I-PAC Case Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की याचिका पर सुनवाई के दौरान उस समय तीखी बहस देखने को मिली, जब बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और जजों के बीच कानूनी बिंदुओं पर जोरदार टकराव हुआ. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के जज ने कपिल सिब्बल को कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि सिर्फ ‘ईडी, ईडी, ईडी’ की रट न लगाते रहें और उन्हें मामले के मूल मुद्दे पर ध्यान केंद्रित करने को कहा.
बंगाल की चीफ मिनिस्टर पर लगे हैं गंभीर आरोप
दरअसल, ईडी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि कोलकाता स्थित आई-पैक कार्यालय में की जा रही जांच और छापेमारी के दौरान राज्य सरकार और खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दखल दिया. इस मामले की सुनवाई जस्टिस पीके मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच कर रही है. पिछली सुनवाई में कोर्ट पहले ही टिप्पणी कर चुका है कि किसी भी जांच एजेंसी के काम में इस तरह का हस्तक्षेप ‘अच्छी स्थिति’ नहीं माना जा सकता. कपिल सिब्बल ने दलील दी कि याचिका ही सुनवाई योग्य नहीं है.
कपिल सिब्बल ने क्या दी दलीलें
- सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की शुरुआत में कपिल सिब्बल ने ईडी की याचिका की वैधता पर ही सवाल खड़े कर दिये हैं. उन्होंने कहा कि यह याचिका एक डिप्टी डायरेक्टर के जरिये दायर की गयी है, जो घटना के समय मौके पर मौजूद ही नहीं थे. ऐसे में यह याचिका सुनवाई योग्य कैसे हो सकती है?
- सिब्बल ने तर्क दिया कि मामला मौलिक अधिकारों के उल्लंघन से जुड़ा बताया जा रहा है, लेकिन याचिकाकर्ता खुद पीड़ित नहीं है. उन्होंने दलील दी कि जो व्यक्ति मौके पर था ही नहीं, वह दूसरों के मौलिक अधिकारों का मुद्दा कैसे उठा सकता है?
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सुप्रीम कोर्ट ने क्या-क्या कहा
- इस पर कोर्ट ने कहा कि मौलिक अधिकार सिर्फ व्यक्ति तक सीमित नहीं है. बेंच ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि मौलिक अधिकार हमेशा किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं होते.
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि क्या ‘रूल ऑफ लॉ’ यानी कानून का शासन अपने आप में एक मौलिक अधिकार नहीं है?
- कपिल सिब्बल ने जब कहा कि अगर ‘रूल ऑफ लॉ’ का उल्लंघन है, तो स्पष्ट करना होगा कि उल्लंघन किस तरह हुआ. बहस के दौरान कोर्ट ने केशवानंद भारती केस का भी हवाला दिया और कहा कि संविधान की मूल संरचना भी मौलिक अधिकारों से जुड़ी है. सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि ऐसे मामलों में अधिकारों की व्याख्या व्यापक तरीके से की जा सकती है.
सुप्रीम कोर्ट ने सिब्बल की दलीलों पर दागा सवाल
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल दागा और जस्टिस ने कहा कि अगर मुख्यमंत्री स्वयं जांच में दखल देती हैं, तो ईडी किसे शिकायत करेगी? उसी राज्य सरकार को, जिसका नेतृत्व मुख्यमंत्री कर रही हैं? इस पर सिब्बल ने जवाब दिया कि तो क्या कोर्ट यह मानकर चल रहा है कि मुख्यमंत्री ने अपराध किया है, जबकि यह केवल आरोप है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह एक आरोप है, लेकिन यह तथ्यों पर आधारित आरोप है. कोर्ट ने कहा कि सिब्बल को उन ईडी अधिकारियों के मौलिक अधिकारों पर ध्यान देना चाहिए, जिन्होंने अलग से याचिका दायर की है.
सुप्रीम कोर्ट ने कपिल सिब्बल से पूछे तीखे सवाल
कोर्ट ने मंगलवार को बंगाल सरकार से पूछा कि अगर केंद्र में आपकी सरकार होती और कोई राज्य ऐसी कार्रवाई करता, तो आपका रुख क्या होता. जस्टिस पीके मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने पूछा कि क्या ड्यूटी पर मौजूद ईडी अधिकारी अपने अधिकार खो देते हैं. कोर्ट ने बताया कि ईडी के कुछ अधिकारियों ने निजी तौर पर भी याचिका दायर की है.
I-PAC Case: क्या है पूरा मामला
8 जनवरी 2026 को ईडी की टीम ने आई-पैक के निदेशक प्रतीक जैन के कोलकाता के लाउडन स्ट्रीट स्थित घर और दूसरी टीम सॉल्टलेक स्थित दफ्तर पर छापा मारा था. आई-पैक ही ममता बनर्जी के लिए पॉलिटिकल स्ट्रैटजी तैयार करती है. कार्रवाई सुबह 6 बजे से शुरू हुई थी, लेकिन करीब 11:30 बजे के बाद मामला बढ़ा. सबसे पहले कोलकाता पुलिस कमिश्नर, प्रतीक जैन के आवास पर पहुंचे थे. कुछ समय बाद सीएम ममता बनर्जी खुद लाउडन स्ट्रीट स्थित उनके घर पहुंच गयीं. ममता बनर्जी कुछ देर बाद जब बाहर निकलीं, तो उनके हाथ में एक हरी फाइल थी. इसके बाद वह आई-पैक के कार्यालय भी गयीं और आरोप है कि वहां से भी फाइलें हटायी गयीं.
