सुप्रीम कोर्ट में बहस करने वाली पहली मुख्यमंत्री बनीं ममता बनर्जी

मुख्यमंत्री व तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) के दौरान हो रही कथित गड़बड़ियों के खिलाफ बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में खुद अपनी दलीलें पेश कीं.

कहा- एसआइआर के जरिये पश्चिम बंगाल को निशाना बनाया जा रहा

सीएम ने कहा : लोकतंत्र को बचाने व पारदर्शी मतदाता सूची के लिए एसआइआर में अदालत को हस्तक्षेप करना चाहिए

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग सहित सभी पक्षों को दिया नाेटिस

नौ फरवरी को होगी मामले की अगली सुनवाई, ममता बनर्जी भी उपस्थित रह सकती हैं

संवाददाता, कोलकातामुख्यमंत्री व तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) के दौरान हो रही कथित गड़बड़ियों के खिलाफ बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में खुद अपनी दलीलें पेश कीं. इस दौरान उन्होंने चुनाव आयोग पर राज्य को बेवजह निशाना बनाने और लोगों के अधिकारों का हनन करने का आरोप लगाया. सुश्री बनर्जी ने सर्वोच्च न्यायालय से ‘लोकतंत्र को बचाने’ और निष्पक्ष एसआइआर को सुनिश्चित करने के लिए हस्तक्षेप करने का आग्रह किया. उन्होंने दावा किया कि एसआइआर प्रक्रिया के दौरान निर्वाचन आयोग ने कई जीवित व्यक्तियों को मृत घोषित कर दिया है. उन्होंने एक बार निर्वाचन आयोग को व्हाट्सएप आयोग कहा, जो स्पष्ट रूप से चुनाव आयोग की ओर से अपने अधिकारियों को व्हाट्सएप पर कथित रूप से भेजे जा रहे निर्देशों की ओर इशारा था. ममता बनर्जी सुप्रीम कोर्ट में बहस करने वाली पहली मौजूदा मुख्यमंत्री बन गयीं.

शीर्ष अदालत में सुश्री बनर्जी का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और श्याम दीवान ने किया. ममता बनर्जी ने प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ से व्यक्तिगत रूप से अपनी दलीलें पेश करने की अनुमति मांगी. पीठ ने नोटिस जारी कर निर्वाचन आयोग और पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी से उनकी याचिका पर नौ फरवरी तक जवाब मांगा है. सोमवार को फिर मामले की सुनवाई होगी.

सीएम से बोले प्रधान न्यायाधीश- आपको पांच मिनट क्या 15 मिनट दिये जायेंगे

सुश्री बनर्जी ने प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ से अदालत से अपनी दलीलों को रखने की अनुमति देने का अनुरोध किया. उन्होंने पूछा: क्या आप मुझे सिर्फ पांच मिनट का समय दे सकते हैं. प्रधान न्यायाधीश ने जवाब में कहा कि अदालत उन्हें अपनी दलीलें पेश करने के लिए पांच मिनट नहीं, बल्कि 15 मिनट का समय देगी. हालांकि, अदालत ने कहा कि आपकी ओर से पैरवी कर रहे वकील भी दक्ष हैं, पहले उनको बोलने दें. इसके बाद सुश्री बनर्जी ने आरोप लगाया कि उच्चतम न्यायालय के निर्देश के बावजूद चुनाव आयोग आधार कार्ड स्वीकार नहीं कर रहा है और मतदाता सूची पुनरीक्षण के लिए मतदाताओं से अन्य दस्तावेज मांग रहा है.

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By AKHILESH KUMAR SINGH

AKHILESH KUMAR SINGH is a contributor at Prabhat Khabar.

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