खास बातें
Prakash Chik Baraik Resigns: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली करारी शिकस्त के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) में अंदरूनी बगावत की आग अब देश के उच्च सदन यानी राज्यसभा तक पहुंच गयी है. दिल्ली से लेकर कोलकाता और उत्तर बंगाल के चाय बागानों तक उस वक्त सनसनी फैल गयी, जब तृणमूल कांग्रेस के कद्दावर आदिवासी चेहरे और राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बड़ाईक (Prakash Chik Baraik) ने अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया.
हैरान और लाचार हुए कालीघाट के रणनीतिकार
उन्होंने अपना इस्तीफा राज्यसभा के सभापति को सौंप दिया है. बड़ाईक का इस्तीफा ऐसे समय में आया, जब पहले से ही टीएमसी के 20 लोकसभा सांसद और 64 विधायक खुली को संभालने में ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी नाकाम रहे. प्रकाश चिक बड़ाईक के इस अप्रत्याशित कदम ने कालीघाट (ममता बनर्जी का आवास) के रणनीतिकारों को पूरी तरह हैरान और लाचार कर दिया है, क्योंकि वे उत्तर बंगाल में टीएमसी के सबसे बड़े संगठनात्मक स्तंभ माने जाते थे.
क्यों टूटे प्रकाश चिक बड़ाईक?
अलीपुरद्वार और जलपाईगुड़ी के चाय बागान क्षेत्रों में टीएमसी को मजबूत करने वाले प्रकाश चिक बड़ाईक ने ऐसा कदम क्यों उठाया? इस सवाल का जवाब यह है कि बड़ाईक लंबे समय से राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी और उनके कॉरपोरेट सलाहकारों (I-PAC) की कार्यशैली से बेहद क्षुब्ध थे. विधानसभा चुनाव में पार्टी की ऐतिहासिक हार के बाद जब ओल्ड गार्ड्स (पुराने नेताओं) की आवाज को पूरी तरह दबा दिया गया, तो उन्होंने घुटन महसूस करना शुरू कर दिया था.
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उत्तर बंगाल विकास विभाग का नया समीकरण
पश्चिम बंगाल की शुभेंदु अधिकारी सरकार में उत्तर बंगाल विकास विभाग की कमान कैबिनेट मंत्री नीशीथ प्रमाणिक के हाथों में जाने और भाजपा द्वारा जमीनी स्तर पर किये जा रहे प्रशासनिक सुधारों के बाद, प्रकाश चिक बड़ाईक को अपना और अपने आदिवासी समाज का भविष्य टीएमसी के साथ पूरी तरह अंधकारमय नजर आने लगा था.
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‘साइन-गेट’ घोटाला और कांग्रेस में विलय की खबरों से बढ़ा असंतोष
विधायकों के जाली हस्ताक्षर मामले (Signature Forgery Case) में अभिषेक बनर्जी पर कसते सीआईडी और ईडी के शिकंजे को देखकर टीएमसी के कई सांसद अब अपनी साफ-सुथरी छवि को बचाने के लिए पार्टी से दूरी बना रहे हैं. प्रकाश चिक बड़ाईक इसी रणनीति के तहत विवादों से पूरी तरह दूर होना चाहते हैं. साइन-गेट घोटाला और टीएमसी के कांग्रेस में विलय की खबरों की वजह से उनके मन में असंतोष बढ़ा और उन्होंने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया.
Prakash Chik Baraik Resigns: उत्तर बंगाल में तृणमूल का सूपड़ा साफ
वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी द्वारा ममता बनर्जी को अल्टीमेटम (हमें चुनिये या अभिषेक को) के बाद बड़ाईक का इस्तीफा दर्शाता है कि तृणमूल कांग्रेस अब अपना वजूद बचाने की लड़ाई लड़ रहही है. महुआ मोईत्रा भले ही पाला बदलने वालों को ‘कचरा’ बता रही हों, लेकिन बड़ाईक जैसे जमीनी आदिवासी नेता का इस्तीफा बता रहा है कि पार्टी ने अपना जनाधार पूरी तरह खो दिया है.
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