ममता बनर्जी का आरोप- शुभेंदु अधिकारी ने मुझे घर में नजरबंद करने की धमकी दी, भाजपा प्रवक्ता ने किया पलटवार

Mamata Banerjee Vs Suvendu Adhikari: ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी पर उन्हें घर में कैद करने की धमकी देने का आरोप लगाया. बीजेपी प्रवक्ता देवजीत सरकार ने इसे सफेद झूठ बताते हुए टीएमसी सुप्रीमो को कोर्ट जाने की चुनौती दी.

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (कालीघाट खेमे) की सुप्रीम लीडर ममता बनर्जी ने एक बयान देकर राज्य की राजनीति में खलबली मचा दी है. ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट साझा करके शुभेंदु अधिकारी पर उन्हें घर में नजरबंद करने धमकी देने का आरोप लगाया. इस पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के मुख्य प्रवक्ता देवजीत सरकार ने पलटवार करते हुए कहा कि बंगाल की जनता ने अब उनका परित्याग कर दिया है. अगर कोई सबूत है, तो वह कोर्ट में जायें.

राष्ट्रपति और सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की अपील

ममता बनर्जी ने सोमवार की रात अपने पोस्ट में लिखा- सरकारी कार्यालय में बैठकर मुझे धमकी दी गयी. कहा गया कि मुझे मेरे घर से भी बाहर नहीं निकलने दिया जायेगा. ममता बनर्जी ने इसे लोकतंत्र और संवैधानिक अधिकारों पर हमला करार देते हुए सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रपति से हस्तक्षेप करने की गुहार लगायी है.

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शुभेंदु अधिकारी का 15 सेकेंड का बयान

पश्चिम बंगाल की पूर्व चीफ मिनिस्टर ममता बनर्जी ने ‘एक्स’ (पहले ट्विटर) पर शुभेंदु अधिकारी के 15 सेकेंड के एक वीडियो के साथ जो पोस्ट शेयर किया है, उसमें शुभेंदु अधिकारी को कहते सुना जा रहा है- आप फेसबुक पर ही रहें, दोपहर में. आपको सड़क पर नहीं निकलना होगा. आप सड़क पर न आ पायें, इसकी व्यवस्था मैं करूंगा. हालांकि, शुभेंदु अधिकारी ने कब और किस संदर्भ में यह बयान दिया था, इस संक्षिप्त वीडियो से इसका पता नहीं चल पा रहा है.

‘लोकतंत्र में विपक्षी दल के प्रमुख को धमकी देने का अधिकार किसे है?’

ममता बनर्जी ने लिखा है- सरकारी दफ्तर में बैठकर शुभेंदु अधिकारी ने मुझे खुलेआम धमकी दी है कि वह सुनिश्चित करेंगे कि मैं अपने घर से बाहर भी न निकल सकूं. उनके शब्द बिल्कुल स्पष्ट थे- मैं सुनिश्चित करूंगा कि आप घर से बाहर न निकल सकें. पूर्व मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति और सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को टैग करते हुए पूछा है- क्या हमारे संविधान ने इसी भारत की कल्पना की थी? एक संवैधानिक लोकतंत्र में किसी विपक्षी दल के प्रमुख की आवाजाही पर रोक लगाने या धमकी देने का अधिकार किसे है?

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‘सीएम का बयान भाजपा की मानसिकता का प्रतीक’

तृणमूल (कालीघाट खेमा) की सुप्रीमो ने कहा- यह सिर्फ मेरे बारे में नहीं है. यह भाजपा की उस मानसिकता का प्रतीक है, जहां विरोधियों की आवाज दबाने, उन्हें नजरबंद करने और संवैधानिक अधिकारों को छीनने की कोशिश की जा रही है. पोस्ट के अंत में ममता बनर्जी ने लिखा कि सत्ता का अहंकार कुछ समय के लिए डरा सकता है, लेकिन इतिहास गवाह है कि जनता के सामने अहंकार को झुकना पड़ता है. उन्होंने भाजपा सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि उनकी बौखलाहट और घबराहट साफ नजर आ रही है.

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सफेद झूठ बोल रहीं ममता बनर्जी : देवजीत सरकार

ममता बनर्जी के आरोपों को भाजपा के मुख्य प्रवक्ता देवजीत सरकार ने सफेद झूठ करार दिया. उन्होंने प्रभात खबर (prabhatkhabar.com) को बताया कि बंगाल सरकार ने ऐसा कुछ नहीं किया है. ममता बनर्जी को किसने रोका है. वह कौन-सा काम नहीं कर रहीं हैं. कहां नहीं जा पा रहीं हैं. अगर उनके साथ ऐसा कुछ हो रहा है, तो उन्हें इसके सबूत देने चाहिए. उन्हें कोर्ट जाना चाहिए. अदालत के दरवाजे सभी के लिए खुले हैं. सर्फ आरोप लगाने से कुछ नहीं होता.

‘19 महीने में नेता प्रतिपक्ष को 144 बार जाना पड़ा कोर्ट’

भाजपा प्रवक्ता ने ममता बनर्जी को उनके शासनकाल की भी याद दिलायी. उन्होंने कहा कि ममता 15 साल तक सरकार में थीं. उन्होंने क्या किया. प्रवक्ता ने कहा कि शुभेंदु अधिकारी जब नेता प्रतिपक्ष (Leader of Opposition) थे, तब क्या हुआ था. 19 महीने में शुभेंदु अधिकारी को 144 बार हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करनी पड़ी. उन्हें कार्यक्रम के आयोजन तक की अनुमति नहीं दी जाती थी. उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी के मुंह से संविधान और लोकतंत्र की बातें शोभा नहीं देतीं. जनता ने उन्हें 15 साल मौका दिया. अब वह परित्यक्त हैं. अब उनको कोई नहीं सुनता.


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By मिथिलेश झा

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.
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