खड़गपुर नगरपालिका का बोर्ड भंग

खड़गपुर नगरपालिका बोर्ड एक बार भी फिर भंग हो गया. फिर से एक बार नगरपालिका की डोर प्रशासक के हाथों में चली गयी.

खड़गपुर. खड़गपुर नगरपालिका बोर्ड एक बार भी फिर भंग हो गया. फिर से एक बार नगरपालिका की डोर प्रशासक के हाथों में चली गयी. खड़गपुर नगरपालिका बोर्ड भंग होने की घटना ने खड़गपुर शहर में ठंड के मौसम में राजनीतिक गर्मी बढ़ा दी है.

पश्चिम बंगाल नगरपालिका अधिनियम, 1993 की धारा 431 की उप-धारा (2) के तहत इस विभाग के आदेश संख्या के तहत भंग कर दिया गया और खड़गपुर नगरपालिका बोर्ड की चेयरपर्सन कल्याणी घोष को पद से बर्खास्त कर दिया गया. गौरतलब है कि नगरॉपालिका के विघटन के साथ, उक्त नगर पालिका में एक प्रशासनिक शून्य उत्पन्न हो गया है, जिसे सार्वजनिक हित में उक्त नगर पालिका के नगर निगम क्षेत्र में नागरिक सेवाओं के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए भरना आवश्यक है, और जबकि उपधारा (3) के प्रावधानों के संदर्भ में उक्त अधिनियम की धारा 431, नगर पालिका के विघटन के परिणामस्वरूप, इस अधिनियम या उस समय लागू किसी अन्य कानून के तहत नगरपालिका अधिकारियों पर निहित सभी शक्तियों और कार्यों का प्रयोग ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों द्वारा प्रशासक या प्रशासक बोर्ड के रूप में नामित किया जायेगा जिन्हें राज्य सरकार इस उद्देश्य के लिए नियुक्त कर सकती है.

उल्लेखनीय है कि इस पहले भी एक बार खड़गपुर नगरपालिका बोर्ड भंग हुआ था और बोर्ड को चलाने की जिम्मेदारी प्रशासक को सौंपी गयी थी. खड़गपुर नगरपालिका बोर्ड पर तृणमूल का कब्जा था. लेकिन अचानक नगरपालिका बोर्ड भंग होने से यह मामला खड़गपुर शहर में चर्चा का विषय बन गया. बोर्ड के पतन के पीछे तृणमूल नेताओं की आपसी खींचतान बतायी जा रही है. वहीं मामले को लेकर खड़गपुर नगरपालिका के तृणमूल पार्षद और नेताओं ने चुप्पी साध ली. वहीं विरोधी दलों का कहना है कि तृणमूल नेता जनता को परिसेवा देने की बजाय कटमनी को बढ़ावा दे चुके हैं. जिसका नतीजा सामने है.

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By AKHILESH KUMAR SINGH

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