जो TMC के साथ नहीं, उसे बंगाल में रहने का अधिकार नहीं! ममता बनर्जी के सामने बोलीं महुआ मोईत्रा

Mahua Moitra ‍Bengali Controversy: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक सरगर्मी तेज है. महुआ मोईत्रा के एक बयान से बंगाल की राजनीति में नया उबाल आने के संकेत हैं. महुआ के बयान पर भाजपा ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. पार्टी ने क्या-क्या कहा है, यहां पढ़ें.

Mahua Moitra ‍Bengali Controversy: पश्चिम बंगाल में उन लोगों को रहने का कोई अधिकार नहीं है, जो तृणमूल कांग्रेस के साथ नहीं हैं. वे बंगाली भी नहीं हैं, जो टीएमसी का साथ नहीं देते. यह कहना है ममता बनर्जी की फायरब्रांड नेता महुआ मोईत्रा का. कृष्णनगर की पूर्व लोकसभा सांसद महुआ मोईत्रा ने कोलकाता के मेट्रो चैनल में बने ममता बनर्जी के मंच से ये बातें कहीं हैं. ममता बनर्जी की उपस्थिति में कहीं हैं.

SIR के विरोध में धरना दे रहीं हैं ममता बनर्जी

वेस्ट बंगाल की चीफ मिनिस्टर और तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम काटे जाने और 60 लाख से अधिक लोगों को विचाराधीन की श्रेणी में रखने के खिलाफ 6 मार्च से धरना पर बैठी हैं. ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस के नेता-कार्यकर्ता लोगों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की मांग करते हुए धरना दे रहे हैं.

महुआ मोईत्रा के बयान पर भाजपा ने बोला हमला

ममता बनर्जी के इसी मंच से कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए पूर्व सांसद ने ये बयान दिया है. उनके बयान को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए इसकी आलोचना की और महुआ मोईत्रा के बयान पर हमला भी बोला है.

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टीएमसी को सपोर्ट नहीं करेंगे, तो बंगाली नहीं रहेंगे?

भाजपा ने कहा है कि महुआ मोईत्रा कह रहीं हैं कि अगर आप ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस को सपोर्ट नहीं करते, तो क्या आप ‘बंगाली नहीं’ रह जाते? क्या आप बंगाल में रहने का अधिकार खो देंगे? ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के सामने दिया गया यह बयान, तृणमूल कांग्रेस के अहंकारी चरित्र को उजागर करता है.

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2024 में 55 प्रतिशत लोगों ने नहीं दिया तृणमूल को वोट

भाजपा ने पूछा है कि इस लिहाज से पश्चिम बंगाल के जिन 55 प्रतिशत लोगों ने तृणमूल कांग्रेस को वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में वोट नहीं दिये, वे सभी बंगाली नहीं हैं! यह पाखंड चौंकाने वाला है. भाजपा ने आगे कहा है कि टीएमसी ने शत्रुघ्न सिन्हा, कीर्ति आजाद और यूसुफ पठान को पश्चिम बंगाल से लोकसभा का सांसद बनाया है. इनमें से कोई भी बंगाली नहीं है. यहां तक कि आपकी पार्टी को चलाने वाला प्रतीक जैन भी बाहरी है. अभी-अभी आपने राजीव कुमार और मेनका गुरुस्वामी को राज्यसभा के लिए नामित किया है. ये दोनों भी तो बंगाली नहीं हैं.

तृणमूल ने बार-बार बंगाल के लोगों पर जनप्रतिनिधि थोपा

भाजपा ने कहा कि बार-बार आपने ऐसे लोगों पर ऐसे ‘जनप्रतिनिधि’ थोपे हैं, जो बंगाल की माटी के लाल नहीं हैं. वहीं, दूसरी तरफ, बंगाल का धन अभिषेक मनु सिंघवी और कपिल सिब्बल जैसे वकीलों की झोली में डाल देते हैं. इनमें से कोई बंगाली नहीं हैं.

Mahua Moitra ‍Bengali Controversy: भाजपा ने उठाया दारीभीत का मुद्दा

पश्चिम बंगाल की मुख्य विपक्षी पार्टी ने तृणमूल कांग्रेस सरकार से पूछा है कि दारीभीत के बारे में आप क्या कहेंगे, जहां उर्दू शिक्षक की भर्ती का विरोध करने वाले विद्यार्थियों को पश्चिम बंगाल पुलिस ने बर्बरता से पीटा. जबरन उर्दू थोपे जाने का राजेश और तापस ने विरोध किया, तो उनकी हत्या कर दी गयी. क्या वे बंगाली नहीं थे?

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महुआ मोईत्रा का बयान शर्मनाक – भाजपा

भाजपा यहीं नहीं रुकी. कहा कि आनंदपुर नरसंहार में जब बंगालियों की मृत्यु हुई, तो वेस्ट बंगाल की चीफ मिनिस्टर के पास पीड़ित परिवारों से मिलने का समय नहीं था. क्या वे बंगाली नहीं थे? भाजपा ने कहा कि पश्चिम बंगाल की पहचान तृणमूल कांग्रेस से नहीं है. पश्चिम बंगाल हर भारतीय बंगाली का है. बंगालियों को तृणमूल कांग्रेस के सर्टिफिकेट की कभी जरूरत नहीं थी, आगे भी नहीं होगी. पार्टी ने महुआ मोईत्रा के बयान को शर्मनाक बताया है.

महुआ के बयान से बढ़ सकता है राजनीतिक विवाद

पश्चिम बंगाल में चुनाव करीब है. इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया की टीम कोलकाता पहुंच रही है. विधानसभा चुनाव 2026 की तैयारियों की समीक्षा करने के लिए. इसके पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के प्रोटोकॉल में चूक पर पश्चिम बंगाल सरकार और केंद्र सरकार के बीच टकराव जारी ही था कि तृणमूल कांग्रेस की फायरब्रांड नेता महुआ मोईत्रा ने ऐसा बयान दे दिया है, जो नये राजनीतिक विवाद को जन्म दे सकता है.

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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