एसआइआर में बाधा डालने की अनुमति नहीं : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि वह मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) में किसी को भी बाधा डालने की अनुमति नहीं देगा.
By AKHILESH KUMAR SINGH | Updated at :
शीर्ष अदालत ने राज्य के डीजीपी से हलफनामा देने को कहा
ममता बनर्जी की याचिका पर शीर्ष अदालत में हुई सुनवाई
संवाददाता, एजेंसियां कोलकाता/नयी दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि वह मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) में किसी को भी बाधा डालने की अनुमति नहीं देगा. प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया की पीठ ने कहा कि वह इस मामले में आवश्यक आदेश या स्पष्टीकरण जारी करेगी. पीठ ने पश्चिम बंगाल में एसआइआर प्रक्रिया को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की. इनमें राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की याचिका भी शामिल है, जिसमें एसआइआर प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से ‘बड़ी संख्या में लोगों के नाम हटाये जाने’ की आशंका जाहिर की गयी है.
पीठ ने कहा: हम किसी को भी एसआइआर प्रक्रिया में बाधा डालने की अनुमति नहीं देंगे. राज्यों को यह बात स्पष्ट हो जानी चाहिए. शीर्ष अदालत ने निर्वाचन आयोग की ओर से दाखिल हलफनामे का संज्ञान लिया, जिसमें कुछ उपद्रवियों पर एसआइआर संबंधी नोटिस को जलाने का आरोप लगाया गया है. कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को इस संबंध में निजी तौर पर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया. चुनाव आयोग ने कहा कि उपद्रवियों के खिलाफ अभी तक कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गयी है. केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा: यह संदेश जाना चाहिए कि भारत का संविधान सभी राज्यों पर लागू होता है. अदालत ने एसआइआर प्रक्रिया में दस्तावेजों के सत्यापन की समय-सीमा को एक सप्ताह के लिए बढ़ा दिया है.
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब पश्चिम बंगाल में अंतिम मतदाता सूची 14 फरवरी की बजाय अब 21 फरवरी को प्रकाशित होने की संभावना जतायी जा रही है.
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि सर्वोच्च न्यायालय एसआइआर प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं आने देगा. उन्होंने कहा कि जहां भी सुधार की आवश्यकता होगी, वहां आदेश जारी किये जायेंगे. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी प्रकार की रुकावट बर्दाश्त नहीं की जायेगी. सीजेआइ ने टिप्पणी की कि सभी राज्यों को यह समझना चाहिए.
28 तक प्रकाशित होगी अंतिम मतदाता सूची
कोलकाता. राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी (सीइओ) मनोज कुमार अग्रवाल ने सोमवार को कहा कि अंतिम मतदाता सूची 21 फरवरी से पहले प्रकाशित नहीं की जायेगी. हालांकि, इस महीने के अंत तक इसे जारी करने के प्रयास किये जा रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को प्रभावित लोगों के दस्तावेजों की जांच की समय सीमा 14 फरवरी से एक सप्ताह आगे बढ़ा दी है. सीइओ ने बताया कि अंतिम मतदाता सूची 21 फरवरी से पहले प्रकाशित नहीं की जायेगी. हम इसे 28 फरवरी तक प्रकाशित करने का प्रयास करेंगे. उन्होंने बताया कि लगभग 1.39 करोड़ मामलों की सुनवाई पूरी हो चुकी है, जबकि 1.06 करोड़ मामलों में दस्तावेज अपलोड किये जा चुके हैं. राज्य सरकार ने चुनाव संबंधी कार्यों के लिए 8,505 ग्रुप-बी अधिकारियों के नाम उपलब्ध कराये हैं. वे (ग्रुप बी अधिकारी) कल से कार्यभार संभालेंगे. दो दिन के प्रशिक्षण के बाद, नये पर्यवेक्षकों को पांच से सात दिनों के भीतर उनके ‘लॉगिन क्रेडेंशियल’ मिल जायेंगे. अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद अगर किसी मतदाता का नाम सूची में नहीं है, तो वे पांच दिनों के भीतर जिला चुनाव अधिकारी (डीइओ) को आवेदन कर सकते हैं. अगर डीइओ आवेदन का निपटारा नहीं करते हैं, तो मतदाता अगले पांच दिनों के भीतर सीइओ से संपर्क कर सकते हैं.
क्या हैं सुप्रीम कोर्ट के निर्देश
कोर्ट ने प्रभावित व्यक्तियों की ओर से पेश दस्तावेजों की जांच के लिए समय सीमा 14 फरवरी से एक सप्ताह आगे बढ़ा दीपश्चिम बंगाल सरकार ने चुनाव आयोग को ग्रुप-बी के जिन 8,505 अधिकारियों की सूची उपलब्ध करायी है, उन्हें एसआइआर प्रक्रिया में प्रशिक्षित और नियोजित किया जा सकता हैराज्य सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि ये 8,505 अधिकारी मंगलवार को शाम पांच बजे तक जिला निर्वाचन अधिकारी या इआरओ के समक्ष ड्यूटी पर रिपोर्ट करेंचुनाव आयोग के पास मौजूदा इआरओ या सहायक मतदाता पंजीकरण अधिकारी (एइआरओ) को बदलने और नये मिले अधिकारियों की उपयुक्तता के आधार पर इनकी सेवाएं लेने का अधिकार होगाआयोग इन 8,505 अधिकारियों के बायोडाटा और कार्य अनुभव की जांच करने के बाद इनमें से, पहले से ही कार्यरत माइक्रो अॉब्जर्वर की संख्या के बराबर अधिकारियों का चयन भी कर सकता हैनये मिले अधिकारियों को इआरओ या एइआरओ के साथ सूक्ष्म पर्यवेक्षकों की सहायता करने के उद्देश्य से एक या दो दिन का प्रशिक्षण दिया जाये माइक्रो ऑब्जर्वर के पास मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने का अधिकार नहीं होगा. वह सिर्फ अपनी रिपोर्ट देंगे. उसके आधार पर इआरओ व एइआरओ अंतिम निर्णय लेंगे. कोई गड़बड़ी सामने आने पर आयोग इआरओ व एइआरओ को हटा सकता है.