मौसम की तरह बदली सियासत, विधानसभा, लोकसभा और राज्यसभा जाने वाली इकलौती नेता, कांग्रेस में वापसी का क्या है खेल?

Mousam Benazir Noor Biography: बंगाल की राजनीति की सबसे ‘हिसाबी’ नेता मौसम बेनजीर नूर फिर से कांग्रेस में हैं. इसी पार्टी के टिकट पर विधानसभा का चुनाव लड़ रहीं हैं. सुजापुर छोड़ मालतीपुर से लड़ने और 2029 के लोकसभा प्लान की इनसाइड स्टोरी यहां पढ़ें.

Mousam Benazir Noor: पश्चिम बंगाल की राजनीति में मौसम (Mousam) की तरह रंग बदलने का हुनर अगर किसी के पास है, तो वह हैं मालदा के गनी खान चौधरी परिवार की चश्म-ओ-चिराग मौसम बेनजीर नूर. पिछले कुछ वर्षों में बंगाल की राजनीति में ऐसी ‘मौसमी हवा’ कम ही देखने को मिली है, जैसी मौसम नूर के इर्द-गिर्द चलती है.

कभी कांग्रेस, कभी तृणमूल और अब फिर से कांग्रेस. 46 साल की मौसम नूर भारत की उन दुर्लभ राजनेताओं में शामिल हो गयीं हैं, जिन्हें देश की तीनों प्रमुख कार्यपालिकाओं- विधानसभा, लोकसभा और राज्यसभा का सदस्य बनने का गौरव प्राप्त है.

गनी खान की विरासत और 29 की उम्र में राजनीति में एंट्री

मौसम नूर के खून में राजनीति है. मालदा के बेताज बादशाह रहे बरकत गनी खान चौधरी की विरासत को उन्होंने बखूबी संभाला है. मां की मृत्यु के बाद, मात्र 29 साल की उम्र में उन्होंने सुजापुर विधानसभा सीट से राजनीति में कदम रखा. विधायक का कार्यकाल पूरा होने से पहले ही लोकसभा की जंग में कूद पड़ीं. मालदा उत्तर से कांग्रेस की सांसद बनीं. बहुत कम समय में वह कांग्रेस ‘हाईकमान’ की नजरों में चढ़ गयीं थीं.

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2019 का वो यू-टर्न और राज्यसभा का सफर

मौसम नूर का राजनीतिक ग्राफ 2019 में अचानक बदल गया. लोकसभा चुनाव से ठीक पहले उन्होंने कांग्रेस छोड़कर तृणमूल कांग्रेस (TMC) का दामन थाम लिया. हालांकि, वह चुनाव हार गयीं. हार के बाद ममता बनर्जी ने 2020 में उन्हें टीएमसी कोटे से राज्यसभा भेज दिया. कार्यकाल खत्म होने से पहले ही मौसम ने एक बार फिर अपना ठिकाना बदल लिया. अपने पुराने घर यानी कांग्रेस में वापसी कर ली.

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2026 की जंग : सुजापुर छोड़ मालतीपुर को क्यों चुना?

इस बार विधानसभा चुनाव में मौसम नूर मालतीपुर सीट से मैदान में हैं. अपनी पुरानी सीट सुजापुर को छोड़ने के पीछे एक गहरी राजनीतिक चाल मानी जा रही है. सियासी गलियारों में चर्चा है कि यह केवल एक विधानसभा चुनाव नहीं है. भविष्य की बड़ी प्लानिंग है. मौसम नूर का असली लक्ष्य 2029 में दक्षिण मालदा लोकसभा सीट से दिल्ली कूच करना है. मालतीपुर की लड़ाई उनके उसी मिशन का हिस्सा है.

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Mousam Benazir Noor: राजनीति की सबसे ‘हिसाबी’ खिलाड़ी

मौसम नूर के बारे में एक बात मशहूर है कि वह राजनीति के साथ-साथ निजी जीवन में भी बेहद ‘हिसाबी’ हैं. वह कब, कहां और क्या बोलेंगी, यह सब पहले से तय होता है. घर के खर्चों से लेकर राजनीति के अगले कदम तक, वह सब कुछ बहुत सोच-समझकर और योजनाबद्ध तरीके से करती हैं. उनके विरोधी भी उन्हें पश्चिम बंगाल की राजनीति की सबसे ‘धुरंधर’ और रहस्यमयी खिलाड़ी मानते हैं, जिनके अगले कदम का अंदाजा कोई नहीं लगा पाता.

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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