जज तीर्थंकर घोष ने दिया आदेश
संवाददाता, कोलकाताजादवपुर विश्वविद्यालय (जेयू) परिसर में कलकत्ता हाइकोर्ट के निर्देश के बिना अब कोई भी राजनीतिक संगठन कोई कार्यक्रम नहीं कर सकता. शुक्रवार को हाइकोर्ट के न्यायाधीश तीर्थंकर घोष ने कहा कि जब तक उनके पास यह मामला है, यानी 13 मार्च तक बिना अनुमति के किसी को भी यहां राजनीतिक कार्यक्रम करने की इजाजत नहीं होगी. गौरतलब है कि हाल ही में विश्वविद्यालय में विभिन्न राजनीतिक दलों के कार्यक्रमों से वहां गतिरोध व तनाव की स्थिति बनी हुई है.भाजपा को शर्तों के साथ जुलूस निकालने की अनुमति
हालांकि, अदालत ने भाजपा को शर्तों के साथ जुलूस निकालने की अनुमति दे दी. अदालत ने कहा कि नवीना सिनेमाहॉल से जादवपुर थाने के पहले ही जुलूस खत्म कर देना होगा. विश्वविद्यालय से 100 मीटर की दूरी पर ही जुलूस को समाप्त करना होगा. 750 से अधिक लोग जुलूस में शामिल नहीं हो सकते. सुबह 11 बजे से अपराह्न तीन बजे तक ही जुलूस निकाला जा सकता है. स्थानीय थाने को कानून-व्यवस्था देखने को कहा गया है.पुलिस की भूमिका पर सवाल, वकील कल्याण बनर्जी के जवाब पर भी जताया असंतोष
कोलकाता. जादवपुर विश्वविद्यालय में बीते शनिवार को हुई घटना में पुलिस की भूमिका पर कलकत्ता हाइकोर्ट के न्यायाधीश तीर्थंकर घोष ने सवाल उठाया. अदालत के सवाल पर अधिवक्ता कल्याण बनर्जी के जवाब पर भी न्यायाधीश ने असंतोष जताया. अदालत ने कहा कि जिस दिन घटना हुई थी, शिक्षा मंत्री ब्रात्य बसु को सुरक्षा देने में पुलिस विफल रही थी. न्यायाधीश ने सवाल किया : एक कैबिनेट मंत्री का निजी सुरक्षाकर्मी वहां क्यों नहीं था. वहां अशांति हो सकती है, पुलिस के पास इसकी पूर्व सूचना तक नहीं थी. मंत्री को सुरक्षा देने में पुलिस विफल रही है. उन्होंने इस बारे में कल्याण बनर्जी से जवाब मांगा. कई विषयों को लेकर कल्याण बनर्जी के जवाब से न्यायाधीश असंतुष्ट दिखे. जेयू मामले पर सुनवाई 12 मार्च को भी है. इसे 13 मार्च को करने का आवेदन लेकर अधिवक्ता बनर्जी अदालत पहुंचे थे. बनर्जी ने कहा कि न्यायाधीश तीर्थंकर घोष की अदालत में वह किसी सुनवाई में हिस्सा नहीं लेंगे. उन्होंने कहा : हर समय सुरक्षाकर्मी को लेकर जाना संभव नहीं हो पाता. किसी राजनीतिक सभा या कार्यकर्ताओं के साथ बैठक के दौरान भी निजी सुरक्षाकर्मी को ले जाना संभव नहीं है. हाइकोर्ट में वकीलों की यदि कोई बैठक में उन्हें आमंत्रित किया जाता है, तो उस समय भी वह निजी सुरक्षाकर्मी लेकर नहीं आते हैं. वह एक सांसद भी हैं, इसलिए उन्हें सुरक्षा मिलती है. लेकिन सब जगह वह इसका इस्तेमाल नहीं करते हैं. लेकिन उनके तर्क से न्यायाधीश संतुष्ट नहीं हुए. उन्होंने साफ कहा कि शिक्षा मंत्री की सुरक्षा को लेकर अदालत चिंतित है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
