नवद्वीप रास उत्सव में क्यूआर कोड लागू

जिला प्रशासन सतर्क, अवैध मूर्तियों के जुलूस पर नकेल कसने की तैयारी

बारवारी पूजा कमेटियों की अनियंत्रित भीड़ को रोकने के लिए कृष्णानगर जिला पुलिस ने उठाया सख्त कदम

पांच नवंबर को होगी पूजा कल्याणी. नदिया जिला का नवद्वीप पारंपरिक रास उत्सव दुनिया के दरबार में अपनी एक खास जगह बना चुका है. लगभग एक हफ़्ते तक चलने वाले इस उत्सव में अच्छी तरह से सजाए गए पंडाल, लाइटें और अलग-अलग देवी-देवताओं की पूजा की जाती है. मुख्य पूजा कार्तिकी पूर्णिमा के दिन (इस वर्ष 5 नवंबर) होती है और अगले दिन आरोंग (जुलूस) निकाला जाता है.

पुलिस ने बढ़ाया रूट का दबाव

आरोंग (जुलूस) पूरी रात चलता है और अगले दिन सुबह 8 बजे मंडप में वापस पहुंचता है. चूंकि यह आरोंग पूरी रात होता है, इसलिए इस साल शुरू से ही रूट बढ़ाने का दबाव था. आखिरकार, नदिया जिला पुलिस प्रशासन को सेंट्रल रास कमेटी के फैसले को कायम रखना पड़ा. कृष्णानगर पुलिस जिला इस साल पारंपरिक रास उत्सव में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कुछ नये कदम उठा रहा है. पुलिस प्रशासन का दावा है कि बड़ी संख्या में बिना इजाजत के बारवारी (पूजा समितियां) इस जुलूस में गैर-कानूनी तरीके से निकलती हैं और आरोंग के कारण देर से लौटती हैं. अवैध बारवारियों को रोकने के लिए क्यूआर कोड : इस वर्ष बिना लाइसेंस के अवैध बारवारियों को जुलूस से रोकने के लिए एक नया विचार आया है. जुलूस में शामिल होने वाली मूर्ति पर एक क्यूआर कोड होगा. रास उत्सव 5 नवंबर पूर्णिमा के दिन आयोजित किया जा रहा है. नदिया जिला पुलिस प्रशासन और नवद्वीप थाना पुलिस मिलकर इस उत्सव को संपूर्ण और सुंदर बनाने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं. समन्वय बैठक में हुई घोषणा : रास उत्सव 2025 के अवसर पर नवद्वीप थाना पुलिस और कृष्णानगर पुलिस जिले के आह्वान पर नवद्वीप नगरपालिका के रवींद्र सांस्कृतिक केंद्र में एक समन्वय बैठक आयोजित की गयी. मीटिंग में नवद्वीप के विधायक पुंडरीकाक्ष साहा, चैयरमैन बिमान कृष्ण साहा, वाइस चेयरमैन सचिंद्र बसाक, पंचायत समिति की अध्यक्ष मंजूरानी घोष, तथा पुलिस और प्रशासनिक विभागों के कई अधिकारी उपस्थित थे. मीटिंग में मौजूद सभी लोगों ने रास फेस्टिवल को सुंदर और हेल्दी तरीके से पूरा करने को एकमात्र लक्ष्य बताया. एडिशनल सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस उत्तम घोष ने कोऑर्डिनेशन मीटिंग में घोषणा की कि: जुलूस के दिन रास मूर्ति पर एक खास क्यूआर कोड लगाया जायेगा. सिर्फ उन्हीं पूजा कमेटियों से इस जुलूस में शामिल होने का अनुरोध किया गया है, जिन्हें जुलूस की परमिशन मिली है. जिन सभी बारवारियों को परमिशन मिली है, उन्हें एक क्यूआर कोड दिया जायेगा ताकि वे समझ सकें कि कौन सी मूर्ति किस रूट पर है.

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Author: GANESH MAHTO

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