चुनाव आयोग ने तृणमूल समेत कई दलों के नेताओं को माना संदिग्ध वोटर, नोटिस भेज सुनवाई में बुलाया

bengal voter list sir notice: आयोग की इस कार्रवाई पर तृणमूल नेता का कहना है कि आरआईआई का उपयोग करके तृणमूल समर्थकों की प्रोफाइल ट्रैक की जा रही हैं. फिर भाजपा वह लिस्ट चुनाव आयोग को सौंप रही है. तृणमूल समर्थकों के नामों को लिस्ट से बाहर करने की यह पूरी साजिश है.

Bengal Voter List SIR Notice: कोलकाता: SIR के तहत चुनाव आयोग ने संदिग्ध वोटरों की लिस्ट जारी कर दिया है. इस लिस्ट में सत्ताधारी तृणमूल समेत कई दलों के नेताओं के नाम शामिल है. आयोग राज्य के एक बड़े वर्ग को सुनवाई के लिए बुलाया है. हालांकि, तृणमूल नेता आयोग की इस कार्रवाई पर नाराजगी जता रहे हैं. तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी ने भी चुनाव आयोग की कई बार इस कारण आलोचना कर चुकी हैं. तृणमूल नेताओं का कहना है कि भारतीय जनता पार्टी सोशल मीडिया अकाउंट्स को ट्रैक करके यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि तृणमूल समर्थक कौन हैं. वे इसे सीधे चुनाव आयोग को सौंप रहे हैं. उनका उद्देश्य तृणमूल समर्थकों को वोटर लिस्ट से बाहर करना है.

दस्तावेज सही होने पर भी आया नोटिस

चुनाव आयोग की ओर से नोटिस पानेवाले तृणमूल नेता देबांशु भट्टाचार्य का कहना है कि उनके परिवार में किसी भी सदस्य के साथ दस्तावेज में किसी तरह की कोई गड़बड़ी नहीं है, फिर भी उनके परिवार के कई सदस्यों को नोटिस भेजा गया है. इससे पहले, अभिनेता-सांसद देव को एसआईआर नोटिस भेजा गया था. इसी बीच, तृणमूल की पूर्व सांसद मिमी चक्रवर्ती को भी नोटिस भेजा गया है. सीपीएम नेता कल्तान दासगुप्ता को भी नोटिस प्राप्त हुआ है. इस बार नोटिस तृणमूल आईटी सेल के प्रमुख देबांशु भट्टाचार्य को भेजा गया. तृणमूल समर्थकों के साथ-साथ उनके परिवारों को भी नोटिस भेजा जा रहा हैं. जिन 10 लोगों को नोटिस भेजे गए हैं, उनमें से 8 तृणमूल समर्थक हैं.

प्रोफाइल ट्रैक कर लिस्ट बनाने का आरोप

नोटिस मिलते ही यह युवा नेता गुस्से से भड़क उठे. उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा- आरआईआई का उपयोग करके तृणमूल समर्थकों की प्रोफाइल ट्रैक की जा रही हैं. फिर भाजपा वह लिस्ट चुनाव आयोग को सौंप रही है. तृणमूल समर्थकों के नामों को लिस्ट से बाहर करने की यह पूरी साजिश है. देबांशु कहते हैं- मुझे 27 जनवरी को जाने के लिए कहा गया है. मैं अकेला नहीं हूं. मुझे मेरी बहन और हमारे परिवार के चार सदस्यों का फोन आया है. अब तक मुझे चार कॉल आ चुके हैं. मैं बस इतना ही कह सकता हूँ कि मेरी चाचियाँ और मेरे माता-पिता सभी 2002 की सूची में थे. हमारी वंशानुक्रम की गणना उसी के आधार पर की गई थी. इसीलिए 58 लाख लोगों की सूची में हमारा नाम नहीं आया. इसका मतलब है कि हम पास हो गए.

सही दस्तावेज के बाद भी आ रहा नोटिस

देबांशु कहते हैं- संदिग्ध वोटरों की लिस्ट में हमारे परिवार के लोगों का नाम डाला गया है. आयोग राज्य के एक बड़े हिस्से को सुनवाई के लिए बुला रहा है. तृणमूल नेता कहते हैं-मेरे माता-पिता, बहनें, मेरे परिवार में हर किसी के नाम की वर्तनी और उम्र में कोई समानता नहीं है. शिशिर बाबू की तरह कुमार भी दोबारा मैदान में नहीं उतरे. चंद्र भी मैदान में नहीं उतरे, या चंद्र कुमार को बाहर कर दिया गया, ऐसा कुछ नहीं हुआ. मेरी जन्मतिथि भी सही है. मुझे अब भी समझ नहीं आ रहा कि नोटिस क्यों भेजा गया. उन्होंने कहा कि मेरा ही मामला अकेला नहीं हैं. कई तृणमूल कार्यकर्ताओं के साथ भी ऐसा ही हो रहा है. सही दस्तावेज होने के बाद भी आयोग उन्हें नोअिस भेजा है.

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By Ashish Jha

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

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