मुख्य बातें
Rahul Sinha: कोलकाता. पश्चिम बंगाल में भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राहुल सिन्हा ने राज्यसभा उम्मीदवार के रूप में अपना पर्चा दाखिल कर दिया है. भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने इस बार राहुल सिन्हा को राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवार बनाया है. केंद्रीय नेतृत्व का यह फैसला सिर्फ एक राजनीतिक नियुक्ति नहीं है, बल्कि बंगाल में दशकों तक पार्टी का झंडा बुलंद रखने वाले एक आक्रामक और वफादार सिपाही को दिया गया एक बड़ा इनाम है.
बंगाल में भाजपा को खड़ा करने में महती भूमिका
कुछ वर्ष पहले तक बंगाल में बीजेपी का कोई मजबूत जनाधार नहीं था. राहुल सिन्हा ही वह चेहरा थे, जो वामदलों और बाद में तृणमूल कांग्रेस की आक्रामक राजनीति से सीधे टकरा रहे थे. राहुल सिन्हा लंबे समय से आरएसएस और बीजेपी से जुड़े रहे हैं. बंगाल में जब बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ना हार की गारंटी माना जाता था, तब भी उन्होंने पार्टी के लिए कई चुनाव लड़े. उन्हें उच्च सदन भेजना कैडर के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि पार्टी अपने मूल और वफादार कार्यकर्ताओं को कभी दरकिनार नहीं करती.
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पुराने चेहरे को सम्मान
पश्चिम बंगाल में 2026 में विधानसभा चुनाव होने हैं. राज्य में पार्टी के भीतर अक्सर पुराने बीजेपी कार्यकर्ताओं और अन्य दलों विशेषकर TMC से आए नेताओं के बीच तालमेल की कमी की खबरें आती हैं. राहुल सिन्हा जैसे कद्दावर और सर्वमान्य पुराने नेता को आगे करके बीजेपी अपने कोर कैडर को एकजुट और उत्साहित करना चाहती है. संसद में बंगाल की मुखर आवाज राहुल सिन्हा अपने तीखे और आक्रामक भाषणों के लिए जाने जाते हैं. राज्यसभा में उनकी उपस्थिति से बीजेपी को ममता सरकार और टीएमसी की नीतियों के खिलाफ संसद के भीतर एक बेहद मुखर और बेबाक आवाज मिल जाएगी.
