉर्म पहुंच चुका है. इनमें से 87.91 फीसदी लोगों ने अपने फॉर्म जमा कर दिये हैं और उसका डिजिटलीकरण भी हो चुका है. चुनाव आयोग की ओर से शुक्रवार को यह जानकारी दी गयी.

50.97 करोड़ में 50.68 करोड़ वोटर्स तक पहुंचा फॉर्म

इसमें बताया गया कि देश के इन 12 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में कुल 50,97,44,423 मतदाता हैं, जिसमें 50,68,42,224 के पास गणना फॉर्म पहुंच चुका है. 37,77,15,220 (74.10 प्रतिशत) को डाटाबेस में सेव किया जा चुका है. अब तक सिर्फ केंद्रशासित प्रदेश लक्षद्वीप में 100 फीसदी फॉर्म का डिजिटाइजेशन हो पाया है. इसके बाद सबसे ज्यादा 92.69 फीसदी फॉर्म डिजिटलीकरण का काम गोवा में हुआ है.

74.10 प्रतिशत एनुमरेशन फॉर्म का हुआ डिजिटलीकरण

राज्य का नामकुल मतदाता (27 अक्टूबर 2025 तकबीएलओ की संख्याबीएलए की संख्यागणना फॉर्म का वितरण (संख्या में)फॉर्म का डिजिटलीकरण
अंडमान-निकोबार310404411683310367236770
छत्तीसगढ़2123073724371388462112650816517666
गोवा11850341725254411850241098430
गुजरात5084343650963446725074193741477048
केरल2785085525468546242733373317954567
लक्षद्वीप57,813558357,81357,813
मध्यप्रदेश57406143650141217305734122049638923
पुडुचेरी10,21,5789622,0439,99,4528,51,558
राजस्थान54656215522221013335450302948952098
तमिलनाडु64114587684702388536274346848679233
उत्तर प्रदेश15443009216248638579915399368884882670
पश्चिम बंगाल76637529806811493887650598567368444
कुल5097444235328281140598506842224377715220
स्रोत : Election Commission of India

बंगाल में बीएलओ के एक वर्ग का विरोध-प्रदर्शन जारी

राजस्थान में 89.56 प्रतिशत और पश्चिम बंगाल में 87.91 प्रतिशत फॉर्म का डिजिटलीकरण कर लिया गया है. मध्यप्रदेश में 86.47 प्रतिशत, पुडुचेरी में 83.46 और गुजरात में 81.58 प्रतिशत फॉर्म का डिजिटलीकरण कर लिया गया है. पश्चिम बंगाल में हालांकि, बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) का एक वर्ग एसआईआर की इस प्रक्रिया का विरोध कर रहा है, लेकिन दूसरी ओर बड़ी संख्या में ऐसे बीएलओ और बीएलए भी हैं, जो लगातार अपना काम करने में जुटे हैं. वे लोगों के घर-घर जाकर जानकारी जुटा रहे हैं, उन्हें एनुमरेशन/गणना फॉर्म भरने में मदद कर रहे हैं.

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Special Intensive Revision: चुनाव आयोग ने दिया है एसआइआर का निर्देश

चुनाव आयोग ने भारत के संविधान के अनुच्छेद 324, खंड 21 के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के अन्य लागू प्रावधानों और मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के प्रासंगिक प्रावधानों के साथ 27 अक्टूबर, 2025 के आदेश के तहत 9 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का आदेश दिया है.

किन राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में हो रहा है एसआइआर?

बिहार में एसआईआर की सफलता के बाद छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, मध्यप्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के साथ-साथ 3 केंद्रशासित प्रदेशों अंडमान और निकोबार, लक्षद्वीप और पुडुचेरी के 321 जिलों और 1,843 विधानसभा क्षेत्रों (एसी) के लगभग 51 करोड़ मतदाताओं को शामिल किया गया है.

5.3 लाख से अधिक बीएलओ को लगाया गया काम पर

इन 12 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में एसआईआर के लिए गणना 4 दिसंबर 2025 तक होगी. एसआईआर से जुड़े राज्य/केंद्रशासित प्रदेश की मतदाता सूची में 27 अक्टूबर, 2025 तक शामिल प्रत्येक मतदाता को एक विशिष्ट गणना प्रपत्र (ईएफ) उपलब्ध कराया गया है, जो आंशिक रूप से पहले से भरा है. इस अभियान की सफलता के लिए 5.3 लाख से अधिक बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ), 7.64 लाख बूथ लेवल एजेंट (बीएलए), 10,448 ईआरओ/एईआरओ और 321 डीईओ को काम में लगाया गया है.

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है। उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवरेज करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ में भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है। मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है

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