खास बातें
Mamata Banerjee Girgiti: पश्चिम बंगाल की राजनीति में विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों के बाद शुरू हुआ अंतर्कलह आर-पार की जंग में तब्दील हो गया है. एक तरफ तृणमूल कांग्रेस (TMC) में इस्तीफों की झड़ी लगी है, तो दूसरी तरफ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कविता के जरिये बागी तेवर दिखा रहे नेताओं को कड़ा संदेश दिया है.
फेसबुक पर ममता ने साझा की ‘गिरगिटी’
ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया साइट फेसबुक पर ‘गिरगिटी’ (Chameleon) शीर्षक से एक कविता साझा की है, जिसे पार्टी के भीतर ‘रंग बदलने वाले’ नेताओं पर सीधा हमला माना जा रहा है. इससे पहले भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सांसद सौमित्र खान के विस्फोटक दावे ने आग में घी का काम किया है. सौमित्र ने कहा है कि टीएमसी के 20 सांसद और 50 विधायक बीजेपी के संपर्क में हैं.
बगावती तेवर वाले नेताओं पर ममता का प्रहार
ममता बनर्जी ने अपनी कविता के जरिये उन नेताओं को आईना दिखाया है, जो पार्टी के मुश्किल दौर में साथ छोड़ रहे हैं या नेतृत्व पर सवाल उठा रहे हैं.
- रंग बदलने वालों से सावधान : कविता में ममता दी ने लिखा है कि गिरगिट तो केवल आजीविका के लिए रंग बदलता है, लेकिन कुछ लोग व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए कुछ ही क्षण में अपना चरित्र बदल लेते हैं.
- कार्यकर्ताओं से गद्दारी का आरोप : टीएमसी सुप्रीमो ने उन नेताओं को आड़े हाथों लिया, जिन्होंने मुश्किल समय में जमीनी कार्यकर्ताओं को अकेला छोड़ दिया और अपनी सुख-सुविधाओं के लिए ‘आत्मसम्मान’ का सौदा कर लिया.
- चेतावनी भरा अंत : कविता की अंतिम पंक्तियों में बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ने ‘समय के पहिये’ का जिक्र करते हुए बागियों को चेतावनी दी है कि उनके कर्मों का फल उन्हें जरूर मिलेगा और गद्दारों को उनकी असली कीमत समझ आयेगी.
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सौमित्र खान का महा-विस्फोट : क्या खत्म हो जायेगी टीएमसी?
बीजेपी सांसद सौमित्र खान ने दावा किया है कि टीएमसी का अस्तित्व अब खतरे में है. टीएमसी के 20 सांसद और 50 विधायक पार्टी से बेहद नाराज हैं और वे किसी भी वक्त पाला बदल सकते हैं. उन्होंने कहा कि अगर दिल्ली से बीजेपी आलाकमान का इशारा मिल जाये, तो बंगाल में टीएमसी ताश के पत्तों की तरह ढह जायेगी.
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Mamata Banerjee Girgiti: इस्तीफों का सैलाब और बढ़ती नाराजगी
टीएमसी के भीतर केवल बाहरी दबाव नहीं, बल्कि आंतरिक विद्रोह भी चरम पर है. सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने सभी सांगठनिक पदों से इस्तीफा दे दिया है. सुशांत घोष, अरूप चक्रवर्ती और इंद्रनील सेन जैसे नेताओं ने भी पार्टी के कामकाज और ‘वीवीआईपी कल्चर’ पर गंभीर सवाल उठाये हैं. बागी नेताओं का कहना है कि राशन घोटाला, शिक्षक भर्ती और आरजी कर अस्पताल जैसे मामलों ने जनता के बीच पार्टी की छवि खराब की है, जिसे सुधारने में नेतृत्व विफल रहा है.
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टीएमसी का पलटवार- यह सिर्फ अफवाह
इतने बड़े संकट के बावजूद टीएमसी के आधिकारिक खेमे ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है. पार्टी सांसद सौगत रॉय ने इसे बीजेपी का ‘माइंडगेम’ और दुष्प्रचार करार दिया है. उन्होंने कहा कि टीएमसी एकजुट है और किसी भी नेता के पाला बदलने की बात पूरी तरह बकवास है.
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