लाइसेंसी डीलरों से ही पुरानी कार खरीदें, नहीं तो पड़ सकते हैं मुश्किल में
संवाददाता, कोलकातायदि आप अपनी कार किसी को बेच रहे हैं तो जिस व्यक्ति को आप कार ट्रांसफर कर रहे हैं, उसके बारे में पूरी जानकारी लें. कार उसी व्यक्ति को ट्रांसफर करें जिसके नाम पर कार होगी या जिसके नाम पर कार रजिस्टर्ड होगी. ऐसे नहीं करने वाले लोग मुश्किल में पड़ सकते हैं. इसके साथ ही ओनरशिप बदलने के समय ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट के रीजनल ऑफिस या आरटीओ में इसकी जानकारी देनी होगी. इसके अलावा, यदि आप किसी डीलर से पुरानी कार खरीद रहे हैं तो पहले चेक कर लें कि उसके पास लाइसेंस है या नहीं.दिल्ली ब्लॉस्ट के साथ हाल में हुई क्राइम की घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए परिवहन विभाग अब पुराने वाहनों को खरीद बिक्री पर सख्ती करने जा रहा है. परिवहन विभाग के एक अधिकारी का कहना है कि उक्त नियमों का मकसद, क्राइम में इस्तेमाल हुए वाहनों के असली मालिक तक जल्द पहचान करना है.
प्रशासन का साफ संदेश है कि अगर नियमों के हिसाब से ओनरशिप ट्रांसफर नहीं की गयी, तो कार मालिक को भविष्य में गंभीर कानूनी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है. परिवहन मंत्री स्नेहाशीष चक्रवर्ती के मुताबिक अगर लोग जागरूक हों तो इस तरह की धोखाधड़ी को काफी हद तक रोका जा सकता है.ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट के सूत्रों के मुताबिक, राज्य में पुरानी कारों की खरीद-बिक्री में ओनरशिप बदलने का प्रोसेस अक्सर पूरा नहीं हो पाता. शहर से लेकर जिले तक कई बार मालिक बदलने के बाद भी रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट पर पिछले मालिक का नाम ही रहता है. नतीजतन, अगर कोई क्राइम या एक्सीडेंट होता है, तो पुराना मालिक मुश्किल में पड़ जाता है. पुलिस और एडमिनिस्ट्रेशन के लिए भी असली गुनहगार को ढूंढना मुश्किल हो रहा है. ऐसे में, ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट ने ‘डीम्ड ओनरशिप’ सिस्टम शुरू किया है. यानी, अगर कोई व्यक्ति अपनी पुरानी कार किसी लाइसेंस वाले डीलर को बेचता है, तो कार की कानूनी जिम्मेदारी उस डीलर पर आ जायेगी. अगर कार का इस्तेमाल किसी क्राइम में होता है, तो डीलर को जिम्मेदारी लेनी होगी. खासकर पुरानी बसें, मिनी बसें, टैक्सी, कैब और ऑटो खरीदने-बेचने के मामले में डीलरों का लाइसेंस जरूरी किया जा रहा है.
नकली डीलर से कार खरीदने से बढ़ रही धोखाधड़ी
ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट के अधिकारियों का दावा है कि राज्य में असल में 1650 पुराने कार डीलर हैं, लेकिन डिपार्टमेंट की बुक में रजिस्टर्ड कंपनियों की संख्या सिर्फ 39 हैं. इस गड़बड़ी से धोखाधड़ी और गैर-कानूनी लेन-देन बढ़ रहा है. पहले से ही नकली डीलर से कार खरीदने की वजह से पैसे और कानूनी दिक्कतों की शिकायतें भी बढ़ रही हैं. नयी गाइडलाइंस के अनुसार कार बेचने से पहले वाहन मालिक को डीलर की मंजूरी वेरिफाई करनी होगी. फॉर्म 29बी और 29सी जमा करना जरूरी है. मालिकाना हक बदलते समय बेचने वाले को मोटर व्हीकल डिपार्टमेंट के किसी अधिकारी के सामने मौजूद होना होगा, इसके लिए जिला व्हीकल डिपार्टमेंट में एक काउंटर निर्धारित करना होगा, जो कम से कम हफ्ते में एक दिन खुलेगा.
