Table of Contents
SIR West Bengal: तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सदस्य सागरिका घोष ने कहा है कि पश्चिम बंगाल में स्थानीय स्तर पर जो सत्ता-विरोधी लहर थी, वह एसआईआर प्रक्रिया के प्रभाव से काफी हद तक दब गयी है. इससे आगामी विधानसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस की स्थिति स्पष्ट रूप से भाजपा से बेहतर है.
बंगाल चुनाव के लिए तृणमूल की स्टार प्रचारक हैं सागरिका घोष
पत्रकार से नेता बनी सागरिका घोष को चुनाव के लिए तृणमूल कांग्रेस का स्टार प्रचारक बनाया गया है. उन्होंने कहा कि नेता के रूप में ममता बनर्जी के खिलाफ उनके समर्थकों में कोई असंतोष नहीं है. असंतोष कुछ स्थानीय नेताओं के खिलाफ हो सकता है, जिन्हें इस बार टिकट नहीं दिया गया.
टीएमसी ने 74 विधायकों के टिकट काटे
ममता बनर्जी ने 17 मार्च को जारी 291 उम्मीदवारों की सूची में 74 मौजूदा विधायकों के टिकट काट दिये हैं, जो सत्ता विरोधी लहर को खत्म करने के लिए पार्टी की एक सोची-समझी रणनीति का संकेत है.
भाजपा का एजेंडा एसआईआर प्रक्रिया का इस्तेमाल कर ममता बनर्जी को हराने और किसी भी तरह पश्चिम बंगाल पर कब्जा करने का था, क्योंकि वह पिछले 15 वर्षों से लगातार भाजपा को हराती रही हैं. लेकिन यह कदम उल्टा पड़ गया और तृणमूल को फायदा मिला. अगर कहीं स्थानीय स्तर पर सत्ता-विरोधी लहर थी भी, तो वह एसआईआर के कारण पूरी तरह दब गयी. यह भाजपा की बड़ी गलती थी. वे जितने नाम हटाना चाहें, हटा लें, हम फिर भी जीतेंगे.
सागरिका घोष, राज्यसभा सांसद, तृणमूल कांग्रेस
बंगाल की खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
SIR West Bengal: कहां हैं घुसपैठिये, जिनकी बात बार-बार बीजेपी करती थी – सागरिका घोष
तृणमूल सांसद ने कहा कि ‘जल्दबाजी में लागू’ SIR ने राज्य में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खिलाफ माहौल बना दिया है. एसआईआर में आम लोगों के साथ ही नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन, पूर्व मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती, मंत्री शशि पांजा और क्रिकेटर ऋचा घोष जैसे लोगों की नागरिकता पर भी सवाल खड़े किये. उन्होंने कहा, ‘वे घुसपैठिए कहां हैं, जिनकी बात भाजपा बार-बार करती थी?’
ममता बनर्जी के काम को मीडिया में नहीं मिली पर्याप्त जगह – सागरिका
सागरिका घोष ने कहा कि तृणमूल प्रमुख के जमीनी जुड़ाव और उनके शासन रिकॉर्ड पर लोगों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलेगा, जिसे मीडिया में पर्याप्त महत्व नहीं मिला. उन्होंने कहा- ममता बनर्जी 24 घंटे जनता से जुड़ी रहने वाली नेता हैं. 3 कार्यकाल के बाद स्थानीय स्तर पर कुछ सत्ता विरोधी लहर होना स्वाभाविक है, लेकिन मुख्यमंत्री के रूप में उनके खिलाफ ऐसा कोई भाव नहीं है. राज्य में वह ही अंतिम सहारा हैं. लोग जानते हैं कि मुश्किल में वे उनके पास जा सकते हैं.
इसे भी पढ़ें : बंगाल चुनाव 2026: कल्याणकारी योजनाएं बनाम सत्ता-विरोधी लहर, ममता बनर्जी के 15 साल के शासन की सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा
ममता को बताया दक्षिण एशिया में अद्वितीय राजनीतिक व्यक्तित्व
सागरिका ने ममता बनर्जी को ‘दक्षिण एशिया में अद्वितीय राजनीतिक व्यक्तित्व’ बताते हुए कहा कि उन्होंने बिना किसी राजनीतिक विरासत या मार्गदर्शक के पुरुष प्रधान राजनीति में एक मजबूत पार्टी खड़ी की है. उन्होंने तृणमूल में महिला नेताओं को जितना स्थान दिया है, उतना किसी अन्य पार्टी ने नहीं दिया. हम महिला-प्रथम पार्टी हैं और महिलाओं के खिलाफ अपराध बर्दाश्त नहीं करेंगे. चुनाव में चुनौतियों पर सागरिका घोष ने कहा कि झूठे प्रचार, अफवाहों और दुष्प्रचार से निपटना पार्टी के लिए बड़ी चुनौती है.
इसे भी पढ़ें
भवानीपुर चुनाव 2026: ममता बनर्जी vs शुभेंदु अधिकारी, क्या बचेगा दीदी का सबसे मजबूत किला?
