टीएमसी में बगावत, लेकिन ममता बनर्जी नो इंट्रोस्पेक्शन मोड में, आखिर क्यों आत्ममंथन के बजाय कड़े तेवर दिखा रहा नेतृत्व?

Revolt in TMC: बंगाल चुनाव के बाद टीएमसी के कई बड़े नेताओं ने इस्तीफा दे दिया है. भ्रष्टाचार और आरजी कर कांड पर सवाल उठाने वालों को ममता बनर्जी ने कविता के जरिए जवाब दिया है. जानें क्यों टीएमसी नेतृत्व आत्ममंथन करने को तैयार नहीं है और इसके क्या परिणाम हो सकते हैं.

Revolt in TMC: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर का ज्वालामुखी फटने लगा है. शांतनु सेन, अरूप चक्रवर्ती और काकोली घोष दस्तीदार जैसे दिग्गज नेताओं के इस्तीफों और बयानों ने साफ कर दिया है कि पार्टी के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है.

बागी नेताओं को कड़ा संदेश दे रही ममता बनर्जी

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इतनी बड़ी बगावत के बावजूद टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी के रुख में आत्ममंथन (Introspection) की कोई झलक नहीं दिख रही. इसके उलट, वे ‘गिरगिटी’ जैसी कविता के जरिये बागी सुरों को कुचलने का कड़ा संदेश दे रहीं हैं. आखिर क्या है ममता का वह प्लान, जो पार्टी में मचे गृहयुद्ध को शांत करने की बजाय उसे और हवा दे रहा है?

विद्रोह की आंधी, नेतृत्व खामोश?

टीएमसी के भीतर मचे इस घमासान के 3 प्रमुख केंद्र हैं, जिन्हें नेतृत्व नजरअंदाज कर रहा है.

  1. भ्रष्टाचार बनाम छवि : बागी नेताओं का तर्क है कि आरजी कर कांड और नौकरी घोटाले ने पार्टी की नैतिकता को खत्म कर दिया. लेकिन ममता बनर्जी इसे केवल विपक्ष की साजिश बताकर टाल रही हैं.
  2. सांगठनिक पदों से मोहभंग : एक के बाद एक वरिष्ठ नेता पदों से दूरी बना रहे हैं. उनका आरोप है कि पार्टी अब कुछ चुनिंदा सलाहकारों के इशारे पर चल रही है, जहां पुराने वफादारों की कोई जगह नहीं बची.
  3. ममता की सख्त शैली : जानकारों का कहना है कि ममता बनर्जी अपनी कार्यशैली में बदलाव करने की बजाय उन लोगों को बाहर का रास्ता दिखाने के पक्ष में हैं, जो सवाल उठा रहे हैं.

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आत्ममंथन से परहेज क्यों?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ममता बनर्जी का यह व्यवहार एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हो सकता है. ममता मानती हैं कि अगर उन्होंने हार या बगावत पर सार्वजनिक रूप से आत्ममंथन किया, तो यह उनकी कमजोरी मानी जायेगी. वे अपनी ‘लड़ाकू’ छवि को बरकरार रखना चाहती हैं.

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नयी ब्रिगेड पर भरोसा

पार्टी के भीतर एक बड़ा धड़ा ऐसा है, जो मानता है कि पुराने नेताओं को हटाकर नयी पीढ़ी को कमान सौंपने का यह सही समय है. इसीलिए पुराने नेताओं की नाराजगी को नजरअंदाज किया जा रहा है. पार्टी का मानना है कि टीएमसी का मतलब सिर्फ ममता बनर्जी है. अगर कोई नेता साथ छोड़ता भी है, तो ममता की लोकप्रियता उसे ढक लेगी.

Revolt in TMC: कार्यकर्ताओं में बढ़ती बेचैनी

पार्टी के भीतर आत्ममंथन न होने का सबसे बुरा असर निचले स्तर के कार्यकर्ताओं पर पड़ रहा है. जब बड़े नेता भ्रष्टाचार पर सवाल उठाकर पद छोड़ते हैं, तो जमीनी कार्यकर्ता जनता को जवाब देने की स्थिति में नहीं रह जाते. शुभेंदु अधिकारी की सरकार के ‘अन्नपूर्णा भंडार’ और ‘घुसपैठ पर 3D नीति’ जैसे कड़े फैसलों ने टीएमसी कार्यकर्ताओं के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है. ऐसे में नेतृत्व की खामोशी उन्हें बीजेपी की ओर धकेल रही है.

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आगे क्या होगा? एकला चलो रे… की राह पर दीदी

ममता बनर्जी ने अपनी ‘गिरगिटी’ कविता से साफ कर दिया है कि वे झुकने वाली नहीं हैं. वे अब अपनी पार्टी की क्लीनिंग (सफाई) की प्रक्रिया शुरू कर सकती हैं, जहां विरोध करने वालों के लिए कोई जगह नहीं होगी. लेकिन सवाल है कि क्या बिना आत्ममंथन के वे 2026 के बाद खोयी हुई राजनीतिक जमीन वापस पा सकेंगी?

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Published by: Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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