पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोलकाता पुस्तक मेला से चुनाव आयोग और भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा. हालांकि, उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया. बृहस्पतिवार को वेस्ट बंगाल की चीफ मिनिस्टर ने दावा किया कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की वजह से मानसिक तनाव और दहशत के कारण अब तक कम से कम 110 लोगों की बंगाल में मौत हो चुकी है.
बुक फेयर में एसआईआर पर ममता बनर्जी की पुस्तक का लोकार्पण
ममता बनर्जी ने 49वें इंटरनेशनल कोलकाता बुक फेयर का उद्घाटन करते हुए कहा कि उनकी नयी पुस्तक का इस मेले में विमोचन हुआ. यह पुस्तक एसआईआर के कारण लोगों को हो रही परेशानी पर आधारित है. उनकी नयी पुस्तक 26 कविताओं का संकलन है. कविता संग्रह का नाम SIR है. बांग्ला में इसे স্যার (सैर) लिखा गया है. इसे हिंदी में इसका उच्चारण ‘सर’ के रूप में होता है.
खुले आसमान के नीचे 5-6 घंटे खड़े रहते हैं लोग – ममता
तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी ने कहा कि सैकड़ों लोगों को हर दिन सुनवाई के लिए बुलाया जा रहा है. एसआईआर शिविरों में बुजुर्गों समेत सभी लोगों को कतार में खुले आसमान के नीचे खड़ा होना पड़ रहा है. एसआईआर हियरिंग के लिए आने वाले लोगों को 5-6 घंटे तक लाईन में खड़ा रहना पड़ता है.
बंगालियों को सरनेम के नाम पर किया जा रहा परेशान – ममता बनर्जी
मुख्यमंत्री ने कहा कि लॉजिकल डिस्क्रिपेंसीज (तार्किक विसंगतियों) के नाम पर चुनाव आयोग बंगालियों को परेशान कर रहा है. उनके सरनेम (उपनाम) को लेकर सवाल पूछे जा रहे हैं. ये सरनेम लोगों को वर्षों से मालूम हैं. ये एक्सेप्टेड भी हैं.
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रवींद्रनाथ टैगोर को भी ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ता – सीएम
ममता बनर्जी ने कहा कि उन्हें ममता बनर्जी और ममता बंद्योपाध्याय, दोनों नामों से जाना जाता है. उसी तरह चटर्जी और चट्टोपाध्याय एक ही उपनाम हैं. उन्होंने कहा कि ब्रिटिश शासन के दौरान ठाकुर को टैगोर नाम से भी जाना जाने लगा. ममता बनर्जी ने कहा कि अगर आज कवि गुरु रवींद्रनाथ टैगोर जीवित होते, तो शायद उन्हें भी इस स्थिति का सामना करना पड़ता.
ममता का दावा – एसआईआर में माता-पिता से उनके बच्चों की उम्र में अंतर पर मांगा जा रहा स्पष्टीकरण
बंगाल की चीफ मिनिस्टर ने दावा किया कि 2 या 2 से अधिक बच्चों वाले माता-पिता से उनकी उम्र में अंतर के बारे में स्पष्टीकरण मांगा जा रहा है. बुजुर्गों से जन्म प्रमाण पत्र मांगे जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि हमारी माताएं हमें सटीक जन्मतिथि नहीं बता सकतीं.
वाजपेयी जी के पास भी नहीं था जन्म प्रमाण पत्र – ममता बनर्जी
ममता बनर्जी ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने उनसे कहा था कि 25 दिसंबर उनकी असली जन्मतिथि नहीं है. उनके पास मैट्रिक (कक्षा 10 की राज्य बोर्ड परीक्षा) के प्रमाण पत्र हैं, जिनसे जन्मतिथि प्रमाणित होती है. लेकिन, पुरानी पीढ़ियों के कई ऐसे लोग हैं, जिनके पास शायद ये कागजात न हों. उन्हें क्यों परेशान किया जाये?
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